खाद के बढ़े दामों का कांग्रेस ने किया विरोध, शिवराज सरकार से की आदेश वापस लेने की मांग

मध्य प्रदेश राज्य सहकारी विपणन संघ ने 20 सितंबर को एक आदेश पारित किया है, जिसमें खाद की उपलब्धता में कमी का हवाला देते हुए खाद के दाम बढ़ा दिए गए हैं, कांग्रेस का कहना कि यह कदम पहले से ही आर्थिक तंगहाली झेल रहे किसानों को लिए और हानिकारक सिद्ध होगा

Updated: Sep 22, 2021, 06:16 PM IST

खाद के बढ़े दामों का कांग्रेस ने किया विरोध, शिवराज सरकार से की आदेश वापस लेने की मांग

भोपाल। राज्य में खाद की कमी का हवाला देते हुए खाद के दाम बढ़ाए जाने का कांग्रेस ने पुरज़ोर विरोध किया है। कांग्रेस ने खाद के दाम बढ़ाए जाने के आदेश को निरस्त करने की मांग की है। ताकि किसानों को पुरानी दरों पर ही खाद मिल सके और किसानों की फसल पर बढ़ने वाली लागत पर रोक लगाई जा सके।  

कांग्रेस प्रवक्ता भूपेंद्र गुप्ता ने खाद के दाम बढ़ाए जाने के फैसले का विरोध करते हुए कहा है कि यह फैसला प्रदेश के किसानों के लिए हानिकारिक सिद्ध होगा। कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि एक तरफ किसानों के आर्थिक हालात पहले से ही ठीक नहीं हैं, फसल की लागत लगातार बढ़ रही है। लेकिन किसानों की लागत कम करने के बनिस्बत राज्य सरकार खाद के दाम बढ़ाकर किसानों पर आर्थिक बोझ बढ़ा रही है। भूपेंद्र गुप्ता ने राज्य की शिवराज सरकार की मंशा पर सवाल खड़ा करते हुए कहा है कि आखिर यह राज्य सरकार कि कैसी किसान हितैषी नीति है?

मध्य प्रदेश राज्य सहकारी विपणन संघ ने 20 सितंबर को एक आदेश पारित किया है, जिसके तहत रबी सीज़न के लिए रसायनिक उर्वरकों के दाम बढ़ा दिए गए हैं। प्रति बोरी 550 रुपए तक की वृद्धि खाद के दामों में की गई है। एनपीके 12ः32ः36 की प्रति बोरी की कीमत 1700 रुपए कर दी गई है। इससे पहले इसकी प्रति बोरी की कीमत 1185 रुपए थी। इसी तरह, एनपीके 14ः35ः14 की एक बोरी की कीमत 1230 रुपए से बढ़ाकर 1550 रुपए कर दी गई है। जबकि अमोनियम फास्फेट सल्फेट की एक बोरी की कीमत 1050 रुपए से 1225 रुपए कर दी गई है। हालांकि डीएपी के दामों में वृद्धि नहीं की गई है।

 

राज्य सहकारी विपणन संघ ने अपने आदेश में कहा है कि प्रदेश में खाद की उपलब्धता की कमी को देखते हुए उर्वरक समन्वय समिति ने यह निर्णय लिया है। जिसके मुताबिक रबी सीज़न 2021-22 में खाद के बढ़े हुए दाम एक अक्टूबर से प्रभावी हो जाएंगे। यह अगले साल यानी 31 मार्च,2022 तक प्रभावी रहेंगे। इसके लिए राज्य सहकारी विपणन संघ मर्यादित ने सभी ज़िला विपणन अधिकारियों को निर्देशित भी कर दिया है।