MP: दाढ़ी वाले वकील को पुलिस ने मुस्लिम समझकर पीटा था, दो साल बाद भी पीड़ित को नहीं मिला इंसाफ

23 मार्च 2020 को बैतूल पुलिस ने एक वकील को मुस्लिम समझकर पीटा था क्योंकि वकील ने लंबी दाढ़ी रखी थी, मानवाधिकार आयोग ने अब बैतूल एसपी को तलब किया है

Updated: Mar 25, 2022, 04:58 PM IST

MP: दाढ़ी वाले वकील को पुलिस ने मुस्लिम समझकर पीटा था, दो साल बाद भी पीड़ित को नहीं मिला इंसाफ

भोपाल। मध्य प्रदेश के बैतूल में पुलिस द्वारा एक वकील को पीटे जाने के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने एसपी को नोटिस भेजा है। NHRC ने बैतूल एसपी को 23 मई तक रिपोर्ट सौंपने का अल्टीमेटम दिया है। आयोग ने यह भी कहा है कि उक्त तिथि तक रिपोर्ट नहीं आने की स्थिति में एसपी बैतूल को कमीशन के समक्ष स्वयं हाजिर होना पड़ेगा।

हालांकि, NHRC के इस अल्टीमेटम के बावजूद बैतूल एसपी ने कोई गंभीरता नहीं दिखाई है। हम समवेत ने जब इस केस को लेकर बैतूल एसपी सिमाला प्रसाद से बातचीत की तो उन्होंने शुरुआत में यह कहते हुए टालने का प्रयास किया कि ये पुराना मामला है। बाद में नोटिस को लेकर पूछे जाने पर उन्होंने कोई जानकारी होने से स्पष्ट रूप से इनकार कर दिया। 

क्या है पूरा मामला

23 मार्च 2020 को बैतूल पुलिस ने एडवोकेट दीपक बुंदेले की बेरहमी से पिटाई की थी। पीड़ित ने कई प्लेटफॉर्म्स पर इस घटना की शिकायत की। जब मामला वरीय अधिकारियों से लेकर मानवाधिकार आयोग तक पहुंचा, तो पुलिस अधिकारी पीड़ित से माफी मांगने पहुंचे। हैरानी की बात ये है कि अधिकारियों ने बुंदेले को कहा की दाढ़ी होने के कारण वह उन्हें मुस्लिम समझ बैठे और इसलिए पिटाई कर दिया। अधिकारियों का यह तर्क मध्य प्रदेश के पुलिस विभाग के मन में मुस्लिमों के खिलाफ नफरत और पुलिस की मनमानी एवं अत्याचार का क्रूर चेहरा दर्शाने के लिए काफी है। 

शुक्रवार को इस घटना के 2 साल 2 दिन पूरे हो गए हैं। लेकिन दीपक बुंदेले को इंसाफ नहीं मिल पाया है। दीपक उस घटना को याद कर आज भी सिहर उठते हैं। वे बताते हैं कि आज भी उनके कानों में कभी कभी तेज दर्द उठ जाता है। दीपक बताते हैं कि 23 मार्च 2020 की शाम 5.30 से 6 बजे के बीच वह जरूरी दवा लेने अस्पताल जा रहे थे तब पुलिस ने उन्हें रोका था। 

दीपक बताते हैं कि उस समय लॉकडाउन लागू नहीं हुआ था, लेकिन बैतूल में धारा 144 लागू कर दी गई थी। करीब डेढ़ दशकों से मैं डायबिटीज और ब्लड प्रेशर से जूझ रहा हूं। उस दिन मेरी तबियत बिगड़ गई थी, तो मैंने सोचा कि अस्पताल जाकर कुछ दवाइयां ले लूं। लेकिन मुझे पुलिस ने बीच में ही रोक लिया। मैने पुलिस को समझाने की कोशिश की कि दवाइयां लेनी बहुत जरूरी हैं लेकिन कुछ सुने बिना एक पुलिस वाले ने मुझे थप्पड़ मार दिया।

दीपक बताते हैं कि, 'मैंने उनसे कहा कि आपको संवैधानिक सीमाओं के भीतर काम करना चाहिए। मैं गलत हूं तो धारा 188 के तहत आप हिरासत में लें, लेकिन थप्पड़ मारना गलत है। इतना सुनते ही पुलिसकर्मियों ने अपना आपा खो दिया, और मुझे एवं संविधान को गाली देने लगे। कुछ ही समय में कई पुलिसवाले आ गए और मुझे लाठी से पीटना शुरू कर दिया। जब मैने बताया कि मैं वकील हूं, उसके बाद पुलिस ने मुझे पीटना बंद किया।

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बुंदेले ने 23 मार्च की घटना का सीसीटीवी फुटेज निकलवाने के लिए एक RTI आवेदन दायर किया था, लेकिन जानकारी देने से इनकार कर दिया गया। वे अबतक तमाम पुलिस अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों यहां तक कि सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को पत्र लिखकर अपनी पीड़ा जाहिर कर चुके हैं, लेकिन उन्हें न्याय नहीं मिल सका। उल्टे पुलिस ने बुंदेले के खिलाफ सेक्शन 188 (पब्लिक सर्वेंट के आदेश की अवज्ञा करना), 353 (पब्लिक सर्वेंट को ड्यूटी करने से रोकने के लिए हमला या आपराधिक ताकत) और 294 (सार्वजानिक जगहों पर अश्लील हरकत या गाने के लिए सजा) के तहत केस दर्ज कर लिया है। इस मामलें में दीपक बुंदेले को सेशन कोर्ट बैतूल से अग्रिम जमानत पर बाहर हैं। दीपक बुंदेले को उम्मीद है कि मानवाधिकार आयोग के हस्तक्षेप के बाद उन्हें न्याय मिलेगा।