भारतीय मिर्च पर रिसर्च के लिए राष्ट्रीय संस्थान बनाने की माँग, संसद में उठा मुद्दा

राज्यसभा में उठा मिर्च पर रिसर्च के लिए नेशनल इंस्टीट्यूट बनाने का मुद्दा, मिर्च के ग्लोबल एक्सपोर्ट में भारत की 50 फ़ीसदी से ज़्यादा हिस्सेदारी है, इसे और बढ़ाने के लिए रिसर्च इंस्टीट्यूट की ज़रूरत है

Updated: Feb 11, 2021, 05:33 PM IST

भारतीय मिर्च पर रिसर्च के लिए राष्ट्रीय संस्थान बनाने की माँग, संसद में उठा मुद्दा
Photo Courtesy: India TV

दिल्ली। देश की संसद में आज भारतीय मिर्च पर रिसर्च के लिए एक राष्ट्रीय संस्थान बनाने की मांग की गई। सरकार के सामने यह मांग बीजेपी सांसद जीवीएल नरसिंह राव ने राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान रखी। बीजेपी सांसद ने ने कहा कि मिर्च का इस्तेमाल न सिर्फ मसाले के तौर पर होता है, बल्कि कई बीमारियों की दवाएं बनाने में भी इसका प्रयोग किया जाता है। अगर इस दिशा में रिसर्च को और आगे बढ़ाया जाए तो देश को काफी लाभ हो सकता है।

जीवीएल नरसिंह राव ने सदन में कहा कि भारत विश्व का सबसे बड़ा मिर्च उत्पादक देश है। देश में दुनिया की लगभग 40 फीसदी मिर्च हमारे देश में पैदा होती है। पूरी दुनिया में भारत से मिर्च का निर्यात करीब 50 प्रतिशत से ज्यादा है। बीते पांच वर्षों में मिर्च का निर्यात दोगुने से भी ज्यादा हो गया है। इसे और आगे बढ़ाने के लिए रिसर्च की ज़रूरत है, जिसके लिए एक राष्ट्रीय संस्थान होना चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे मिर्च उत्पादक किसानों को भी काफी लाभ होगा। 

राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान इसके अलावा कई और अहम मुद्दों पर भी बात हुई। कांग्रेस सांसद राजीव सातव ने दिव्यांगों का मुद्दा उठाया। उन्होंने दिव्यांगों के लिए बने आयोग में पूर्णकालिक आयुक्त की नियुक्ति की मांग की। कांग्रेस सांसद ने कहा कि साल 2016 में दिव्यांगों के कल्याण के लिए कानून बना तो दिया गया है, लेकिन इस कानून का कार्यान्वयन तभी सुनिश्चित होगा जब मुख्य आयुक्त की पूर्णकालिक नियुक्ति होगी। उन्होंने दिव्यांगों से संबंधित राष्ट्रीय न्यास और पुनर्वास आयोग के अध्यक्ष की भी नियुक्ति की मांग की जिससे दिव्यांगों का हित हो सके।

शून्यकाल में बीजेपी सांसद डॉक्टर डी पी वत्स ने युद्ध में शहीद भारतीय जवानों की विधवाओं को सेना में नौकरी देने का मुद्दा उठाया। उन्होंने सेना में पदों की संख्या बढ़ाने की मांग की है। उनका कहना है कि उन महिलाओं को सेना में सीधी भर्ती किए जाने का प्रावधान है। कुछ महिलाएं तो इसके लिए क्वालीफाय कर जाती हैं,इसके लिए सभी फार्मेलिटीज और ट्रेनिंग भी कर लेती है, जिससे उन्हें सेना में भर्ती होने का मौका मिल जाता है। लेकिन बहुत सी महिलाएं पदों की रिक्तियां नहीं होने से सेना में नौकरी पाने से वंचित रह जाती हैं। बीजेपी सांसद ने सरकार से सेना में वैकेंसी बढ़ाने की मांग की है।

कांग्रेस सांसद एल हनुमंतैया ने कर्नाटक के कन्नड़ शास्त्रीय भाषा संस्थान को स्वायत्त संस्थान का दर्जा देने की मांग की। जबकि मध्य प्रदेश की बीजेपी सांसद संपतिया उइके ने गोंडी भाषा को सरकारी कामकाज की भाषा बनाने का मुद्दा उठाया। 

आम आदमी पार्टी सांसद नारायण दास गुप्ता ने दिल्ली में कुछ मेट्रो स्टेशनों पर एक ही गेट खोले जाने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि नए संसद भवन के निर्माण के कारण केंद्रीय सचिवालय औऱ कृषि भवन मेट्रो स्टेशन पर एक ही गेट खोला जा रहा है। इससे लोगों को असुविधा होती है।