Digvijaya Singh: कृषि कानूनों के मसले पर राष्ट्रपति से उम्मीद नहीं, NDA के सदस्य बनाएं पीएम पर दबाव

विपक्ष के प्रतिनिधिमंडल की राष्ट्रपति से मुलाकात से पहले कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह की सलाह, नीतीश कुमार जैसे एनडीए के सदस्यों से बात करके सरकार पर दबाव बनाना चाहिए

Updated: Dec 09, 2020, 09:10 PM IST

Digvijaya Singh: कृषि कानूनों के मसले पर राष्ट्रपति से उम्मीद नहीं, NDA के सदस्य बनाएं पीएम पर दबाव
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नई दिल्ली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने कहा है कि किसानों के मुद्दे पर एनडीए के उन घटक दलों से बात करनी चाहिए जो किसानों के साथ हैं। उन्होंने खास तौर पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का नाम लेकर कहा है कि उन्हें प्रधानमंत्री मोदी पर किसानों की तरफ से दबाव डालना चाहिए। दिग्विजय सिंह ने यह बात किसानों के मसले पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के साथ विपक्षी नेताओं की बैठक से पहले कही है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने यह भी कहा है कि उन्हें किसान विरोधी कानूनों को वापस लेने की मांग के सिलसिले में राष्ट्रपति से कोई उम्मीद नहीं है।

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने अपने ये अहम सुझाव ट्विटर के जरिए रखे हैं। उन्होंने बुधवार को ट्वीट किया है, 'राष्ट्रपति जी से किसान विरोधी क़ानून को वापस लेने के लिए 24 राजनैतिक दलों का डेलीगेशन आज मिलने जा रहा है। मुझे महामहिम जी से कोई उम्मीद नहीं है। इन 24 राजनैतिक दलों को NDA में उन सभी दलों से भी चर्चा करना चाहिए जो किसानों के साथ हैं। नितीश जी को मोदी जी पर दबाव डालना चाहिए।'

ध्यान रहे कि बिहार चुनाव में कम सीटें हासिल करने वाले नीतीश कुमार को बीजेपी ने मुख्यमंत्री तो बना दिया है, लेकिन जानकारों का मानना है कि इस बार दरअसल असली सत्ता बीजेपी के ही पास है। बिहार बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल समेत कई दिग्गज नेता नीतीश कुमार के सीएम बनने के बाद राज्य सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर चुके हैं। ऐसे में इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि देर सबेर नीतीश कुमार और बीजेपी की राहें अलग हो सकती हैं।

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बिहार चुनाव के ठीक बाद भी दिग्विजय सिंह ने नीतीश कुमार को महागठबंधन में शामिल होने का न्यौता दिया था। उन्होंने नीतीश कुमार से आग्रह किया था कि अब वे बिहार की कमान आरजेडी नेता तेजस्वी को सौंपकर राष्ट्रीय राजनीति में आ जाएं। बता दें कि हाल ही में राजस्थान की राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी ने भी कृषि कानूनों पर एनडीए से अलग होने के संकेत दिए हैं। इसके पहले अकाली दल भी इस मुद्दे पर बीजेपी का साथ छोड़ चुका है। ऐसे में अगर नीतीश कुमार की जेडीयू और हरियाणा में जेजेपी सरीखे दल किसानों के मुद्दे पर बीजेपी से अलग लाइन लें, तो मोदी सरकार पर दबाव बढ़ सकता है। राज्यसभा में तो मोदी सरकार बहुमत के लिए भी सहयोगियों के समर्थन पर निर्भर है।

किसान आंदोलन ने गांधी को जिंदा किया

दिग्विजय सिंह ने किसान आंदोलन को लेकर एक अन्य ट्वीट में लिखा है कि इस आंदोलन ने बापू को जिंदा कर दिया है। उन्होंने लिखा, 'इस किसान आंदोलन ने गांधी जी को ज़िंदा कर दिया। मानो जैसे गांधी जी जाग गए हों इन किसानों की रगों में लहू बनकर। गांधी जी के सत्याग्रह को अपनाकर किसानों ने समूचे देश वासियों में लड़ने की अलख जगाई है।' कांग्रेस नेता ने इसके साथ ही एक रोमांचित करने वाली एक वीडियो भी साझा की है जिसमें गांधी से जुड़े एक किस्से को बेहतरीन तरीके से किसानों से जोड़कर पेश किया गया है।


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आपको बता दें कि 24 विपक्षी दलों का प्रतिनिधिमंडल आज शाम 5 बजे रामनाथ कोविंद से मुलाकात करने वाला है। ये राजनीतिक पार्टियां राष्ट्रपति ने कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग करेंगी। कोरोना प्रोटोकॉल की वजह से इस प्रतिनिधिमंडल में सिर्फ पांच नेता ही शामिल होंगे।