खरगोन में सेंचुरी मिल के कर्मचारियों के जबरन VRS का विरोध जारी, मेधा पाटकर समेत प्रदर्शनकारी महिलाओं की हुई जबरन गिरफ्तारी

खरगोन पुलिस ने समाज सेवी मेधा पाटकर समेत बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी महिलाओं को हिरासत में लिया, पुलिस पर लगा महिलाओं से बर्बरता का आरोप, कई महिलाएं हुई बेहोश हाथ और सिर में लगी चोट

Updated: Aug 05, 2021, 09:59 PM IST

खरगोन में सेंचुरी मिल के कर्मचारियों के जबरन VRS का विरोध जारी, मेधा पाटकर समेत प्रदर्शनकारी महिलाओं की हुई जबरन गिरफ्तारी
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खरगोन। खरगोन के सेंचुरी यार्न मिल के कर्मचारियों को समर्थन देने पहुंची मेधा पाटकर को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। पुलिस ने अन्य प्रदर्शनकारी महिलाओं पर बल का प्रयोग भी किया और डंडे से वार भी किया है। इस पुलिस कार्रवाई में सेंचुरी मिल पर प्रदर्शनकारी महिलाओं के घायल होने की भी खबर है। कुछ के सिर में तो कई के हाथ-पैर में चोटें आयी हैं। ये महिलाएं सेंचुरी मिल के बेचे जाने के विरोध में यहां प्रदर्शन कर रही थीं। मिल के कर्मचारी बीते चार साल से मिल बेचने का विरोध कर रहे हैं। लेकिन मंगलवार को मिल के बाहर बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी इकट्ठे हो गए, मेधा पाटकर के पहुंचने से भी लोगों का हुजूम जुटा था।

स्थानीय प्रशासन इसे कानून व्यवस्था का हवाला देकर हटाने की कोशिस करने गया था। लेकिन इस दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारी महिलाओं को पकड़ कर घसीटा और उन पर डंडे भी चलाए। उन्हें जबरन बस में बैठाकर ले जाया गया। उससे पहले महिलाओं ने घेरा बनाकर मेधा पाटकर की गिरफ्तारी रोकने की कोशिश की। इस दौरान कई महिलाओं को चोट भी लग लग गई।

 

बताया जा रहा है कि सेंचुरी यार्न मिल अपने कर्मचारियों को जबरन नौकरी से निकालने के लिए वीआरएस यानि कि स्वेच्छिक सेवानिवृत्ति दे रही है। जिससे कर्मचारियों में भारी रोष हैं। सेंचुरी कंपनी की इस पॉलिसी से परेशान कर्मचारियों को समाजसेवी और नर्मदा बचाओ आंदोलन की मेधा पाटकर का भरपूर साथ मिल रहा है। इस प्रदर्शन में भी मेधा पाटकर के साथ महिलाएं यही नारा लगा रही थीं कि ‘नहीं किसी से भीख मांगते हम हमारा हक मांगते’। कर्मचारी स्वैच्छिक सेवा निवृत्ति को जबरन उन्हें नौकरी से निकालने की प्रक्रिया मानते हैं।

वहीं इस मामले में सेंचुरी कंपनी प्रबंधन ने कहा था कि VRS लेने के लिए मंगलवार आखिरी मौका है। अपनी मर्जी से VRS लेने वालों को 60 दिन की सेलेरी दी जाएगी। VRS से मिलने वाली राशि 15 दिन में खातों में भेजने की बात कही जा रही है। जबकि कर्मचारियों का कहना है कि वे पैसा नहीं रोजगार चाहते हैं।

 सेचुरी कंपनी का यह केस हाई कोर्ट में भी चल रहा है। फिर भी कंपनी प्रबंधन लोगों को जबरन VRS देकर नौकरी से बेदखल कर रही है। सेंचुरी कंपनी के अधिकारी अनिल दुबे का बयान जुलाई में आया था कि औद्योगिक विवाद अधिनियम को मानते हुए कर्मचारियों को VRS दिया जा रहा है। अगर कंपनी घाटे में है तो सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार उसे बेचा जा सकता है। उन्होंने कहा था कि कर्मचारियों को भी इसका पालन करना चाहिए। वर्तमान में कर्मचारियों को 3 से 5 लाख रुपए का भुगतान कर VRS दिया जा रहा है।

दरअसल चार साल से चल रहे आंदोलन में फूट पड़ गई थी। कुछ कर्मचारी संगठनों ने VRS स्वीकार कर लिया था, लेकिन अन्य को यह स्वीकार नहीं है। दरअसल सेंचुरी कुमार मंगलम बिड़ला ग्रुप की है, जिसे बेचने की तैयारी है।  इसीलिए कर्मचारियों को VRS दिया जा रहा है।