गाजा पर पीएम की चुप्पी समझ से परे, सोनिया गांधी ने मोदी सरकार की विदेश नीति पर उठाए सवाल

सोनिया गांधी ने कहा कि भारत की चुप्पी का फायदा पाकिस्तान ने उठाया है। उसने खुद को मध्यस्थ के तौर पर पेश करने की कोशिश की, जबकि भारत अपने पुराने संबंधों की वजह से स्वाभाविक रूप से यह भूमिका निभा सकता था।

Updated: Jun 27, 2026, 01:35 PM IST

नई दिल्ली। कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने गाजा मुद्दे पर मोदी सरकार की चुप्पी को लेकर केंद्र पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि भारत फलस्तीन, ईरान और पश्चिम एशिया के अपने पारंपरिक सहयोगियों से दूर हो गया है। 

सोनिया गांधी ने गाजा के मामले में नरेन्द्र मोदी सरकार की निरंतर चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि भारत को फलस्तीनियों के समर्थन में स्पष्ट और मुखर रुख अपनाना चाहिए तथा गाजा और वेस्ट बैंक में हो रही घटनाओं पर वैश्विक जनमत के अनुरूप प्रतिक्रिया देनी चाहिए।

सोनिया गांधी ने एक अंग्रेजी दैनिक के लिये लिखे लेख में संयुक्त राष्ट्र की स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जांच आयोग की हालिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि गाजा में बच्चों को सुनियोजित तरीके से निशाना बनाया जा रहा है और वहां की मानवीय स्थिति बेहद भयावह हो चुकी है।

कांग्रेस नेत्री ने कहा कि हजारों बच्चों की मौत और तबाही अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा, 'संयुक्त राष्ट्र की स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जांच आयोग इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि गाजा में फलस्तीनियों के विरुद्ध इज़राइली शासन नरसंहार कर रहा है। जून 2026 में, इसी आयोग ने मार्मिक ढंग से इस बात को दोहराया कि इजराइल की कार्रवाइयों का उद्देश्य गाजा में फलस्तीनियों के अस्तित्व को ही समाप्त करना है और इसके लिए उनके बच्चों को निशाना बनाया जा रहा है।'

सोनिया ने लिखा कि इस आयोग की अगुआई अब भारत के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस एस. मुरलीधर कर रहे हैं। उनके नेतृत्व में जारी 94 पन्नों की रिपोर्ट में कहा गया है कि इजराइल की कार्रवाई का मकसद गाजा में फिलिस्तीनियों के अस्तित्व को खत्म करना है और इसके लिए बच्चों को निशाना बनाया जा रहा है।

सोनिया गांधी ने कहा कि जब पूरी दुनिया में इजराइल के खिलाफ विरोध बढ़ रहा है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय गाजा में हुई तबाही को गंभीरता से देख रहा है, तब भारत सरकार अकेली ऐसी आवाज बन गई है, जिसने चुप्पी साध रखी है। उन्होंने कहा कि जस्टिस एस. मुरलीधर की रिपोर्ट पर भी मोदी सरकार ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

उन्होंने अपने लेख में जस्टिस मुरलीधर के दिल्ली हाईकोर्ट से तबादले का भी जिक्र किया। उन्होंने लिखा कि उनका तबादला उस समय हुआ था, जब उन्होंने 2020 के दिल्ली दंगों से पहले BJP नेताओं के कथित भड़काऊ बयानों पर दिल्ली पुलिस की कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए थे।

सोनिया गांधी ने कहा कि भारत कभी उपनिवेशवाद के खिलाफ एक मजबूत आवाज था। देश राष्ट्रीय संप्रभुता, अंतरराष्ट्रीय शांति और विकासशील देशों के साथ एकजुटता की नीति के लिए जाना जाता था। लेकिन आज भारत वैश्विक नियमों के खुले उल्लंघन, ग्लोबल साउथ के लोगों की पीड़ा और गाजा व पश्चिमी तट में मानव गरिमा पर हो रहे हमलों के प्रति उदासीन दिखाई दे रहा है।

सोनिया गांधी ने कहा कि मोदी सरकार की चुप्पी सिर्फ नैतिक रूप से गलत नहीं, बल्कि राष्ट्रीय हितों के लिहाज से भी समझ से परे है। भारत ऐसे समय में इजराइल के और करीब जा रहा है, जब दुनिया का बड़ा हिस्सा उससे दूरी बना रहा है।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इजराइल यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि यह दौरा ऐसे समय हुआ, जब कुछ ही दिनों बाद इजराइल ने ईरान पर हमला किया और वहां के शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व की हत्या हुई। इतिहास इस फैसले को एक हैरान करने वाले रणनीतिक कदम के रूप में याद करेगा।

सोनिया गांधी ने लिखा कि भारत की चुप्पी का फायदा पाकिस्तान ने उठाया है। उसने खुद को मध्यस्थ के तौर पर पेश करने की कोशिश की, जबकि भारत अपने पुराने संबंधों की वजह से स्वाभाविक रूप से यह भूमिका निभा सकता था।

उन्होंने कहा कि भारत ने अपने रणनीतिक हितों और नैतिक मूल्यों दोनों से समझौता किया, लेकिन बदले में उसे सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की दोस्ती मिली। उन्होंने लिखा कि नेतन्याहू आज अमेरिका समेत दुनिया के कई देशों में आलोचना का सामना कर रहे हैं।