दफ़्तर दरबारी: सीएम शिवराज सिंह की नाराजगी से खुश हो गए अफसर

मुख्‍यमंत्री के तेवर देख कर मैदानी पोस्टिंग का इंतजार कर रहे अफसरों के मन में उम्‍मीद झिलमिला गई है। वे सोच रहे हैं बिल्‍ली के भाग से छींका टूटे और मुराद पूरी हो जाए। किसी अफसर से चूक हो और मंत्रालय में बैठे आईएएस को कलेक्‍टरी का मौका मिल जाए। वरना तो कौन होगा जो कहेगा कि साहब, मुझे दिक्‍कत है, मैदान से हटा दो।

Updated: Mar 25, 2022, 09:57 PM IST

दफ़्तर दरबारी: सीएम शिवराज सिंह की नाराजगी से खुश हो गए अफसर
शिवराज सिंह चौहान

मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को एक नया नाम मिल गया है – बुलडोजर मामा। चौथे कार्यकाल के दो साल पूरे होने पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसी नाम को सार्थक करने के लिए हुंकार भरी। विश्‍वस्‍त अफसरों को वे अकसर टीम मध्‍यप्रदेश संबोधित करते हैं और एकबार फिर उन्‍होंने इस टीम मध्‍यप्रदेश को ही अपनी नई छवि चमकाने का जिम्‍मा दे दिया है।

पहले भी कई अधिकारियों की कल्‍पनाओं को मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश में लांच किया है और राजनीतिक उपलब्धियां दर्ज की हैं। इस बार भी मंत्रियों और कलेक्टर-एसपी की बैठक में सीएम ने अधिकारियों से दो-टूक कह दिया कि सरकार हमारे हिसाब से चलेगी,जिसे दिक्कत हो बता दे,मुझे बदलने में देर नहीं लगेगी। यानी बलडोजर चलाओ, मामा की छवि चमकाओ और मैदानी पोस्टिंग पर टिके रहो। बुलडोजर चलाने में देरी की तो भोपाल वापसी तय समझो।

मुख्‍यमंत्री के ऐसे तेवर सार्वजनिक मंच और बैठकों में कई बार दिखे हैं। अधिकांश मौकों पर तो कलेक्‍टर या एसपी को हिदायत दे कर काम चला लिया गया है। कुछ मामलों में बतौर सजा अफसरों को तुरंत बदला भी गया है। इस बार की बैठक में मुख्‍यमंत्री के तेवर देख कर मैदानी पोस्टिंग का इंतजार कर रहे अफसरों के मन में उम्‍मीद झिलमिला गई है। वे सोच रहे हैं बिल्‍ली के भाग से छींका टूटे और मुराद पूरी हो जाए। किसी अफसर से चूक हो और मंत्रालय में बैठे आईएएस को कलेक्‍टरी का मौका मिल जाए। मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की नाराजगी ही काम आ सकती है वरना तो कौन होगा जो कहेगा कि साहब, मुझे दिक्‍कत है, मैदान से हटा दो।

 मनचाहे पद के लिए बड़े साहब का मैनेजमेंट

बात पोस्टिंग की हुई है तो मध्यप्रदेश में पोस्टिंग के मामले में अफसरों की स्थिति एक अनार सौ बीमार वाली है। विधानसभा में दल बदल के मामले पर गृहमंत्री नरोत्‍तम मिश्रा ने टिप्‍प्‍णी की थी कि भाजपा पहले से ही ओवरलोडेड है। यानी पार्टी में दलबदलुओं के लिए जगह नहीं है। यह बात तो हास परिहास में कही गई थी मगर रिटायर्ड आईएएस के पुनर्वास के मामले में भी मध्‍य प्रदेश ओवरलोडेड हैं। कई अफसरों ने कोशिश की मगर रिटायर्ड होने के बाद उन्‍हें पद नहीं मिला। लेकिन मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के पसंदीदा अफसर एमबी ओझा का पुनर्वास हो गया है। उन्‍हें 6 महीने से रिक्त राज्य सहकारी निर्वाचन अधिकारी पद पर नियुक्त किया गया है। इस नियुक्ति के बाद पद पाने की लालसा वाले अफसरों की नेताओं तक दौड़ तेज हो गई है।  

मनचाही पोस्टिंग चाहने वाले अफसरों की दौड़ मुख्‍यमंत्री के करीबियों, बीजेपी या संघ नेताओं तक ही नहीं हो रही है बल्कि वे तरह तरह के उपाय कर रहे हैं। बीते हफ्ते अपने बाल बढ़ा रहे एक सीनियर आईएएस चर्चा में आ गए। बताते हैं कि किसी जानकार की सलाह पर उन्‍होंने बाल बढ़ाना शुरू किए हैं। इससे उनके अच्‍छे दिन आ जाएंगे और वे सबसे बड़ा पद पा लेंगे। उनकी मंजिल तो दूर है फिलहाल 30 मार्च को अतिरिक्‍त मुख्‍य सचिव पद के लिए डीपीसी होने वाली है। 1991 बैच के अफसरों को पदोन्‍नति दी जाएगी।

 योग की शरण में प्रदेश के सीएस

प्रदेश को इस माह नए डीजीपी मिले हैं, अब बारी मुख्‍य सचिव की है। वर्तमान मुख्‍य सचिव इकबाल सिंह बैंस नवंबर में रिटायर होने वाले हैं। वे मुख्यमंत्री के सबसे करीबी और भरोसेमंद अफसरों में गिने जाते हैं। इतने विश्‍वस्‍त कि मुख्‍य सचिव बनाने के लिए उन्‍हें नियमों को शिथिल करवा कर प्रतिनियुक्ति से भोपाल बुलवाया गया था। इनदिनों प्रशासनिक गलियारों में बैंस के विकल्‍प की चर्चा है। कयास यह भी है कि सेवानिवृत्ति के तुरंत बाद क्‍या इकबाल सिंह बैंस का भी अपने पूर्ववर्ती सीएस की तरह तुरंत पुनर्वास होगा?

सरकार का जो भी फैसला हो, मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस ने योग केंद्र शुरू करने की तैयारी कर ली है। अपने रिटायरमेंट से एक साल पहले ही सरकारी बंगला खाली कर उन्होंने सारा सामान सूरज नगर स्थित निजी बंगले में शिफ्ट कर दिया था। खबर है कि इस बंगले में ही वे योग केंद्र विकसति कर रहे हैं। यहां योग और ध्‍यान की विविध विधियों का प्रशिक्षण देने की व्‍यवस्‍था होगी।

 छोटे अफसरों का पद खा गए बड़े अफसर

आईएएस के अपने दु:ख है, वांछित पद पाने के अपने जोड़ तोड़ हैं लेकिन एक वर्ग ऐसा भी है जो सरकार की उपेक्षा से त्रस्‍त है और बार बार पत्र लिख कर अपना दर्द बयां कर रहा है। प्रदेश में पिछले 6 साल से 53 विभागों के गैर राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी आईएएस बनने की राह देख रहे हैं। प्रदेश में राजपत्रित अधिकारी वर्ग नॉन डिप्टी कलेक्टर से आईएएस बनने के लिए कुल 19 पद है, जिसमें से अभी सिर्फ 2 अधिकारी ही कार्यरत है। प्रदेश में 17 पद उपलब्ध है। सरकार 2015 तक तो इस वर्ग के अफसर को आईएएस बनाती रही है मगर उसके बाद से राज्य के गैर प्रशासनिक सेवा अधिकारियों के पदोन्नति के कोटे की सीट भी राज्य के प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को आवंटित कर दी गई।

इस वर्ग की आईएएस में पदोन्‍नति की उम्र सीमा 56 वर्ष तय है। सरकार की अनेदखी के कारण आईएएस बनने की उम्‍मीद में कई अफसर रिटायर्ड होने की उम्र में पहुंच गए हैं। डायरेक्‍ट और प्रमोटी अफसरों के बीच में दिखाई देने वाला भेद राज्‍य प्रशासनिक सेवा और गैर प्रशासनिक सेवा के अफसरों में भी दिखाई दे रहा है। यानी छोटी मछली को बड़ी मछली खाती है और बड़ी को उससे बड़ी।