पश्चिम बंगाल में भी महापंचायत करेंगे किसान नेता, आजीविका छीनने वालों को हराने की अपील

किसान नेता राकेश टिकैत और गुरनाम सिंह चढूनी का एलान, पश्चिम बंगाल में भी होगी किसान महापंचायत, जो लोग किसानों की आजीविका छीन रहे हैं, उन्हें वोट न देने का करेंगे आह्वान

Updated: Feb 17, 2021, 10:11 AM IST

पश्चिम बंगाल में भी महापंचायत करेंगे किसान नेता, आजीविका छीनने वालों को हराने की अपील
Photo Courtesy: DNA India

नई दिल्ली। केंद्र की बीजेपी सरकार द्वारा लाए गए तीन कृषि कानूनों के विरुद्ध आंदोलन कर रहे किसान नेताओं ने बड़े संकेत दिए हैं। किसान नेता राकेश टिकैत ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि पश्चिम बंगाल में भी किसान महापंचायत का आयोजन किया जाएगा। इसके साथ ही गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा है कि वे बंगाल जा कर लोगों से यह आह्वान करेंगे कि जो लोग किसानों की आजीविका छीन रहे हैं, उसे वोट न दें। किसान नेताओं ने यह बात गढ़ी सांपला में आयोजित किसान महापंचायत के दौरान कही।

किसान महापंचायत के दौरान राकेश टिकैत ने कहा कि हम पश्चिम बंगाल भी जाने की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम पूरे देश का दौरा करेंगे और पश्चिम बंगाल भी जाएंगे। पश्चिम बंगाल के किसान भी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। उन्हें भी अपनी फसलों के अच्छे दाम नहीं मिल पा रहे हैं। किसान नेता ने कहा कि हम गुजरात, महाराष्ट्र पूरे देश का दौरा करेंगे। पश्चिम बंगाल में भी एक बड़ी सभा आयोजित करने का इरादा है। राकेश टिकैत ने कहा कि वे किसानों की समस्याओं को लेकर पश्चिम बंगाल जाएंगे।

किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि वे बंगाल जा कर लोगों से अपील करेंगे कि जो लोग किसानों की आजीविका छीन रहे हैं, उन्हें वोट न दें। चढूनी ने महापंचायत को संबोधित करते हुए लोगों से अपील की कि वे पंचायत से संसद तक के चुनाव में ऐसे किसी व्यक्ति को वोट न दें, जो किसान आंदोलन को समर्थन नहीं देते। बाद में चढूनी ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान साफ-साफ कहा कि अगर पश्चिम बंगाल में बीजेपी हार जाती है तभी हमारा आंदोलन सफल होगा।

किसान नेताओं की इन घोषणाओं का पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव पर गहरा असर पड़ सकता है। किसान आंदोलन के साथ मोदी सरकार और बीजेपी के तमाम नेताओं-मंत्रियों ने अब तक जो बर्ताव किया है, उसका जवाब देना बीजेपी के लिए आसान नहीं होगा। पश्चिम बंगाल में बीजेपी अब तक सिर्फ ममता सरकार पर आरोप लगाने की भूमिका में नज़र आ रही है। किसान नेताओं के मैदान में उतरने पर बीजेपी को केंद्र सरकार के साथ-साथ हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में अपनी सरकारों के कामकाज पर सफाई भी देनी पड़ सकती है। इससे बीजेपी को हमलावर तेवर छोड़कर बचाव की मुद्रा में आने को मजबूर होना पड़ सकता है।