हरदा में इलाज के लिए ख़ुद ही करानी होगी ऑक्सीजन की व्यवस्था, शर्त पर राज़ीनामे के बाद ही मिला रहा है ज़िला अस्पताल में दाख़िला

ज़िला अस्पताल पर्चे पर मरीजों के परिजनों से राजीनामा लिखवा रहा है, जिसमें मरीजों को अस्पताल में बेड और ऑक्सीजन की किल्लत के बावजूद भर्ती कराए जाने की बात अंकित की जा रही है

Updated: Apr 28, 2021, 08:24 AM IST

हरदा में इलाज के लिए ख़ुद ही करानी होगी ऑक्सीजन की व्यवस्था, शर्त पर राज़ीनामे के बाद ही मिला रहा है ज़िला अस्पताल में दाख़िला

हरदा। एक तरफ सरकारी दावा है कि प्रदेश के अस्पतालों में ऑक्सीजन और बेड की किल्लत नहीं है। दूसरी तरफ कृषि मंत्री कमल पटेल के अपने शहर हरदा के ज़िला अस्पताल ने मरीजों को भर्ती करने से अपने हाथ खड़े कर दिए हैं। इतना ही नहीं ज़िला अस्पताल अमानवीयता की हद पार कर इलाज के पर्ची पर मरीजों के परिजनों से एक राजीनामा लिखवा रहा है। जिसमें मरीजों के परिजनों से अस्पताल में बेड और ऑक्सीजन की किल्लत होने के बावजूद भर्ती कराए जाने की बात लिखवायी जा रही है। 

शासकीय अस्पताल में मरीजों के परिजनों को एक पर्चा थमाया जा रहा है। जिसमें परिजन यह लिखने पर मजबूर हैं कि अस्पताल में ऑक्सीजन और बेड की कमी के बावजूद हम मरीज़ को अस्पताल में भर्ती करवा रहा हैं। इस राजीनामा का मतलब साफ है कि अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि अगर मरीज़ की जान चली जाती है तो इसकी गारंटी अस्पताल नहीं लेगा। 

इतना ही नहीं जब इस घटना की रिपोर्टिंग करने हिंदी अख़बार के एक रिपोर्टर पहुंचे तो ज़िला अस्पताल के ही एक पदाधिकारी ने उन्हें धमकाते हुए कहा कि एक बार कोविड पॉज़िटिव हो जाओ, उसके बाद तुम्हें अस्पताल से हम लोग जाने नहीं देंगे। रिपोर्टर को मिली जब इस धमकी की पुष्टि करने के लिए जब हमने खुद रिपोर्टर से इस मसले पर बात की तब उन्होंने धमकी की बात स्वीकारी। हालांकि धमकी देने वाले डॉक्टर का नाम उन्होंने ज़ाहिर नहीं किया। 

पत्रकार ने बताया कि हरदा में दिन प्रतिदिन हालात बेकाबू हो रहा हैं। ऐसे विकराल समय में भी ज़िले का शासकीय अस्पताल मरीजों के प्रति जो उदासीन रवैया अपना रहा है, वो बिल्कुल ही अमानवीय है। पत्रकार ने बताया कि ज़िले के निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम को भी शुक्रवार दोपहर तक कोविड सेंटर में तब्दील नहीं किया गया था।

पत्रकार ने कहा कि शहर और पूरे जिले में भयावह मंज़र देखने को मिल रहे हैं। परिजन मरीज़ की उखड़ती सांसों के साथ दर दर भटकने को मजबूर हैं। लेकिन उन्हें इलाज नहीं मिल रहा है। परिजन इलाज की आस में ज़िला अस्पताल जब पहुंच रहे हैं, तो शासकीय अस्पताल भी उन्हें भर्ती करने से इंकार कर दे रहा है। भर्ती अगर कर भी रहा है तो मरीजों के परिजनों को ऑक्सीजन की व्यवस्था खुद करने की शर्त रख रहा है।