BCCI : सौरव गांगुली और जय शाह पर फैसला टला

Supreme Court: भारतीय क्रिकेट कण्ट्रोल बोर्ड ने नियमों में बदलाव कर गांगुली और जय शाह का कार्यकाल बढ़ाना चाहता है, सुप्रीम कोर्ट में दायर की याचिका

Publish: Jul 23, 2020 02:45 AM IST

BCCI : सौरव गांगुली और जय शाह पर फैसला टला
photo courtesy : THEWEEK.IN

नई दिल्ली। बीसीसीआई अध्यक्ष सौरव गांगुली और सचिव जय शाह अपने पदों पर बने रहेंगे या नहीं, सुप्रीम कोर्ट इस पर फैसला अब दो हफ्ते बाद करेगी।भारतीय क्रिकेट कण्ट्रोल बोर्ड ने अपने नियमों में संशोधन कर गांगुली और जय शाह के कार्यकाल बढ़ाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। जिसे आज चीफ जस्टिस एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली दो जजों की बेंच ने दो हफ़्तों के लिए टाल दिया। पिछले साल अक्टूबर में नियुक्त हुए गांगुली का कार्यकाल इसी महीने खत्म हो रहा है तो वहीं जय शाह का कार्यकाल पिछले महीने ही ख़त्म हो चुका है।

बीसीसीआई ने नियमों में क्या संशोधन किया है ?
बीसीसीआई के वर्तमान नियमों के मुताबिक़ अगर कोई भी व्यक्ति राज्य क्रिकेट संघ या बीसीसीआई के किसी भी पद पर लगातार 6 साल तक बना रहता है तो उसे तीन साल के लिए कूलिंग ऑफ़ पीरियड पर जाना होगा। इसका मतलब वह व्यक्ति अगले तीन साल तक उस पद पर नहीं बना रह सकता। सौरव गांगुली पांच साल तीन महीने तक बंगाल क्रिकेट संघ के अध्यक्ष रह चुके हैं तो वहीं जय शाह भी इससे पहले गुजरात क्रिकेट संघ के सचिव पद पर रह चुके हैं। भारतीय क्रिकेट बोर्ड के दोनों ही पदाधिकारी लगातार 6 वर्षों तक किसी न किसी पद पर रह चुके हैं। ऐसे में उनके कार्यकाल में छूट प्रदान करने के लिए बीसीसीआई ने सुप्रीम कोर्ट में अपने संशोधन को स्वीकृति प्रदान करने के लिए कोर्ट में याचिका दायर की है।

ज्ञात हो कि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित प्रशासकों की समिति (CoA) ने भारतीय क्रिकेट बोर्ड में फैली अनियमितताओं को दूर करने के लिए एक नियम बनाया था, जिसके तहत कोई भी व्यक्ति राज्य क्रिकेट संघ या बीसीसीआई में लगातार 6 साल किसी भी पद पर बना रहता है, तो उसे 3 साल के कूलिंग ऑफ पीरियड में जाना होगा। यह नियम क्रिकेट में पारदर्शिता बनाने और वित्तीय अनिमियतता को रोकने के लिए बनाया गया था। लेकिन बीसीसीआई ने अपने  नियम में संसोधन कर शीर्ष अदालत से मांग की है कि कूलिंग ऑफ़ पीरियड के नियमों के अंतर्गत पदाधिकारी के केवल बीसीसीआई का कार्यकाल ही माना जाए।