देपालपुर की दंगल गर्ल हंसा ने लगाई हंगरी तक कि छलांग, भारतीय कुश्ती टीम का करेंगी प्रतिनिधित्व

महिला विश्व कैडेट कुश्ती चैंपियनशिप के लिए चुनी गयीं हंसा, हंगरी के बुडापेस्ट में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी, पिता और दादा भी रह चुके हैं पहलवान

Updated: Jun 22, 2021, 10:59 PM IST

Photo Courtesy: Naidunia
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इंदौर। मध्यप्रदेश की बेटी हंसा राठौर देशभर में प्रदेश का नाम ऊंचा करने के बाद अब विश्वभर में भारत का नाम ऊंचा करने की तैयारियों में जुटी हुई हैं। इंदौर के देपालपुर में रहने वाली हंसा महिला विश्व कैडेट कुश्ती चैंपियनशिप के लिए चुनी गयीं हैं। वे हंगरी के बुडापेस्ट में अगले महीने भारतीय कुश्ती टीम का प्रतिनिधित्व करेंगी। 

हंसा के असल जिंदगी की कहानी पूरी तरह से फिल्मी है। उनके पिता अनिल राठौर और दादा शंकर राठौर भी पहलवान रहे हैं। हंसा के पिता एक सफल पहलवान नहीं बन सके, लेकिन देश के लिए मेडल लाने का जुनून उन्होंने हंसा में भर दिया है और अपनी बेटी में अपने सपने पूरे होते देखना चाहते हैं। ग्रामीण माहौल होने के कारण हंसा पिता ने घर में ही अखाड़ा बनाकर बेटी को दांव पेंच सिखाए। हंसा बचपन से ही मेहनत करती रही है, उसके पिता ही उसे अभ्यास कराते थे। हंसा अपने दादा से भी कुश्ती की बारीकियां सीखती हैं। 

बेटी की सफलता को लेकर पिता ने ऐसी सख्ती बरती है कि नेशनल कुश्ती चैंपियनशिप में हंसा के कांस्य पदक जीतने पर भी उन्होंने साथ में फोटो नहीं खिंचावाई क्योंकि स्वर्ण से कम उन्हें कुछ मंजूर नहीं। दिल्ली में सोमवार को आयोजित राष्ट्रीय चयन ट्रायल्स में हंसा का सामना राष्ट्रीय चैंपियन हरियाणा की ज्योति से था। हंसा इस कुश्ती में दिग्गज पहलवान ज्योति से बड़े अंतर से पिछड़ती हैं, लेकिन ऐन मौके पर बड़ा दाव मारते हुए बाजी पलट देती हैं। हंसा 2-7 अंकों से पीछे थी, लेकिन अंतिम क्षणों में जोरदार दाव लगाते हुए 10-8 से मुकाबला अपने नाम किया। 

 कोरोना ने मां को छिना

पिछले साल दिसंबर में कोरोना वायरस ने 16 वर्षीय हंसा के सर से मां का साया उठ गया। हालांकि, पिता ने उन्हें टूटने नहीं दिया और हंसा प्रैक्टिस करती रहीं। अब हंसा 19 से 25 जुलाई तक बुडापेस्ट (हंगरी) में आयोजित विश्व कैडेट कुश्ती चैंपियनशिप के 57 किग्रा वजन वर्ग में भारत की ओर से चुनौती पेश करेंगी। हंसा की इस सफलता से उनके गांव के पूरे लोग खासे खुश नजर आ रहे हैं।