चंपत राय के घर पर बुलडोजर क्यों नहीं चला, कांग्रेस ने चंदा चोरी मामले की CBI जांच कराने की मांग की
कांग्रेस के पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने कहा कि चढ़ावा चोरी में सरकार ने SIT का गठन करके केवल नौटंकी की है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन लोगों पर कार्रवाई की जा रही है, वे केवल चढ़ावा गिनने वाले कर्मचारी थे।
भोपाल। राम मंदिर चंदा चोरी मामले में बीजेपी और RSS की चौतरफा फजीहत हो रही है। इस घटना को लेकर देशभर में रामभक्तों में आक्रोश है। मामले में चंपत राय के खिलाफ कार्रवाई न होने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। बुधवार को भोपाल में कांग्रेस नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पूछा कि चंपत राय के घर बुलडोजर कार्रवाई क्यों नहीं हुई। कांग्रेस ने इस मामले की CBI जांच कराने की मांग की है।
कांग्रेस के पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने कहा कि चढ़ावा चोरी में सरकार ने SIT का गठन करके केवल नौटंकी की है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन लोगों पर कार्रवाई की जा रही है, वे केवल चढ़ावा गिनने वाले कर्मचारी थे। शर्मा ने कहा कि अयोध्या में जो कार्रवाई हो रही, वह चंपत राय और उनके करीबियों को बचाने के लिए की जा रही है। उन्होंने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी ने इस मुद्दे पर अब तक कुछ नहीं कहा। पूरे मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है।
पीसी शर्मा ने कहा कि इस मामले में चंपत राय की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए और उनके खिलाफ अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई। उन्होंने कहा कि चंपत राय के इस्तीफे की चर्चा है, लेकिन इसे अब तक स्वीकार नहीं किया गया। शर्मा ने सवाल उठाया कि चंपत राय को जेल क्यों नहीं भेजा गया और उनके मकानों पर बुलडोजर क्यों नहीं चलाया गया।
रामायण-2 में हनुमान का किरदार निभाने वाले विक्रम मस्ताल शर्मा ने कहा कि मैं उस गूंगे शासक से पूछना चाहता हूं, जो संसद से लेकर सड़कों तक कहता था कि मैं राम को लाया हूं। आज वह कहां है और इस मामले पर चुप क्यों है। उन्होंने कहा कि अगर इतिहास में राम मंदिर याद रखा जाएगा, तो यह भी याद रहेगा कि मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे को लेकर विवाद हुआ। यह पैसा किसानों, गरीबों और आम श्रद्धालुओं का था।
कांग्रेस नेता ने कहा कि संसद में जिस समिति को दुनिया की सबसे अच्छी समिति बताया गया था, आज उसी पर सवाल उठ रहे हैं। भाजपा के लोग सत्ता के लालच में मूक दर्शक बने हुए हैं। राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी की कई शिकायतें हुईं, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। विक्रम मस्ताल ने कहा कि मैं मांग करता हूं कि न्यायालय इस मामले का संज्ञान ले। साथ ही राम मंदिर की व्यवस्था सेना को सौंपी जाए और मौजूदा समिति को तत्काल भंग किया जाए।




