उज्जैन में कुत्तों की फैमिली प्लानिंग, आबादी पर नियंत्रण के लिए नसबंदी अभियान

उज्जैन नगर निगम प्रशासन ने शुरू किया नसबंदी अभियान, कुत्तों की नसबंदी में हर साल खर्च होते हैं 10-12 लाख रुपए, पिछले दो वर्षों में साढ़े आठ हजार कुत्तों की हुई नसबंदी

Updated: Jan 29, 2021, 06:58 PM IST

उज्जैन में कुत्तों की फैमिली प्लानिंग, आबादी पर नियंत्रण के लिए नसबंदी अभियान
Photo Courtesy : Discover Magazine

उज्जैन। देश में लगातार बढ़ रही जनसंख्या को लेकर सरकार तो चिंतित है ही लोग भी अब जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाने की मांग करने लगे हैं। लेकिन, मध्यप्रदेश में सिर्फ इंसानों की बढ़ रही जनसंख्या ही सरकार के लिए चिंता का विषय नहीं है, बल्कि राज्य सरकार के लिए आवारा कुत्तों की जनसंख्या भी परेशानी का सबब बना हुआ है। राज्य सरकार इस मसले पर खासी सतर्क भी है। इतना ही नहीं सरकार इंसानों के साथ-साथ कुत्तों की फैमिली प्लानिंग के लिए काफी पैसे खर्च कर रही है।

मध्यप्रदेश के बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में नगर निगम ने कुत्तों के लिए नसबंदी अभियान चलाया है। उज्जैन में एनिमल बर्थ कंट्रोल प्रोग्राम के तहत डॉक्टरों की निगरानी में कुत्तों की नसबंदी कराई जा रही। जाडे के मौसम को देखते हुए प्रशासन तेजी से कुत्तों की नसबंदी कर रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक निगम ने पिछले दो साल में एक दो नहीं बल्कि साढ़े आठ हजार कुत्तों का नसबंदी करा चुका है। हर साल कुत्तों की नसबंदी के लिए 10 से 12 लाख रुपए खर्च भी किए जा रहे हैं। बावजूद इसके शहर में कुत्तों की जनसंख्या लगातार बढ़ती ही जा रही है।

मामले पर नगर निगम के डिप्टी कमिश्नर संजेश गुप्ता ने बताया कि एक कुत्ते की नसबंदी करने में सरकार को 740 रुपए खर्च करना पड़ता है। इसके लिए आवारा कुत्तों को पकड़कर सदावल डॉग हाउस में चार-पांच दिनों तक रखा जाता है। वहां उनकी नसबंदी से लेकर खान-पान और दवाइयों का पूरा इंतजाम होता है। टांके सूखने के बाद कुत्तों को उन्हीं स्थानों पर छोड़ा जाता है, जहां से उन्हें पकड़ा गया था। कुत्तों की नसबंदी एक्सपर्ट पशु चिकित्सकों के देखरेख में कराई जाती है।' उन्होंने बताया कि एक दिन में करीब 15 कुत्तों की नसबंदी की जाती है।

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डिप्टी कमिश्नर ने बताया कि आमतौर पर लोग बरसात में कुत्तों का नसबंदी कराते हैं, लेकिन ठंड के मौसम में नसबंदी कराना ज्यादा उपयुक्त होता है। चूंकि ठंड में टांकों के पकने की संभावना बेहद कम रहती है। गौरतलब है कि सर्वोच्च न्यायालय ने आवारा कुत्तों को पकड़कर रखना या उन्हें नुकसान पहुंचाने को दंडनीय अपराध माना है। ऐसे में प्रशासन को मजबूरन नसबंदी के बाद कुत्तों को उसी स्थान पर छोड़ना अनिवार्य है जहां से उन्हें पकड़ा गया हो।