पुलवामा के बाद भारत-पाक के बीच सिंधु जल आयोग की बैठक आज, क्या भारत रोक सकता है पानी

पुलवामा आतंकी हमले के बाद भारत-पाकिस्तान के रिश्तों में जमी बर्फ पिघलने के आसार, एक टेबल पर बैठकर सिंधु जल बंटवारे पर आज चर्चा करेंगे दोनों देश

Updated: Mar 23, 2021, 10:22 AM IST

पुलवामा के बाद भारत-पाक के बीच सिंधु जल आयोग की बैठक आज, क्या भारत रोक सकता है पानी
Photo Courtesy: The Print

नई दिल्ली। करीब ढाई साल के लंबे इंतजार के बाद आज भारत और पाकिस्तान के बीच आखिरकार सिंधु घाटी जल आयोग की बैठक होने वाली है। पाकिस्तान के आठ अधिकारी भारत पहुंच चुके हैं। अगले दो दिनों तक ये सभी दिल्ली में ही रहेंगे। सोमवार को वाघा-अटारी बॉर्डर से होते हुए ये सभी भारत पहुंचे जो सिंधु जल आयोग की सालाना बैठक में हिस्सा लेंगे। देश में हुए पुलवामा हमले की वजह से अगस्त 2018 के बाद ये बैठक नहीं हुई थी। बैठक में पाकिस्तानी दल की अगुआई वहां के जल आयुक्त सैयद मेहर अली शाह कर रहे हैं। वहीं, भारतीय दल की अगुआई प्रदीप कुमार सक्सेना करेंगे।

भारत और पाकिस्तान के बीच ज्यादातर स्थिति तनावपूर्ण ही रहती है, लेकिन इस बार जल आयोग की बैठक से पहले दोनों देशों के बीच सीजफायर समझौता हो चुका है और तनाव में काफी कमी आई है। लिहाजा, माना जा रहा है कि एक अच्छे माहौल में सिंधु घाटी जल को लेकर बातचीत होगी। जल आयोग के इस बैठक को भारत-पाकिस्तान के रिश्तों में जमी बर्फ के पिघलने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। बता दें कि यह वही सिंधु जल आयोग की बैठक है जब पाकिस्तानी आतंकियों ने पुलवामा में भारतीय सैनिकों पर हमला किया था, तब पाकिस्तान का पानी रोकने की देशभर में मांग उठी थी। 

साल 1960 में हुआ था पानी बांटने का समझौता

भारत और पाकिस्तान के बीच 1960 की जल संधि के तहत सिंधु आयोग की स्थापना की गई थी। जिसकी बैठक नई दिल्ली में आज और कल होगी। दरअसल, साल 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच नदियों का पानी बांटने को लेकर एक समझौता हुआ था, जिसे सिंधु जल संधि कहते हैं। वर्ल्ड बैंक की पहल के बाद करीब नौ साल चली बातचीत के बाद ये समझौता हुआ था। 19 सितंबर 1960 को कराची में उस सिंधु नदी घाटी समझौते पर हस्ताक्षर हुए, जिसमें छह नदियों के पानी के उपयोग का बंटवारा हुआ।

इस समझौते के तहत सिंधु नदी घाटी की नदियों को पूर्वी और पश्चिमी नदियों में बांटा गया। इनमें ब्यास, रावी और सतलुज को पूर्वी नदियां मानते हुए इनका पानी भारत के लिए तय किया गया। वहीं, सिंधु, चेनाब और झेलम को पश्चिमी नदियां माना गया और इनका पानी पाकिस्तान के लिए तय किया गया। पाकिस्तान के लिए सिंधु, चेनाब और झेलम नदियां लाइफलाइन हैं। पानी की जरूरतों के लिए पाकिस्तान इन नदियों खासतौर पर सिंधु पर बहुत निर्भर है, लेकिन ये तीनों नदियां पाकिस्तान से शुरू नहीं होती हैं। चेनाब और झेलम का उद्गम भारत में है, तो सिंधु चीन से निकलकर भारत के रास्ते पाकिस्तान पहुंचती है।

क्या भारत रोक सकता है पानी

समझौते के मुताबिक भारत पूर्वी नदियों का पानी बिना किसी रोक-टोक के पूरी तरह इस्तेमाल कर सकता है। वहीं, पश्चिमी नदियों के इस्तेमाल का भी भारत को सीमित अधिकार दिया गया। भारत इन नदियों के पानी का कुल 20% हिस्सा रोक सकता है। अगर भारत पानी रोक दे तो पाकिस्तान में अकाल और सूखे जैसे हालात हो जाएंगे। अब सवाल यह उठता है कि क्या भारत सिंधु घाटी के पानी को रोक सकता है?

पुलवामा आतंकी हमले के बाद केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि भारत बांध बनाकर और नदियों को डाइवर्ट करके पाकिस्तान जाने वाले अपने हिस्से का पानी रोकेगा। मोदी कैबिनेट के कई अन्य मंत्री भी इस तरह की बातें कर चुके हैं। भारत के प्रधानमंत्री रहे दिवंगत अटल बिहारी बाजपेयी के तत्कालीन विदेश सचिव कंवल सिब्बन ने भी पाकिस्तान को पानी देने से मना करते हुए समझौता तोड़ने की चेतावनी दी थी।

हालांकि, विशेषज्ञों का मत इससे भिन्न है। जानकारों का मानना है कि दोनों में से कोई एक देश इस समझौते को एकतरफा नहीं तोड़ सकता है। दोनों देश मिलकर या तो इस समझौते में बदलाव कर सकते हैं या फिर इसे बदल सकते हैं, लेकिन इसे तोड़ नहीं सकते हैं। इसे इसलिए नहीं तोड़ा जा सकता है क्योंकि इसमें वर्ल्ड बैंक की भूमिका है। भारत यदि इस समझौते को तोड़ने का प्रयास करता है तो पाकिस्तान सीधे वर्ल्ड बैंक के पास जाएगा जिससे भारत पर ऐसा नहीं करने का दबाव बढ़ेगा।