NHRC ने केंद्र और राज्यों से किसान आंदोलन पर मांगी रिपोर्ट, कांग्रेस बोली- अपनी भूमिका की विकृत व्याख्या कर रहा आयोग

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने किसान आंदोलन के बुरे असर को लेकर केंद्र और राज्यों को भेजा नोटिस, कांग्रेस बोली- शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना सभी का अधिकार

Updated: Sep 15, 2021, 01:18 PM IST

NHRC ने केंद्र और राज्यों से किसान आंदोलन पर मांगी रिपोर्ट, कांग्रेस बोली- अपनी भूमिका की विकृत व्याख्या कर रहा आयोग
Photo Courtesy: NBT

नई दिल्ली। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने विवादास्पद कृषि कानूनों के खिलाफ जारी किसान आंदोलन को लेकर केंद्र और राज्य सरकारों को नोटिस भेजा है। NHRC ने केंद्र समेत दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा और उत्तर प्रदेश सरकार से किसान आंदोलन के कथित बुरे प्रभावों पर रिपोर्ट मांगा है। आयोग ने पूछा है कि किसान आंदोलन के कारण उद्योग-धंधों को हुए नुकसान और आम आदमी को हो रही परेशानियों को लेकर सरकारें क्या कर रही हैं?

NHRC ने यह नोटिस सभी राज्यों के मुख्य सचिवों समेत उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा के पुलिस महानिदेशक वहीं दिल्ली के पुलिस कमिश्नर को यह नोटिस भेजा है। मानवाधिकार आयोग का कहना है कि किसान आंदोलन को लेकर हमें कई शिकायतें मिलीं हैं। इनमें बताया गया है कि इंडस्ट्रियल यूनिट्स, मध्यम और बड़ी कंपनियों पर किसान आंदोलन का बुरा प्रभाव पड़ा है। 

NHRC ने अपने नोटिस में लिखा है कि आंदोलन की वजह से यातायात पर बुरा असर पड़ा है। लंबे जाम की वजह से आम नागरिकों, मरीजों, शारीरिक तौर पर अक्षम व्यक्तियों और वरिष्ठ नागरिकों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। आयोग ने पूछा है कि इससे निपटने के लिए अबतक क्या कदम उठाए गए हैं? आयोग ने अपने नोटिस में यह भी कहा है कि प्रदर्शन स्थलों पर किसान कोरोना प्रोटोकॉल का पालन नहीं कर रहे हैं। 

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इतना ही नहीं एनएचआरसी ने इंस्टीट्यूट ऑफ इकनॉमिक ग्रोथ (IEG) समेत दिल्ली स्कूल ऑफ सोशल वर्क से भी किसान आंदोलन के कथित दुष्प्रभावों को लेकर रिपोर्ट तैयार करने को कहा है। दिल्ली यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ सोशल वर्क से कहा गया है कि वो अपनी टीमें भेजकर यह सर्वे करे कि लंबे  किसान आंदोलन की वजह से लोगों की जिंदगी, उनकी रोजी-रोटी और बुजुर्गों-विकलांगों की हालत पर क्या बुरा प्रभाव पड़ा है? साथ ही उद्योग व आम लोगों पर पड़े अतिरिक्त खर्च के बोझ का भी ब्यौरा जुटाने को कहा है।आयोग ने 10 अक्टूबर तक इसपर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने को कहा है। 

कांग्रेस पार्टी ने मानवाधिकार आयोग के इस नोटिस की तीखी आलोचना की है। कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता गुरदीप सिंह सप्पल ने ट्वीट किया, 'संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार चार्टर के अनुच्छेद 20 में कहा गया है की शांतिपूर्ण सभा और संगठन की स्वतंत्रता का अधिकार हर किसी को है। लेकिन भारत में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ही अपनी भूमिका की विकृत व्याख्या करते हुए पुलिस को शांतिपूर्ण सभा के ‘बुरे प्रभावों’ पर नोटिस भेज रहा है।'