जग्गी हत्याकांड केस में अमित जोगी को बड़ी राहत, SC ने उम्रकैद की सजा पर लगाई रोक

23 साल पुराने रामअवतार जग्गी हत्याकांड में पूर्व विधायक अमित जोगी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की उम्रकैद की सजा पर अंतरिम रोक लगा दी।

Updated: Apr 23, 2026, 02:24 PM IST

नई दिल्ली। करीब 23 साल पुराने चर्चित रामअवतार जग्गी हत्याकांड में छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे और पूर्व विधायक अमित जोगी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। गुरुवार को उनकी सरेंडर की तय समयसीमा से ठीक पहले शीर्ष अदालत ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के उस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। जिसमें उन्हें हत्या और आपराधिक साजिश का दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल उनकी गिरफ्तारी और सजा के अमल पर रोक लगाते हुए सीबीआई को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

यह मामला बीते 4 जून 2003 का है। रायपुर के मौदहापारा थाना क्षेत्र के पास राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) नेता और कारोबारी रामअवतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उस समय छत्तीसगढ़ में अजीत जोगी की सरकार थी। जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने इस हत्या के पीछे तत्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी और उनके बेटे अमित जोगी की भूमिका होने का आरोप लगाया था। इसके बाद मामला लगातार राजनीतिक और कानूनी बहस का विषय बना रहा।

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सरकार बदलने के बाद साल 2004 में इस मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई थी। जांच एजेंसी ने अपनी सप्लीमेंट्री चार्जशीट में अमित जोगी को इस हत्या की साजिश का मास्टरमाइंड बताया था। इसके बाद साल 2004 से 2007 के बीच चली सुनवाई के बाद विशेष सीबीआई अदालत ने 28 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। हालांकि, अमित जोगी को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया था।

ट्रायल कोर्ट के इसी फैसले को चुनौती देते हुए पीड़ित पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने मामले की दोबारा सुनवाई के लिए इसे छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट भेज दिया था। हाईकोर्ट ने हाल ही में ट्रायल कोर्ट के फैसले को पलटते हुए कहा कि जिन सबूतों के आधार पर अन्य आरोपियों को दोषी माना गया। उन्हीं तथ्यों को अमित जोगी के मामले में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अदालत ने उन्हें हत्या की साजिश का मुख्य आरोपी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। साथ ही उन्हें तीन सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का आदेश दिया था।

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हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ अमित जोगी ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की। सुनवाई के दौरान उनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील दी कि हाईकोर्ट ने उनका पक्ष पूरी तरह सुने बिना जल्दबाजी में फैसला सुना दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें निष्पक्ष सुनवाई का अवसर नहीं दिया गया।

पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने अमित जोगी को आश्वस्त किया था कि उनकी गिरफ्तारी से मिली अंतरिम राहत खत्म होने से पहले याचिका पर सुनवाई कर फैसला सुनाया जाएगा। गुरुवार को जस्टिस विक्रम नाथ, संदीप मेहता और विजय बिश्नोई की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के फैसले पर फिलहाल रोक लगा दी है।

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सुप्रीम कोर्ट के इस अंतरिम आदेश के बाद अमित जोगी को फिलहाल सरेंडर नहीं करना होगा। वहीं, अब इस बहुचर्चित मामले में अगली सुनवाई के दौरान सीबीआई के जवाब और अदालत की टिप्पणी पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी। दूसरी ओर रामअवतार जग्गी का परिवार अब अंतिम न्यायिक फैसले का इंतजार कर रहा है। जबकि, अमित जोगी समर्थकों ने इस राहत का स्वागत किया है।