योगी सरकार की नीतियों के खिलाफ नौकरशाहों का खुला पत्र, कहा, मौजूदा व्यवस्था राज्य में कर देगी लोकतंत्र का पतन

कुल 74 पूर्व नौकशाहों और पुलिस अधिकारियों ने एक खुला खत लिखा है, जिसमें उत्तर प्रदेश प्रशासन के दमनकारी रवैये की आलोचना की गई है, पत्र में कहा गया है कि सरकार की आलोचना करने वालों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून का दुरूपयोग किया जा रहा है

Updated: Jul 12, 2021, 05:52 PM IST

योगी सरकार की नीतियों के  खिलाफ नौकरशाहों का खुला पत्र, कहा, मौजूदा व्यवस्था राज्य में कर देगी लोकतंत्र का पतन

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के खिलाफ नौकरशाहों ने मोर्चा खोल दिया है। कुल 74 पूर्व नौकरशाहों और पुलिस अधिकारियों ने योगी सरकार की दमनकारी नीतियों की आलोचना की है। पूर्व अधिकारियों ने चार पन्नों का एक खुला पत्र लिखा है जिसमें योगी सरकार की नीतियों और प्रशासन के रवैये की आलोचना की गई है। पत्र में कहा गया है कि जल्द ही इसे नियंत्रित नहीं किया गया तो राज्य में लोकतंत्र का पतन हो जाएगा।  

पूर्व नौकरशाहों ने खुले पत्र में कहा है कि जब से राज्य की मौजूदा सरकार सत्ता में आई है, तब से ही मुसलामानों को सॉफ्ट टारगेट बनाया जाना शुरू हो गया है। पत्र में कहा गया है कि राज्य सरकार का मुसलामानों के प्रति पूर्वाग्रह सबके सामने है। पत्र में कहा गया है कि राज्य में लाया गया लव जिहाद कानून के ज़रिए मुसलामानों को निशाना बनाया गया है। पत्र में इस बात का भी उल्लेख किया गया है कि जो लोग राज्य सरकार की नीतियों से सहमत नहीं होते उनके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) का दुरूपयोग किया जा रहा है।  

योगी सरकार की मशीनरी की भी पत्र में खुलकर आलोचना की गई है। पत्र में कहा गया है कि जिस तरह से मौजूदा सरकार ने सत्ता को चलाने के लिए एक नया मॉडल विकसित किया है, उस कारण रोज़ाना राज्य सरकार संविधान और कानून के दायरे से बाहर जा रहा है। पूर्व नौकरशाहों ने पत्र में कहा है कि सरकार की कार्यशैली से यह सिद्ध होता है कि राज्य में कानून व्यस्वस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। पत्र में कहा गया है कि राज्य की प्रशासनिक शाखा पूरी तरह से ध्वस्त हो गई है। अगर जल्द ही इसमें सुधार नहीं लाया गया तो उत्तर प्रदेश में लोकतंत्र का पतन हो जाएगा। 

पूर्व अनुकरशाहों ने अपने खुले पत्र में राज्य में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों का भी ज़िक्र किया है। पत्र में कहा गया है कि अगले साल होने वाले  चुनाव से पहले अगर सरकार की कार्रवाइयों पर लगाम नहीं लगाई गई तो राज्य में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण और अशांति पैदा होने की पूरी आशंका है।