पेगासस जासूसी कांड: SC की कमेटी ने सौंपी रिपोर्ट, 5 फोन में मिला मालवेयर, केंद्र ने जांच में नहीं किया सहयोग

पेगासस जासूसी कांड को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित एक्सपर्ट कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि 29 में से 5 फोन मालवेयर से इनफेक्टेड मिले हैं, हालांकि, इस बात की पुष्टि नहीं हुई है कि पेगासस से जासूसी की गई है

Updated: Aug 25, 2022, 01:42 PM IST

पेगासस जासूसी कांड: SC की कमेटी ने सौंपी रिपोर्ट, 5 फोन में मिला मालवेयर, केंद्र ने जांच में नहीं किया सहयोग

नई दिल्ली। पेगासस जासूसी कांड को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित एक्सपर्ट कमेटी ने अपनी अंतरिम जांच रिपोर्ट दाखिल कर दी है। सुप्रीम कोर्ट ने बताया कि जांच रिपोर्ट से पता चला है कि 29 में से 5 फोन मालवेयर से इनफेक्टेड थे। हालांकि, इस बात कि पुष्टि नहीं हो सकी है कि सभी फोन पेगासस स्पाइवेयर से इनफेक्टेड हैं। सर्वोच्च अदालत ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार इस जांच में सहयोग नहीं कर रही है।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित कमेटी को जांच में सहयोग नहीं करने पर विपक्षी दल कांग्रेस ने केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस ने ट्वीट किया, 'सुप्रीम कोर्ट की जांच कमेटी को, फोन में मालवेयर मिला। कमेटी के अनुसार भारत सरकार ने पेगासस जासूसी जांच में सहयोग नहीं किया। अब सवाल यह उठता है कि मोदी सरकार जांच से क्यों डर रही है? पेगासस केस में देश को गुमराह करने वाले समझ लें कि उनका काला सच जल्द सामने आने वाला है।'

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CJI एनवी रमना, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस हिमा कोहली की बेंच ने कहा कि तकनीकी समिति ने जो रिपोर्ट की है उसके आधार पर यह साफ तौर पर नहीं कहा जा सकता कि जासूसी की गई। हम बिना पूरी रिपोर्ट पढ़े ज्यादा टिप्पणी करना नहीं चाहते। लेकिन कमेटी ने हमें यह बताया है कि केंद्र सरकार ने उन्हें जांच में सहयोग नहीं किया।

CJI ने बताया कि रिपोर्ट दाखिल की गई है, तीन भागों में दी गई है। सुनवाई के दौरान वकील कपिल सिब्बल ने रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की। इस पर सीजेआई ने इनकार कर दिया। इस दौरान कोर्ट ने साफ तौर पर कहा कि रिपोर्ट पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन के लिए नहीं है। कोर्ट ने इसे गोपनीय बताया। साथ ही सीजेआई ने कहा समिति की सिफारिशों को सार्वजनिक किया जाएगा।

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दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने पेगासस जासूसी कांड कि जांच के लिए 27 अक्टूबर 2021 को एक्सपर्ट कमेटी गठित की थी। सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस आरवी रवींद्रन इसके अध्यक्ष बनाये गये थे। इस कमेटी को यह बताना था कि क्या लोगों के फोन या किसी अन्य डिवाइस में जासूसी करने के लिए पेगासस स्पाईवेयर डाला गया था? इसके लिए 29 फोन समिति को दिए गए थे, जिनमें से 5 फोन में मैलवेयर वायरस मिला है। हालांकि, अभी यह साफ नहीं हो पाया है कि यह Pegasus ही है। 

पेगासस एक जासूसी सॉफ्टवेयर (स्पाईवेयर) का नाम है। एक रिपोर्ट के मुताबिक साल 2019 में ही भारत में कम से कम 1400 लोगों के निजी मोबाइल या सिस्टम की जासूसी हुई थी। जिनमें भारत के राजनेताओं, पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं, वरिष्ठ न्यायधीशों को मुख्य तौर पर निशाना बनाया गया था।