Digvijaya Singh :  प्रोटोकॉल भी भूले सीहोर कलेक्टर कार्रवाई की मांग

कांग्रेस सरकार में पूर्व मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के लिए रात 8 बजे सीहोर कलेक्ट्रेट में हुई थी बैठक, अब याद नहीं शिष्‍टाचार

Publish: Jun-13, 2020, 04:42 PM IST

Digvijaya Singh :  प्रोटोकॉल भी भूले सीहोर कलेक्टर  कार्रवाई की मांग

मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्‍ठ नेता दिग्विजय सिंह ने सीहोर जिले के कलेक्टर अजय गुप्‍ता द्वारा द्वारा की अशिष्टता पर कार्रवाई के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखा है। दिग्विजय सिंह ने कहा है कि कलेक्टर का कृत्य प्रोटोकॉल के नियमों का खुला उल्लंघन है। भारतीय आचरण नियम 1968 के अंतर्गत कलेक्टर के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने सीएम शिवराज सिंह चौहान को याद दिलाया कि कमलनाथ सरकार के समय एक पूर्व मुख्यमंत्री के रूप में जब शिवराज सिंह चौहान सीहोर कलेक्ट्रेट में रात्रि में कलेक्टर एवं अन्य अधिकारियों के साथ बैठक लेना चाहते थे तब कलेक्टर अजय गुप्ता ने बैठक के लिये सभी अधिकारियों को रात्रि 8 बजे कलेक्ट्रेट में बुलवाया था।

पूर्व मुख्‍यमंत्री के साथ प्रोटोकाल उल्‍लंघन का मामला बीते सप्‍ताह का है। कांग्रेस के वरिष्‍ठ नेता दिग्विजय सिंह 5 जून को किसानों की समस्याओं को जानने और उनसे बात करने के लिए सीहोर और नसरूल्लागंज गए थे। जिला कलेक्टर को दो दिन पहले जानकारी देने के बाद भी सीहोर जिला मुख्यालय और नसरूल्लागंज में तहसील मुख्यालय जिला प्रशासन ने प्रोटोकॉल के तहत व्‍यवस्‍था नहीं की। दिग्विजय सिंह ने किसानों की समस्याओं पर कलेक्‍टर अजय गुप्‍ता से बात करनी चाही और उन्होंने कलेक्टर, उनके स्टेनो, एसडीएम, तहसीलदार समेत अन्य अधिकारियों को फोन भी लगाया परंतु किसी ने फ़ोन नहीं उठाया। उन्होंने कलेक्टर के इस आचरण की जानकारी संभागायुक्त कवीन्द्र कियावत को भी फोन लगाकर दी। इसके बाद भी उनके प्रवास के दौरान केवल पुलिस अधिकारी ही उनके साथ रहे। सभी प्रशासनिक अधिकारी अनुपस्थित थे।

इस अशिष्‍ट व्‍यवहार की जानकारी देते हुए कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर भारतीय आचरण नियम 1968 के अंतर्गत कलेक्टर के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि मध्यप्रदेश में 1956 के बाद से कई सरकारें आई और गई इस प्रदेश के शासकीय तंत्र ने अपनी सौजन्यता और शिष्टाचार को सदैव बरकरार रखा। मैं 1993 से 2003 तक मध्यप्रदेश का मुख्यमंत्री रहा। निर्धारित व्यवस्थाओं के अनुसार मेरे पूर्ववर्ती सभी मुख्यमंत्रियों के प्रति प्रशासन ने कभी कोई सौजन्यहीनता या अशिष्टता प्रकट नही की। मेरे कार्यकाल में पूर्ववर्ती मुख्यमंत्रियों के प्रति शिष्टाचार एवं सौजन्य प्रदर्शित करने के प्रति मैं स्वयं और शासन-प्रशासन विशेष रूप से सजग रहता था। किसी भी पूर्व मुख्यमंत्री को प्रशासन से शिष्टाचार को लेकर शिकायत का कभी मौका नही मिला।'

सिविल सेवा आचरण नियमों के तहत कार्रवाई की मांग

पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने लिखा, 'भले ही आप अलग-अलग राजनीतिक विचारधारा के कारण व्यक्तिगत शिष्टाचार का पालन नही करते हो, इससे मुझे कोई शिकायत भी नहीं किन्तु शासन द्वारा निर्धारित व्यवस्थाओं और प्रोटोकॉल नियमों का कलेक्टर द्वारा उल्लंघन करने और सौजन्यहीनता प्रदर्शित करने की मैं निन्दा करता हूँ। यह भारतीय प्रशासनिक सेवा (2009 बैच) के अधिकारी द्वारा की गई एक गंभीर अनुशासनहीनता है जिसके लिये अखिल भारतीय आचरण नियम 1968 के अंतर्गत उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जानी चाहिये। कृपया कलेक्टर सीहोर के विरुद्ध प्रोटोकॉल उल्लंघन करने पर अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाये तथा शासन स्तर से की गई कार्यवाही से मुझे भी अवगत कराने का कष्ट करें।'

क्या है प्रोटोकॉल ?

मध्यप्रदेश शासन, सामान्य प्रशासन विभाग के आदेश कमांक एफ.ए.3-5/44/एक(1) दिनांक 21.03.1994 द्वारा मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्रियों को कैबिनेट मंत्री के समकक्ष मानते हुये स्पष्ट निर्देश दिये गये है कि पूर्व मुख्यमंत्रियों द्वारा जिलों के भ्रमण के दौरान उनके लिये कैबिनेट मंत्री के अनुरूप शिष्टाचार की व्यवस्था की जायेगी। समस्त कमिश्नर और कलेक्टर को सामान्य प्रशासन विभाग के परिपत्र दिनांक 09.11.1994 द्वारा निर्देशित है कि प्रदेश के पूर्व राज्यपाल, माननीय उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधिपति एवं प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा जो भी प्रदेश में यात्रा की जाए तो संबन्धित स्थानों पर उनके प्रति उचित सौजन्यता प्रदर्शित की जाए मध्यप्रदेश शासन, सामान्य प्रशासन विभाग के आदेश कमांक एफ-13/243/2010/1 / 4 दिनांक 16.03.2011 "विषय- प्रदेश में सत्कार व्यवस्था का सुदृढ़ीकरण" के पैरा नम्बर 5 में स्पष्ट उल्लेख किया गया है उच्च सुरक्षा प्राप्त महानुभाव के भ्रमण पर उनकी अगवानी, विदाई, भोजन, परिवहन, आवास, सुरक्षा आदि हेतु व्यवस्था कलेक्टर/जिला प्रोटोकॉल अधिकारी द्वारा की जायेगी।