बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ, योजना का 80 फीसदी फंड सिर्फ विज्ञापनों पर हुआ खर्च

एक रिपोर्ट के मुताबिक इस योजना के लिए उपलब्ध कराए गए फंड का लगभग 80 फीसदी इस्तेमाल योजना के प्रचार प्रसार और विज्ञापनों के लिए किया गया

Updated: Dec 11, 2021, 08:44 AM IST

बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ, योजना का 80 फीसदी फंड सिर्फ विज्ञापनों पर हुआ खर्च

नई दिल्ली। मोदी सरकार की महत्वकांक्षी योजना बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का राज्यों में प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा है। बेटियों को इस योजना से कितना लाभ हुआ वह विमर्श का विषय है, लेकिन सरकार ने इस योजना पर कितना खर्च किया है उसे लेकर एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। इसमें बताया गया है कि सरकार ने बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना का लगभग 80 प्रतिशत फंड को प्रचार-प्रसार और विज्ञापनों में खर्च कर डाला।

अंग्रेजी अखबार द हिंदू के मुताबिक महिलाओं के सशक्तिकरण पर संसदीय समिति की लोकसभा में पेश एक रिपोर्ट में ये बात कही गई है। इसमें बताया गया है कि साल 2016 से 2019 के दौरान इस योजना के लिए  कुल 446.72 करोड़ रुपए जारी हुए जिसमें से 78.91 फीसदी फंड्स सिर्फ मीडिया के जरिये प्रचार पर खर्च की गई। महाराष्ट्र से BJP सांसद हीना विजयकुमार गावित की अध्यक्षता वाली समिति ने गुरुवार को लोकसभा में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना के संदर्भ में महिलाओं के सशक्तिकरण पर अपनी पांचवीं रिपोर्ट पेश की है।

यह भी पढ़ें: राम मंदिर पर फैसला सुनाने के बाद सुप्रीम कोर्ट के जजों ने फाइव स्टार होटल में छलकाया था जाम

पैनल की रिपोर्ट में बताया गया है की राज्यों ने केवल 25.13 प्रतिशत फंड यानी 156.46 करोड़ रुपये ही इस योजना पर खर्च किए है। समिति ने आगे कहा कि 2016- 2019 के दौरान जारी किए गए कुल 446.72 करोड़ रुपये में से केवल मीडिया विज्ञापनों पर 78.91 प्रतिशत खर्च किया गया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है की कमेटी बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का संदेश लोगों के बीच फैलाने के लिए मीडिया अभियान चलाने की जरूरत को समझती है। लेकिन, योजना के असल उद्देश्यों को बैलेंस करना भी उतना ही जरूरी है।

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनवरी 2015 में बेटी बचाओ योजना शुरू की थी। इस योजना का देशभर में युद्धस्तर पर पचार किया है। योजना देशभर के 405 जिलों में लागू भी है। इसका उद्देश्य गर्भपात और गिरते बाल लिंग अनुपात से निपटना है। लेकिन असल में इस योजना के पैसों का सिर्फ प्रचार प्रसार में खर्च हो जाना  चिंता का विषय है। 2011 की जनगणना के मुताबिक देश में प्रति 1000 लड़कों पर 918 लड़कियां हैं।