भोपाल: कर्ज में डूबे मैकेनिक परिवार के 5 सदस्यों ने खाया जहर, दादी-पोती की मौत और 3 की हालत नाजुक

भोपाल के पिपलानी इलाके में रहने वाले एक परिवार ने किया सामूहिक आत्महत्या का प्रयास, पांच लोगों ने एक साथ खाया जहर, 2 की मौत 3 अन्य की हालत गंभीर, कर्ज में डूबा था परिवार

Updated: Nov 26, 2021, 07:59 PM IST

भोपाल: कर्ज में डूबे मैकेनिक परिवार के 5 सदस्यों ने खाया जहर, दादी-पोती की मौत और 3 की हालत नाजुक
Photo Courtesy: Bhaskar

भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से सामूहिक आत्महत्या के प्रयास का सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां एक ही परिवार के पांच सदस्यों ने जहर खाकर जान देने की कोशिश की है। बताया जा रहा है कि परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहा था और कर्ज से परेशान था। इस घटना में दो लोगों की मौत हो गई वहीं तीन अन्य की हालत नाजुक बताई जा रही है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक भेल क्षेत्र स्थित पिपलानी थाना एरिया अंतर्गत आनंदनगर के अशोक विहार में संजीव जोशी अपने परिवार के साथ रहते हैं। जोशी पेशे से एक मैकेनिक हैं और उनकी पत्नी अर्चना किराने की दुकान चलाती हैं। घर में वे अपनी दो बेटियों और वृद्ध मां के साथ रहते हैं। जोशी की दोनों बेटियां पढ़ाई करती थीं। लेकिन बीते कुछ महीनों से वे आर्थिक तंगी से जूझ रहे थे और उनपर कर्ज भी था।

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बताया जा रहा है कि कर्ज न चुका पाने की वजह से जोशी का परिवार बेहद परेशान था। गुरुवार देर रात जोशी और उनके परिवार के सभी लोगों ने तय किया कि कोई अकेले इस कर्जदार बनकर दीवन क्यों ढ़ोए.. सो सबने मिलकर जहर खा लिया। इसके बाद सभी को पास के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। यहां इलाज के दौरान उनकी एक बेटी पूर्वी और वृद्ध मां नंदिनी की मौत हो गई। वहीं जोशी दंपत्ति और एक बेटी की हालत गंभीर है। सामुहिक जहरखुरानी की इस घटना से इलाके में सनसनी मच गई है।

पुलिस फिलहाल इस मामले की जांच में जुट गई है। पुलिस अधिकारियों ने अस्पताल में जोशी का बयान भी लिया है। सूत्रों के मुताबिक घटनास्थल से पुलिस को एक सूइसाइड नोट भी प्राप्त हुआ है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सुसाइड नोट में आर्थिक तंगी और कर्ज का जिक्र है। खबर लिखे जाने तक सुसाइड नोट को लेकर पुलिस ने कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है।

यह हाल तब है जब सरकार जोरशोर से आत्मनिर्भरता का नारा साकार करने के दावे में लगी है। हालांकि खुद एनसीआरबी ने हाल में जो आंकड़ा जारी किया है उसके मुताबिक, साल 2020 व्यापारियों और स्वयं का रोजगार करनेवालों पर सबसे भारी गुज़रा है। इस एक साल में देश में किसानों के मुकाबले स्वयं का व्यवसाय करनेवालों ने ज्यादा आत्महत्याएं की हैं। देश की आर्थिक स्थिति और अच्छे दिनों के दावे करने वालों के मुंह पर ऐसे जुर्म किसी तमाचे से कम नहीं। लेकिन दुख है कि कानून के मुताबिक इसके गुनहगार वो खुद माने जाएंगे जो पीड़ित हैं।