कूनो नेशनल पार्क में बढ़ेगा चीतों का कुनबा, बोत्सवाना से 6 शावकों संग आएंगी 2 मादा चीता

कूनो नेशनल पार्क में 28 फरवरी 2026 को बोत्सवाना से आठ चीते लाए जाएंगे। इनमें दो मादा और छह शावक शामिल हैं। यह पहली बार होगा जब शावकों के साथ चीते भारत आएंगे।

Updated: Feb 10, 2026, 11:46 AM IST

श्योपुर। मध्य प्रदेश का कूनो नेशनल पार्क एक बार फिर इतिहास रचने जा रहा है। आगामी 28 फरवरी को दक्षिणी अफ्रीकी देश बोत्सवाना से आठ नए चीते भारत लाए जाएंगे। इनमें दो वयस्क मादा चीते और उनके छह शावक शामिल हैं। यह पहली बार होगा जब मादा चीते अपने बच्चों के साथ भारत आएंगी। विशेषज्ञ इसे देश में स्थायी और स्वाभाविक चीता आबादी के विस्तार की दिशा में निर्णायक कदम मान रहे हैं।

इन चीतों के आगमन के साथ कूनो नेशनल पार्क न सिर्फ भारत बल्कि वैश्विक स्तर पर भी चीता संरक्षण का सबसे प्रभावी और सफल मॉडल बनकर उभरेगा। वन विभाग और केंद्र सरकार इस पूरे ऑपरेशन को अत्यंत महत्वपूर्ण मानते हुए हर स्तर पर तैयारियों को अंतिम रूप दे चुकी है। बाड़ों की मजबूती, पशु चिकित्सा सुविधाएं, निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को विशेष रूप से अपग्रेड किया गया है।

चीतों को बोत्सवाना की राजधानी गैबोरोन स्थित सर सेरेत्से खामा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से भारतीय वायुसेना के विशेष परिवहन विमान के जरिए भारत लाया जाएगा। लंबी अंतरराष्ट्रीय उड़ान के बाद विमान ग्वालियर वायुसेना स्टेशन पर उतरेगा। वहां से चीतों को एयरफोर्स के हेलीकॉप्टर द्वारा सीधे कूनो नेशनल पार्क पहुंचाया जाएगा। पूरा ट्रांसफर हाई सिक्योरिटी प्रोटोकॉल और तय अंतरराष्ट्रीय मानकों के तहत किया जाएगा। चीतों की सेहत, तनाव स्तर और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यात्रा के हर चरण को बेहद सावधानी से डिजाइन किया गया है।

भारत में चीता पुनर्वास की यह कहानी 17 सितंबर 2022 से शुरू हुई थी जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नामीबिया से लाए गए आठ चीतों को कूनो नेशनल पार्क में छोड़ा था। इसके बाद फरवरी 2023 में दक्षिण अफ्रीका से 12 और चीते भारत लाए गए थे। इन चरणों के बाद कूनो को चीता संरक्षण की एक जीवित प्रयोगशाला के रूप में देखा जाने लगा।

वर्तमान में मध्य प्रदेश में वयस्क चीतों और उनके शावकों को मिलाकर कुल 35 चीते मौजूद हैं। यह आंकड़ा अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। ऐसा इसलिए क्योंकि वैश्विक स्तर पर चीतों के जीवित रहने की औसत दर करीब 40 प्रतिशत मानी जाती है। जबकि, कूनो में यह दर बढ़कर 62 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। यह सफलता भारत के संरक्षण मॉडल की विश्वसनीयता और प्रभावशीलता को अंतरराष्ट्रीय मंच पर साबित करती है।

बोत्सवाना से शावकों के साथ मादा चीतों का आगमन न केवल कूनो के लिए बल्कि पूरे देश के वन्यजीव संरक्षण इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ेगा। इससे भारत में चीतों की स्वाभाविक प्रजनन श्रृंखला को मजबूती मिलेगी और कूनो नेशनल पार्क वैश्विक चीता संरक्षण के सबसे सफल उदाहरणों में स्थायी रूप से दर्ज हो जाएगा।