नीतीश सरकार के आधे से ज्यादा मंत्रियों पर दर्ज हैं आपराधिक मामले

ADR की रिपोर्ट के मुताबिक नीतीश कैबिनेट के 14 में से 8 मंत्रियों के खिलाफ दर्ज हैं आपराधिक केस, इनमें सबसे ज्यादा 4 मंत्री BJP के हैं

Updated: Nov-18, 2020, 08:19 PM IST

नीतीश सरकार के आधे से ज्यादा मंत्रियों पर दर्ज हैं आपराधिक मामले
Photo Courtsey : Twitter

पटना। बिहार की नई नवेली नीतीश सरकार में शिक्षा मंत्री पद की शपथ लेने वाले मेवालाल चौधरी को लेकर हंगामा खड़ा हो गया है। उन पर सबौर कृषि विश्वविद्यालय के वीसी रहते हुए असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती में धांधली करने का आरोप है। लेकिन सच तो ये है कि नीतीश कुमार की कैबिनेट में सिर्फ मेवालाल चौधरी के खिलाफ ही आपराधिक मामले दर्ज नहीं हैं, बल्कि बिहार की नई सरकार के आधे से ज्यादा मंत्रियों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं। और आपराधिक मुकदमों वाले सबसे ज्यादा मंत्री बीजेपी के हैं। इस बात का खुलासा एडीआर की एक रिपोर्ट से हुआ है।

एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) और इलेक्शन वॉच द्वारा जारी रिपोर्ट के मुताबिक नीतीश कैबिनेट के 14 में से आठ यानी 57 फीसदी मंत्रियों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं। इतना ही नहीं इनमें से 6 यानी 43 फीसदी मंत्री ऐसे हैं जिनके खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले चल रहे हैं। 

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आपराधिक मामलों वाले मंत्रियों में सबसे ज्यादा चार मंत्री बीजेपी के हैं, वहीं जेडीयू के 2 और सहयोगी दलों में हिंदुस्तानी आवाम और वीआईपी के एक-एक मंत्री के खिलाफ केस है। सहयोगी दलों से एक-एक मंत्री ही बनाए गए हैं ऐसे में कहा जा सकता है कि इन दलों के सौ फीसद मंत्री आपराधिक हिस्ट्री वाले हैं। लेकिन हंगामा सिर्फ शिक्षा मंत्री मेवालाल चौधरी के नाम पर ही हो रहा है।

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मेवालाल नीतीश कैबिनेट के सबसे अमीर मंत्री भी हैं। उनकी नियुक्ति को लेकर विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने कहा है कि भ्रष्टाचार के मामले में एक फरार आरोपी को शिक्षा मंत्री बनाया गया है। हालांकि अपराध, भ्रष्टाचार और सांप्रदायिकता पर नीतीश कुमार का प्रवचन आगे भी जारी रहेगा। तेजस्वी ने इस मामले में ट्विटर पर लिखा है, "भ्रष्टाचार के अनेक मामलों में भगौडे आरोपी को शिक्षा मंत्री बना दिया। अल्पसंख्यक समुदायों में से किसी को भी मंत्री नहीं बनाया। सत्ता संरक्षित अपराधियों की मौज है। रिकॉर्डतोड़ अपराध की बहार है। कुर्सी ख़ातिर Crime, Corruption और Communalism पर मुख्यमंत्री जी प्रवचन जारी रखेंगे।"

 

 

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बता दें कि मेवालाल चौधरी 2010 से 2015 तक सबौर कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति थे। इसी दौरान उनके ऊपर भर्ती प्रक्रिया में धांधली करने के आरोप लगा। ख़ास बात यह है कि 2017 में जब मेवालाल चौधरी को जेडीयू ने पार्टी से बाहर का रास्ता भी दिखा दिया था और सीएम नीतीश ने मिलने तक से इनकार कर दिया था। लेकिन उन्हीं चौधरी को इस बार नीतीश ने मंत्री पद से नवाज़ा है। चौधरी के खिलाफ कब भी आईपीसी की धारा 409, 420, 46,7 468, 471 और 120 बी के तहत भ्रष्टाचार के मुकदमे दर्ज हैं।