साहेब में इंसानियत है, पहले मैं उन्हें गलत समझता था, आजाद ने बांधे पीएम मोदी की तारीफों के पुल

गुलाम नबी आजाद ने कहा कि मैं पहले नरेंद्र मोदी को गलत समझता था, लेकिन बाद में मुझे आभास हुआ कि उनमें इंसानियत है। मुझे कांग्रेस छोड़ने पर मजबूर किया गया।

Updated: Aug 29, 2022, 01:40 PM IST

साहेब में इंसानियत है, पहले मैं उन्हें गलत समझता था, आजाद ने बांधे पीएम मोदी की तारीफों के पुल

नई दिल्ली। कांग्रेस छोड़ने के बाद अब वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद भी पीएम नरेंद्र मोदी के मुरीद हो गए हैं। सोमवार को आजाद ने प्रधानमंत्री की जमकर प्रशंसा। उन्होंने कहा कि पहले मैं मोदी साहेब को गलत समझता था। उन्हें क्रूर समझता था। लेकिन बाद में मुझे आभास हुआ कि उनमें भी इंसानियत है।

आजाद ने पीएम मोदी का जिक्र करते हुए कहा कि, 'संसद में नरेंद्र मोदी न मेरे लिए रोए थे, ना ही मैं उनके लिए रोया था। मोदी साहब ने अपनी स्पीच के दौरान गुजरात की टूरिस्ट बस पर कश्मीर में हुए हमले का जिक्र किया था। जब यह हमला हुआ था तब मैं वहां का मुख्यमंत्री था। मुझे गुजरात के तत्कालीन सीएम मोदी का फोन आया तो मैं बुरी तरह रो रहा था। उन्होंने मुझे ढांढस बंधाया। मैंने मोदी साहेब से कहा कि मैं अभी बात नहीं कर पाऊंगा, क्योंकि मुझे अभी घायलों का इलाज करवाना है।'

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बकौल गुलाम नबी आजाद, इसी घटना को लेकर राज्यसभा के आखिरी दिन पीएम मोदी और मेरी आंखों में आंसू थे। मोदी तो बहाना है, G23 की चिट्ठी लिखे जाने के बाद से उनका (हाईकमान) मेरे साथ विवाद है। वे कभी नहीं चाहते थे कि कोई उन्हें लिखे, उनसे सवाल करे। कई बार बैठकें हुईं, लेकिन एक भी सुझाव नहीं लिया गया।'

कांग्रेस छोड़ने को लेकर आजाद ने कहा कि, 'कांग्रेस मेरा घर था। मैं वहां किराएदार नहीं था। घरवालों ने घर छोड़ने पर मजबूर किया, घर वाले जब पराया समझने लगें तो घर छोड़ देना चाहिए। पार्टी छोड़ने का ऐलान करने के बाद सोनिया गांधी ने मुझसे बात तक नहीं की।' जयराम रमेश के बयान, 'आजाद का डीएनए मोडिफाइड हो गया' पर पलटवार करते हुए गुलाम नबी आजाद ने कहा, 'पहले वे (जयराम रमेश) अपना DNA चेक करवाएं कि कहां के हैं और किस पार्टी से हैं, वह देखें कि उनका DNA किस-किस पार्टी में रहा है। बाहर के लोगों को कांग्रेस का अता-पता नहीं है। चापलूसी और ट्विट कर जिन्हें पद मिला हो अगर वे आरोप लगाएं तो हमें दुख होता है।'

आजाद ने आगे कहा कि चिट्ठी लिखने से पहले मैं तीन रात नहीं सोया, अब चिट्ठी लिखने के बाद भी मैं नहीं सो पा रहा। हमारे पास कोई दौलत नहीं, मेरे पास एक ही दौलत थी, मेरी 50 साल से एक ही संपत्ति थी, जो मेरी स्टूडेंट्स लाइफ से कश्मीर की लड़ाई लड़ी। हमने तो खून दिया, पसीना तो छोटी चीज है। मैं फील्ड में जाता हूं, मैं ट्वीट से सियासत नहीं करता। कांग्रेस को लाने के लिए हमने कई रातें जेल में गुजारी हैं।