अमेज़न ने फ्यूचर ग्रुप पर लगाए इनसाइडर ट्रेडिंग के आरोप,सेबी से की जांच की मांग

अमेज़न ने अगस्त में हुई रिलायंस और फ्यूचर ग्रुप की डील को रोकने की मांग सेबी से की है

Updated: Nov 11, 2020, 07:04 PM IST

अमेज़न ने फ्यूचर ग्रुप पर लगाए इनसाइडर ट्रेडिंग के आरोप,सेबी से की जांच की मांग
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नई दिल्ली। समाचार एजेंसी रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिकी कंपनी अमेज़न ने फ्यूचर रिटेल लिमिटेड पर इनसाइडर ट्रेडिंग का आरोप लगाया है। रॉयटर्स के अनुसार ने अमेज़न ने सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) को Big Bazaar और FBB जैसे ब्रांडों की मालिक Future Retail Ltd की जांच करने के लिए कहा है। अमेज़न ने सेबी से रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) के साथ हुई फ्यूचर ग्रुप की डील रोकने की मांग की है। रिलायंस ने फ्यूचर ग्रुप के रिटेल बिज़नेस को 3.4 अरब डॉलर में खरीदने की डील की है।

अमेज़न ने सेबी से कहा है कि 2019 में उसने फ्यूचर के साथ एक एग्रीमेंट किया था। इस एग्रीमेंट के मुताबिक, फ्यूचर ग्रुप अपने रिटेल बिज़नेस को दूसरी कंपनियों को नहीं बेच सकती। सेबी को 8 नवंबर को लिखे अपने पत्र में अमेज़न ने आरोप लगाया गया है कि फ्यूचर रिटेल्स ने सिंगापुर के एक मध्यस्थ कोर्ट में रिलायंस के सेंसिटिव प्राइस का खुलासा किया था।

 25 अक्टूबर को अमेज़न ने एक बयान जारी कर कहा था कि वह सिंगापुर मध्यस्थता कोर्ट का फैसला स्वीकार करता है। हालांकि उसी समय रिलायंस इंडस्ट्रीज ने स्टॉक एक्सचेंज में अपनी फाइलिंग में कहा कि उसने ऑर्बिट्रेशन ऑर्डर को देखा है और वह फ्यूचर ग्रुप के साथ बिना कोई देरी किए डील को पूरा करने का अधिकार भी रखती है।  

अमेजन ने 25 अक्टूबर को अपने 20 पेज की फाइलिंग में कहा था कि अंबानी समूह ने प्राइस सेंसिटिव के डिटेल्स को जारी किया है। अमेजन ने कहा कि ऑर्बिट्रेशन प्रोसीडिंग में अंबानी ग्रुप पार्टी नहीं है और वह इसकी पूरी डिटेल्स केवल फ्यूचर रिटेल से ही या उसके प्रमोटर से ले सकता है। फ्यूचर समूह ने हालांकि इस मामले में आरोपों को खारिज किया है और कहा है कि जो भी आदेश है वह पब्लिक डोमेन में है। 

यहाँ रेखांकित करने योग्य बात  यह है कि दूसरी ओर दिल्ली हाई कोर्ट ने किशोर बियानी की कंपनी फ्यूचर रिटेल लिमिटेड  की रिलायंस डील में हस्तक्षेप नहीं करने की याचिका पर अमेजन से जवाब मांगा है। फ्यूचर रिटेल ने आरोप लगाया है कि ई-कॉमर्स सेक्टर की कंपनी सिंगापुर के इंटरनेशनल आर्बिट्रेटर के एक अंतरिम आदेश के आधार पर 24,713 करोड़ रुपए के इस डील में कथित तौर पर हस्तक्षेप कर रही है।