अनिल देशमुख पर लगे आरोपों की जांच के मामले में सुप्रीम कोर्ट गई उद्धव सरकार, बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश को दी चुनौती

अनिल देशमुख ने भी बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाया है, अनिल देशमुख पर सचिन वाझे को 100 करोड़ रुपए की उगाही का टारगेट देने का आरोप है

Updated: Apr 06, 2021, 04:20 PM IST

अनिल देशमुख पर लगे आरोपों की जांच के मामले में सुप्रीम कोर्ट गई उद्धव सरकार, बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश को दी चुनौती
Photo Courtesy : Free Press Journal

मुंबई। उद्धव कैबिनेट में गृह मंत्री रहे अनिल देशमुख के समर्थन में अब महाराष्ट्र सरकार खुलकर सामने आ गई है। देशमुख के समर्थन में उद्धव सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। महाराष्ट्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी है। खुद अनिल देशमुख ने भी बॉम्बे हाई कोर्ट के जांच के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।  

सोमवार को बॉम्बे हाई कोर्ट ने परमबीर सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए अनिल देशमुख पर लगे आरोपों की जांच करने की ज़िम्मेदारी सीबीआई को सौंपी थी। बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा था, चूंकि देशमुख अभी गृह मंत्री के पद पर मौजूद हैं। इसलिए राज्य के गृह मंत्रालय के अधीन आने वाली पुलिस की जांच पर भरोसा नहीं किया जा सकता। लिहाज़ा हाई कोर्ट ने इस मामले की जांच की ज़िम्मेदारी सीबीआई को सौंप दी थी।

हालांकि देशमुख ने बॉम्बे हाई कोर्ट का आदेश आने के तुरंत बाद ही शरद पवार और अजित पवार से चर्चा कर गृह मंत्री के पद से इस्तीफ़ा दे दिया। लेकिन इसके ठीक बाद अनिल देशमुख ने भी बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी। 

अनिल देशमुख के इस्तीफे के बाद उद्धव सरकार में श्रम और आबकारी मंत्री दिलीप वलसे  पाटिल को गृह मंत्री बनाया गया है। दिलीप वलसे पाटिल शरद पवार के बेहद करीबी माने जाते हैं। दिलीप वलसे पाटिल अतीत में शरद पवार के निजी सचिव भी रह चुके हैं। पाटिल पुणे ज़िले के अंतर्गत आने वाली अंबेगांव विधानसभा सीट से सात बार के विधायक हैं। पाटिल सबसे पहले 1990 में इसी सीट से चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे थे। 

 मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह ने होम गार्ड विभाग में अपना ट्रांसफर किए जाने के बाद मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को पत्र लिखा था। जिसमें उन्होंने अनिल देशमुख पर यह आरोप लगाए थे कि देशमुख ने सचिन वाझे को मुंबई के रेस्टोरेंट और बार से प्रति महीने 100 करोड़ की उगाही करने का टारगेट दिया था। सीएम को लिखी चिट्ठी वायरल करने के बाद परमबीर सिंह अपना ट्रांसफर रुकवाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने परमबीर सिंह को झटका देते हुए इस मामले की जांच करने से इनकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने परमबीर सिंह को पहले बॉम्बे हाई कोर्ट जाने के लिए कहा। इसके बाद परमबीर सिंह ने बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख किया। जिसके बाद हाई कोर्ट ने अनिल देशमुख पर लगे आरोपों के मामले में सीबीआई को जांच करने की ज़िम्मेदारी सौंप दी।