इंदौर में ब्लैक फ़ंगस की दवा पर मारी-मारी, मंत्री सिलावट और सांसद लालवानी की बैठक में इंजेक्शन के लिए पहुंचे परिजन

इंदौर के एमजीएम अस्पताल का मामला, परिजनों का आरोप कि इंजेक्शन के आवेदन पर अस्पताल कोई जवाब नहीं दे रहा है

Updated: May 25, 2021, 09:16 AM IST

इंदौर में ब्लैक फ़ंगस की दवा पर मारी-मारी, मंत्री सिलावट और सांसद लालवानी की बैठक में इंजेक्शन के लिए पहुंचे परिजन
Photo Courtesy: Naidunia

इंदौर। सोमवार को शिवराज सरकार में मंत्री तुलसीराम सिलावट और सांसद शंकर लालवानी ब्लैक फंगस से जुड़ी एक बैठक कर रहे थे। दोनों नेताओं की यह मीटिंग इंदौर एमजीएम कॉलेज में चल ही रही थी कि ब्लैक फंगस से पीड़ित एक मरीज़ के परिजन बीच मीटिंग में पहुंच गए। बीच मीटिंग में पहुंच कर परिजनों ने जमकर हंगामा किया। परिजनों ने आरोप लगाया कि इंजेक्शन के लिए आवेदन देने के बावजूद अस्पताल कोई सुनवाई नहीं कर रहा है। 

सिलावट और लालवानी की बैठक में पहुंचीं महिला फूट फूट कर रो रही थी। इस बीच मंत्री तुलसीराम सिलावट खुद अपनी जगह से उठकर महिला के पास गए और उनका ढांढ़स बढ़ाया। महिला के साथ आए परिजनों ने कहा कि बार बार गुहार लगाने के बावजूद अस्पताल प्रबंधन की ओर से कोई जवाब नहीं मिल रहा है। मरीजों के परिजन एमजीएम कॉलेज के डीन के कक्ष में सामने काफी देर तक धरने कर बैठे रहे। 

इंदौर शहर में ब्लैक फंगस का संक्रमण तेज़ी से लोगों की अपनी चपेट में ले रहा है। सोमवार को हुई बैठक के बाद तुलसीराम सिलावट ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि अब ब्लैक फंगस में इंजेक्शन सीधे अस्पताल को दिए जाएंगे। और सोशल मीडिया और मीडिया के माध्यम से इंजेक्शन की संख्या को सार्वजनिक किया जाएगा। 

इस समय इंदौर में 300 से अधिक ब्लैक फंगस के मरीज़ अस्पतालों में भर्ती हैं। सबसे ज़्यादा 150 मरीज़ एमवाय अस्पताल में भर्ती हैं। प्रतिदिन एक मरीज़ को 5 इंजेक्शन का डोज दिया जाता है और कुल मिलाकर 40-75 डोज़ का कोर्स होता है। फिलहाल एमवाय अस्पताल के पास इंजेक्शन के 2000 डोज उपलब्ध हैं। जिन निजी अस्पतालों में ब्लैक फंगस के मरीजों का इलाज चल रहा है, वहां भी परिजन इंजेक्शन के लिए भाग दौड़ करते दिखाई पड़ रहे हैं।

बाज़ार में दवा उपलब्ध नहीं है और सरकार तक सबकी पहुंच नहीं। इन हालातों में समय पर इलाज मिलने से ठीक होनेवाली इस बीमारी में भी मृत्यु दर पचास फीसदी से ऊपर पहुंच गई है। मध्य प्रदेश में ब्लैक फंगस की वजह से मरनेवालों की तादाद 53 फीसदी बतायी जा रही है।