सोनाली गुहा के बाद टीएमसी के दो और बागियों ने की घर वापसी की अपील, बोले- गलती हो गई थी

चुनाव से ठीक पहले टीएमसी छोड़कर बीजेपी में गए सरला मुर्मू और अमोल आचार्य ने टीएमसी चीफ ममता बनर्जी से पार्टी में वापस आने देने की अपील की है

Updated: May 24, 2021, 01:21 PM IST

सोनाली गुहा के बाद टीएमसी के दो और बागियों ने की घर वापसी की अपील, बोले- गलती हो गई थी
Photo Courtesy: Timesnow

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की प्रचंड जीत के बाद एक बार फिर से नेताओं के दलबदल का सिलसिला शुरू हो गया है। चुनाव से पहले ममता का साथ छोड़कर बीजेपी का दामन थामने वाले नेता अब फिर टीएमसी की ओर रुख कर रहे हैं। सोनाली गुहा के बाद टीएमसी छोड़ने वाले दो अन्य नेताओं ने भी टीएमसी चीफ ममता बनर्जी से घर वापसी की अपील की है। 

टीएसमसी में दुबारा वापसी करने की इच्छा जताने वालों में मालदा जिला परिषद की सदस्य सरला मुर्मू और अमोल आचार्य शामिल हैं। सरला मुर्मू को टीएमसी ने चुनाव में हबीबपुर सीट से टिकट भी दिया था हालांकि शुभेंदु अधिकारी के कहने पर उन्होंने चुनाव से पहले बीजेपी का दामन थाम लिया था। जब चुनाव नतीजे आए तो टीएमसी ने जिले की 12 में से 8 सीटों पर जीत हासिल की, ऐसे में अब वह वापस ममता के पास आना चाहती हैं।

अमोल आचार्य को इसबार टीएमसी ने टिकट नहीं दिया था, जिससे खफा होकर उन्होंने बीजेपी जॉइन कर ली थी। हालांकि, बीजेपी ने भी उन्हें टिकट नहीं दिया जिस वजह से वे अब टीएमसी में वापसी करना चाहते हैं। आचार्य ने कहा, 'मैंने हमेशा ममता दीदी को ही अपना लीडर माना है। मैं टिकट न मिलने दुखी था और बीजेपी में चला गया था जो मेरी गलती थी। बीजेपी सीबीआई के माध्यम से टीएसमी नेताओं के खिलाफ बदले की कार्रवाई कर रही है जिससे वह उजागर हो गई है। मैंने ममता को पत्र लिखकर माफी मांगी है और उम्मीद है कि वे माफ कर देंगी।'

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इसके पहले दिग्गज नेता व पूर्व डिप्टी स्पीकर सोनाली गुहा भी अपनी गलती को स्वीकारते हुए टीएमसी चीफ को पत्र लिखकर माफी मांग चुकी हैं। पूर्व विधायक ने दो दिन पहके सीएम ममता को एक भावुक पत्र में लिखा था की, 'जब विधानसभा चुनावों में टीएमसी ने मुझे टिकट नहीं दिया तब मैने भावनाओं में बहकर एक गलत पार्टी में शामिल होने का निर्णय कर लिया। जैसे एक मछली बिना पानी के जीवित नहीं रह सकती, वैसे ही मैं आपके बिना नहीं रह सकती दीदी। कृप्या मुझे वापस आने की अनुमति दीजिए, ताकि मैं अपनी बाकी की ज़िन्दगी आपकी छत्रछाया में गुजार सकूं।'