पेगासस स्पाइवेयर के जरिए 40 से अधिक पत्रकारों की हुई जासूसी, फॉरेंसिक टेस्ट के हवाले से रिपोर्ट में दावा

द वायर समेत विश्वभर के 16 प्रमुख मीडिया संस्थानों द्वारा की गई जांच में खुलासा हुआ कि भारतीय एजेंसी द्वारा प्रमुख पत्रकारों के फोन हैक हुए, इनमें इंडियन एक्सप्रेस, हिंदुस्तान टाइम्स, द हिन्दू, नेटवर्क 18 समेत कई प्रमुख मीडिया संस्थानों के पत्रकार शामिल हैं

Updated: Jul 19, 2021, 06:57 PM IST

पेगासस स्पाइवेयर के जरिए 40 से अधिक पत्रकारों की हुई जासूसी, फॉरेंसिक टेस्ट के हवाले से रिपोर्ट में दावा
Photo Courtesy: News18

नई दिल्ली। भारतीय एजेंसियों द्वारा देश के प्रमुख पत्रकारों के फोन हैकिंग की जानकारी सामने आई है। 'द वायर' वेब पोर्टल समेत विश्वभर के 16 प्रमुख मीडिया घरानों की पड़ताल में इस बात की पुष्टि हुई है कि देश के 40 से अधिक पत्रकारों के फोन पेगासस स्पाईवेयर की मदद से हैक करने के प्रयास किए गए। रविवार शाम द वायर द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट में बताया गया है कि लीगल कम्यूनिटी मेंबर्स, बिजनेसमैन, सरकारी अधिकारी, वैज्ञानिक, कार्यकर्ताओं समेत अन्य करीब 300 भारतीय लोगों के फोन हैक किए गए।

इस लिस्ट में द वायर, इंडियन एक्सप्रेस, हिंदुस्तान टाइम्स, नेटवर्क18 ग्रुप, इंडिया टुडे, द हिंदू समेत कई संस्थानों के स्थायी व फ्रीलांस पत्रकारों के फोन में पेगासस स्पाइवेयर का इस्तेमाल किया गया है। दरअसल, फ्रांस के एक मीडिया नॉन प्रॉफिट संस्थान फॉरबिडेन स्टोरीज़ और एमनेस्टी इंटरनेशनल के पास इजरायली कंपनी NSO के लीक फोन नंबरों का रिकॉर्ड था, जिसे उन्होंने पेगासस प्रोजेक्ट नाम की पड़ताल के लिए दुनिया के 16 मीडिया संस्थानों के साथ साझा किया था।

निशाना बनाए गए भारतीय पत्रकारों की सूची में द वायर के फाउंडिंग मेंबर्स सिद्धार्थ वर्धराजन और एमके वेणु, फ्रीलांस पत्रकार रोहिणी सिंह, इंडियन एक्सप्रेस की ऋतिका चोपड़ा, इंडिया टुडे के संदीप उन्नीथन, हिंदुस्तान टाइम्स के संपादक शिशिर गुप्ता, द हिंदू की विजेता सिंह समेत कई नाम शामिल हैं। 

एमनेस्टी इंटरनेशनल की फोरेंसिक लैब में भारत में जांचे गए 13 आईफोन में से 9 ऐसे थे जिनमें पेगासस स्पाइवेयर होने के स्पष्ट सबूत मिले। इसके अलावा 9 एंड्राइड फ़ोन की भी जांच हुई जिनमें एक में पेगासस होने के सबूत मिले, जबकि 8 अन्य को लेकर पक्के तौर पर कुछ कहा नहीं जा सकता। हालांकि, इस पूरे इन्वेस्टिगेशन में यह बात सामने नहीं आई कि वे सभी पत्रकार जिनके नंबर इस लिस्ट में शामिल थे, उनकी फोन की सफल जासूसी की गई या नहीं। इस पड़ताल में सिर्फ ये जानकारी सामने आई है कि साल 2017 से 2019 के बीच ये नंबर्स एजेंसियों के टारगेट थे।

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इसी बीच केंद्र की मोदी सरकार ने इस मामले पर स्पष्टीकरण जारी कर हैकिंग में शामिल होने से इनकार कर दिया है।चुनिंदा लोगों पर रखी जा रही सरकारी निगरानी के आरोपों का कोई ठोस आधार अभी तक सामने नहीं आया है। केंद्रीय आईटी मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा है कि भारत एक मजबूत लोकतंत्र है जो अपने सभी नागरिकों के निजता के मौलिक अधिकार के लिए प्रतिबद्ध है।

हालांकि, केंद्र सरकार ने इस बात का खंडन नहीं किया है कि वह पेगासस स्पाईवेयर का उपयोग करती है। ऐसे में सरकार के रवैए को संदिग्ध माना जा रहा है। यदि मीडिया घरानों की यह इन्वेस्टिगेशन सही है तो भारतीय लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों के लिए इससे बुरा कुछ नहीं हो सकता है। 

क्या है पेगासस स्पाईवेयर

पेगासस एक स्पाइवेयर यानी खूफिया सॉफ्टवेयर है। इसे इज़रायल की साइबर सिक्योरिटी कंपनी NSO ने विकसित किया है। यह कितना खतरनाक सॉफ्टवेयर है इस बात का अंदाजा ऐसे लगाया जा सकता है कि यह आपके मोबाइल और कंप्यूटर से गोपनीय और निजी जानकारियां चोरी कर किसी तीसरे आदमी को आसानी से भेजने में सक्षम है। किसी भी व्यक्ति पर खूफिया निगरानी रखने के लिए यह सबसे बेहतर सॉफ्टवेयर माना जाता है।

यह सॉफ्टवेयर यूजर्स के फोन में किसी लिंक के माध्यम से पहुंचता है और उस पर क्लिक करते ही संबंधित फोन नंबर के व्यक्ति का सारा डेटा साफ्टेवेयर कंपनी तक पहुंच जाता है। जैसे कि किसी व्यक्ति को मेल, वाट्सएप व अन्य माध्यम से इसका लिंक भेजा जाए और इसपर क्लिक करने मात्र से उसके फोन या कंप्यूटर में मौजूद सभी जानकारी यह सॉफ्टवेयर इकट्ठा कर कमांड को भेज देता है। यही नहीं, यह सॉफ्देटेवेयर  डिवाइस में हमेशा के लिए रहने भी लगता है। लेकिन अब एक्सपर्ट्स बता रहे हैं कि नये अपडेट के साथ यह स्पाईवेयर अब और भी ज्यादा खतरनाक हो गया है।

इस स्पाईवेयर का अपडेटेड वर्जन इतना खतरनाक है कि एक मिस्ड कॉल कर के ही इसे संबंधित व्यक्ति के डिवाइस में भेजा जा सकता है। इसकी खासियत यह है कि आपका डिवाइस कितना भी प्रोटेक्टेड क्यों न हो यह उसमें रहने लगता है और यूजर्स को पता भी नहीं चलता। इसके बाद यह आपका वॉट्सऐप चैट, फोन कॉल, एसएमएस, कैमरा, गैलरी, सभी चीजों को अपने हिसाब से नियंत्रित कर लेता है। इसके बाद स्पाईवेयर ऑपरेटर को पल-पल की जानकारियां मिलती रहती है, कि आप कहां हैं, क्या कर रहे हैं, किससे आपने क्या बातें की आदि।

इस स्पाइवेयर की निर्माता कंपनी NSO ग्रुप का दावा है कि वे इसका इस्तेमाल किसी भी गलत काम के लिए नहीं करते। कंपनी के मुताबिक वो अपना सॉफ्टवेयर सिर्फ किसी देश की सरकार को बेचते हैं, निजी संस्थान को नहीं। पेगासस उपकरण का उपयोग बड़े पैमाने पर लोगों की निगरानी के लिए नहीं किया जाता है बल्कि यह टारगेट बेस्ड अटैक करता है। ऐसे में जबतक खुद सरकार नहीं चाहती तो यूजर्स के डिवाइस में पेगासस नहीं डाला जा सकता। चूंकि यह बेहद महंगा भी है इसलिए बड़े शक्तिशाली संगठन के अलावा आम नागरिक या संस्था इसका इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं।