Chhattisgarh: राखी पर गोधन न्याय योजना से रौनक

महिला स्वसहायता समूहों की पहल पर बनाई जा रही है गाय के गोबर से जीवाणुनाशक राखियां, महिलाओं को मिला रोजगार

Updated: Jul-28, 2020, 07:25 PM IST

Chhattisgarh: राखी पर गोधन न्याय योजना से रौनक

छत्तीसगढ़ सरकार ने हाल ही में गोधन न्याय योजना शुरू की है जिसका असर राखी पर भी दिखाई दे रहा है। गोबर के महत्व को ध्यान में रखते हुए गोबर से राखी बनाई जा रही है। प्रदेश के अंबिकापुर,रायपुर और सरगुजा जिले की महिलाएं अनोखी राखी बनाने में जुटी हैं।

महिला स्वसहायता समूहों की पहल पर गाय के गोबर से जीवाणु नाशक राखी बनाई जा रही हैं। गोबर की राखियों की कीमत बेहद कम रखी गई है। राज्य सरकार  के दो रुपए किलो के भाव से गोबर खरीदने की अनोखी पहल के बाद पूरे देश में छत्तीसगढ़ राज्य की चर्चा हो रही है। स्व सहायता समूह की महिलाएं अब गोबर और बांस से राखियां तैयार करने में जुटी हैं।  

पर्यावरण का संरक्षण के साथ स्वदेशी का संदेश

रायपुर में राखी बनाने वाली मंजू बैरागी का कहना है कि कोरोना संक्रमण के कारण गोबर से राखी बनाने का काम शुरू किया गया है। इससे पर्यावरण को कोई नुकसान भी नहीं है। गोबर से बने ये उत्पाद पर्यावरण संरक्षण में सहायक होते हैं। इससे उन्हे रोजगार भी मिल रहा है और वे आत्मनिर्भर भी बन रही हैं। राखी बनाने के लिए गोबर को सुखाकर पाउडर बनाया जाता है । उसमें पांच तत्व मिलाकर पंचगव्य राखी तैयार करवा रहे हैं। इससे आठ से 10 लोगों को रोजगार मिल रहा है।

साढ़े 5 हजार से ज्यादा राखियां बनकर तैयार

वहीं सरगुजा के लुंड्रा विकासखंड के मॉडल गौठान पुरकेला और लमगांव में जागृति, बेंदो, लक्ष्मी और उजाला स्वसहायता समूहों की महिलाओं ने घर में उपलब्ध धान, चावल और बांस से गोबर की राखियों को सजाया है। महिला समूह अब तक 5,500 राखियां तैयार कर चुकी हैं। महिला समूहों की बनाई राखियों में से करीब 1,500 राखियां बिक भी चुकी हैं। मांग के अनुसार रक्षाबंधन तक 10 हजार राखियां और बनाई जानी है। गोधन न्याय योजना का तहत काम करने वाले गौठान के गोबर और स्थानीय स्तर पर आसानी से उपलब्ध सामग्रियों से तैयार  राखियों की कीमत 20 से 35 रुपए तक रखी गई है।

महिलाओं को मिला रोजगार का नया अवसर

 बच्चों के लिए कार्टून वाली राखियां भी तैयार की जा रही हैं। सरगुजा में स्वसहायता समूह की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की कोशिश लगातार जारी है। रक्षाबंधन पर लोगों की सुरक्षा को देखते हुए गोबर से राखियां बनाने की शुरुआत हुई है। जिला पंचायत सरगुजा के सीईओ कुलदीप शर्मा का कहना है कि गोबर की राखियों की बिक्री से महिलाओं को आजीविका का नया अवसर मिला है। जिन जैविक चीजों से राखियां बनाई जा रहीं हैं वह आसानी से उपलब्ध हैं।