Red Fort Violence: ट्रैक्टरों की बिक्री में बढ़ोतरी को दिल्ली पुलिस ने बताया साजिश का हिस्सा

दिल्ली पुलिस ने अपनी चार्जशीट में कहा है कि हरियाणा और पंजाब में ट्रैक्टरों की बिक्री में बढ़ोतरी यह साबित करता है कि लाल किले पर सुनियोजित तरीके से हिंसा हुई

Updated: Sep 15, 2021, 11:33 AM IST

Red Fort Violence: ट्रैक्टरों की बिक्री में बढ़ोतरी को दिल्ली पुलिस ने बताया साजिश का हिस्सा
Photo Courtesy: The Indian Express

नई दिल्ली। रिपब्लिक डे के मौके पर देश की राजधानी दिल्ली में हुई हिंसा को सुनियोजित करार देने के लिए दिल्ली पुलिस ने अजीबोगरीब तर्क दिया है। दिल्ली पुलिस ने कहा है कि नवंबर 2020 से जनवरी 2021 के दौरान हरियाणा और पंजाब में ट्रैक्टरों की बिक्री बढ़ गई थी जो गहरी और सुनियोजित साजिश का नतीजा है।

अंग्रेजी अखबार द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक लाल किला हिंसा मामले में दिल्ली पुलिस ने अपना चार्जशीट दायर कर दिया है। चार्जशीट के मुताबिक प्रदर्शनकारियों का मकसद लाल किला पर कब्जा जमाना था। ताकि लाल किले को प्रदर्शन स्थल बनाया जा सके। इतना ही नहीं दिल्ली पुलिस का कहना है कि गणतंत्र दिवस पर निशान साहिब और किसानों का झंडा फहराने का मकसद यह था कि देश की जनता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शर्मसार किया जा सके।

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रिपोर्ट के मुताबिक आरोप पत्र में दिल्ली पुलिस में लिखा है कि ट्रैक्टरों की बिक्री में बढ़ोतरी सोची समझी साजिश का ही नतीजा है और इसका एकमात्र मकसद प्रदर्शन के लिए ट्रैक्टरों को दिल्ली लाना था। चार्जशीट के मुताबिक इन तीन महीनों में पंजाब में सर्वाधिक ट्रैक्टरों की बिक्री हुई। पंजाब में दिसंबर 2019 के दौरान जहां 790 ट्रैक्टर बेचे गए वहीं दिसंबर 2020 में 94.30 फीसदी इजाफा के साथ 1535 ट्रैक्टरों की बिक्री हुई। इसी तरह जनवरी 2021 में 2,840 ट्रैक्टरों की बिक्री हुई जो जनवरी 2020 के मुक़ाबले 85.13 फीसदी अधिक है।

इसी प्रकार हरियाणा में नवंबर 2020 में 3,174 ट्रैक्टरों की बिक्री हुई जो नवंबर 2019 के मुकाबले 31.81 फीसदी अधिक है। दिसंबर 2020 का देखा जाए तो इस दौरान प्रदेश में 50.12 फीसदी बढ़ोतरी 2,312 ट्रैक्टरों की बिक्री हुई, जबकि दिसंबर 2019 में 1538 ट्रैक्टर ही बेचे गए थे। जनवरी 2021 में 48 फीसदी बढ़ोतरी के साथ 3900 ट्रैक्टर बेचे गए जबकि जनवरी 2020 में यह संख्या 2,635 थी।

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चार्जशीट में यह भी दावा किया गया है कि ऐसे कई ऑडियो-वीडियो क्लिप्स मौजूद हैं, जिनमें किसान नेता अपने समर्थकों को ट्रैक्टरों को मॉडिफाई करने और हेवी मेटल एक्सेसरीज लगाने के लिए उकसा रहे हैं, ताकि पुलिस की घेराबंदी तोड़ी जा सके। इतना ही नहीं दिल्ली पुलिस का कहना है कि किसान नेताओं ने पहले ही मन बना लिया था कि वे ट्रैक्टर रैली में निर्धारित रूट पर नहीं चलेंगे और यदि पुलिस रोकती भी है तो भी वे घेराबंदी तोड़ किसी भी कीमत पर दिल्ली में प्रवेश करेंगे।

आरोप पत्र में पुलिस ने एक आरोपी इकबाल सिंह के डिस्क्लोजर स्टेटमेंट का हवाला दिया है जिसमें कथित रूप से कहा गया है कि, 'यदि वह निशान साहिब फहराने में सफल रहा तो भारत सरकार द्वारा प्रतिबंधित चरमपंथी समूह सिख्स फॉर जस्टिस (SFJ) द्वारा उसे कैश प्राइज मिलेगा।' चार्जशीट में एक अन्य ऑडियो का हवाला दिया गया है जिसमें कथित रूप से 50 लाख रुपए भुगतान की बात कही गई है। इस संबंध में जांच की जा रही है। 

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दिल्ली पुलिस के इन आरोपों को किसानों के वकील जसदीप ढिल्लों ने बेतुका करार दिया है। उन्होंने कहा है कि बिना किसी सबूत के पुलिस का कहना है कि गरीब किसानों ने लाल किले पर कब्जा करने के लिए ट्रैक्टर खरीदा। एक अन्य वकील अभिषेक गुप्ता ने कहा है कि दिल्ली पुलिस का कॉन्सपिरेसी थ्योरी बचकाना है। वे कानून का मजाक बना रहे हैं। बता दें कि इस मामले में कुल 16 लोगों गंभीर के तहत आरोपी बनाया गया है, जिसमें सभी को बेल मिल चुकी है।