गावो विश्वस्य मातर

गौ माता विश्व की मां हैं.. जिनकी सेवा करने के लिए अखिल ब्रह्माण्ड नायक एक अखण्ड अनंत परमात्मा भी मचल जाते हैं

Updated: Nov 21, 2020, 11:41 PM IST

गावो विश्वस्य मातर

गावो विश्वस्य मातर
 हमारे वेद शास्त्र कहते हैं कि गाय विश्व की मां हैं। अपने शिशु के प्रति जितना वात्सल्य गाय में होता है, उतना और किसी भी प्राणी में नहीं होता। यद्यपि सृष्टि की सम्पूर्ण माताओं का अपनी संतान के प्रति वात्सल्य होता ही है।किन्तु गाय का वात्सल्य तो अपने शिशु के साथ-साथ सभी प्राणियों के प्रति होता है। क्यूंकि दुग्धपान कराने के समय वह किसी के भी प्रति किसी भी प्रकार का भेद भाव नहीं रखती है। किसी भी वर्ण का, किसी भी आश्रम का, किसी सम्प्रदाय का, किसी भी योनि का प्राणी क्यूं न हो गो माता समान रूप से सभी को अपना दूध पिला कर सभी का भरण पोषण करती हैं। इसलिए वह विश्व की मां हैं। जिनकी सेवा करने के लिए अखिल ब्रह्माण्ड नायक एक अखण्ड अनंत परमात्मा भी मचल जाते हैं और इस धरा धाम पर अवतार लेकर निरावरण चरण से वन-वन में गोचारण करते हैं।आज गोपाष्टमी है।आज ही के दिन भगवान मदन मोहन श्यामसुन्दर सर्व प्रथम गोचारण के लिए वन में गए थे।नन्हे से कन्हैया गोचारण के लिए मचल गये।नन्दरानी श्री व्रजेश्वरी ने उन्हें रोकने का हर संभव प्रयास किया किन्तु जिनके संकल्पानुसार सृष्टि स्थिति और संहार यथा समय होता है। उन्होंने यदि संकल्प कर लिया कि मुझे आज से ही गोचारण प्रारंभ कर देना है तो भला उनके संकल्प में व्यवधान कौन उत्पन्न कर सकता है। अतः उनके संकल्पनानुसार कार्तिक शुक्ल अष्टमी का मुहूर्त भी निकल गया। और जब श्री कृष्ण गाय चराने के लिए वन की ओर जाने को तैयार हुए तो नेत्रों से अश्रु धारा बहाती हुई माता यशोदा अपने कर कमलों में छोटी-छोटी पनहीं लेकर आईं और अपने लाला के कोमल श्री चरणों में धारण कराने लगीं। तो नन्हें से श्याम सुन्दर बोल पड़े कि मैया! यदि आप मेरे चरणों में पनहीं पहनाना चाहती हैं तो आपको नौ लाख पनहीं और बनवाना पड़ेगा। और हमारी सभी गौ माताओं को भी आप पनहीं पहनाएं। अन्यथा मैं भी उनकी ही तरह निरावरण चरणों से ही जंगल में जाऊंगा। अपने लाड़ले के दृढ़ संकल्प को देखकर माता विवश हो गईं, और श्याम सुन्दर के हाथों को बलराम जी के हाथों में पकड़ाती हुई व्रजेन्द्र गेहिनी बोलीं-
*श्रृणु बल मम वाक्यं* *बालकानां बली त्वं*,
*गिरिजलवनमध्ये*
*कृष्ण रक्ष मदीयम्*।
*इति बलकरयुग्मे*
*कृष्णपाणीं निधाय*, *स्रवति नयनधारा नन्दभार्याः प्रपात*।।
श्लोकार्थ- बलराम! बालकों में तू सबसे अधिक बलवान है
इसलिए जंगल और पहाड़ के मध्य किसी भी प्रकार का संकट आए तो तू ही कृष्ण की रक्षा करना। ऐसा कहती हुई माता यशोदा नेत्रों से अश्रु बहाती हुई श्री कृष्ण के हस्तारविंद को श्री बलराम जी के हाथों में पकड़ाती हैं।जिन गौ माता की सेवा करने के लिए भगवान भी गोपाल बन गए। वर्तमान समय में उनके ऊपर आए हुए संकट से प्रत्येक सनातनी हिन्दू का हृदय विदीर्ण हो जाता है। भारत जैसे धर्म प्रधान देश में गोहत्या धड़ल्ले से हो रही है। और इस समय सड़कों पर रात्रि के समय गउ माताएं बैठी  रहती हैं जिस कारण लगभग प्रति दिन अनेक गायों का एक्सीडेंट होता रहता है जिसके कारण उनकी मृत्यु हो जाती है। ऐसे अनेक विन्दु हैं जिनको लेकर हमारे परम पूज्य गुरुदेव भगवान श्री शंकराचार्य जी महाराज गोरक्षा के आंदोलन किए और तीन-तीन बार कारागार की यातनाएं सहे। धर्म सम्राट पूज्य पाद स्वामी श्री करपात्री जी महाराज भी गोरक्षा के लिए अनेक आंदोलन किए और जेल की यातनाएं भी सहे। जब तक इन महापुरुषों के संकल्प को पूर्ण करते हुए समाज का प्रत्येक व्यक्ति वेद शास्त्रानुमोदित मार्ग का अनुसरण नहीं करेगा तब-तक हम गोपाष्टमी के अर्थ को सही रूप में नहीं समझ पायेंगे।वर्ष में एक दिन हम गाय की पूजा करें और वर्ष भर उनकी खबर भी न लें तो यह गोपाष्टमी नहीं है।आज से लगभग बीस-पच्चीस वर्ष पूर्व अविभाजित मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुखिया माननीय श्री दिग्विजय सिंह जी ने इस दिशा में अत्यंत सराहनीय कार्य किया था।गोसेवा आयोग बनाकर प्रदेश में गोहत्या बंद का कानून भी बना दिया। और मध्य प्रदेश में गो हत्या बंद करा दिए। हम सब संकल्प लें कि कम से कम एक गाय की रक्षा हम अवश्य करेंगे। तब सही मायने में हमारी गोपाष्टमी हो जायेगी। इसके साथ ही गोपाष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं।