अफीम में मार्फिन की मात्रा ने IRS को किया मालामाल, अब फर्जी प्रमाणिकता पर हुई वसूली के पैसे पर मारामारी

एक IRS की गिरफ्तारी पर विधायक यशपाल सिसोदिया ने क्यों लिखी सीबीआई जांच के लिए चिट्ठी, जानकारों ने कहा मामला पैसे के बंदरबांट का, स्थानीय सांसद का नाम भी आया सामने

Updated: Jul 20, 2021, 07:55 PM IST

अफीम में मार्फिन की मात्रा ने IRS को किया मालामाल, अब फर्जी प्रमाणिकता पर हुई वसूली के पैसे पर मारामारी

भोपाल। नीमच की अफीम फैक्ट्री के महाप्रबंधक रहे IRS अधिकारी शशांक यादव की गिरफ्तारी के मामले में नया खुलासा हुआ है। किसान नेताओं का कहना है कि यह मामला सिर्फ सरकारी अफसर तक सीमित नहीं है। बल्कि यह केस अफीम में नियत मात्रा, प्रति हैक्टयर 5.9 किलोग्राम की फर्जी मान्यता के बदले वसूले जानेवाले पैसे के बंदरबांट से जुड़ा है। इस संदर्भ में स्थानीय मंदसौर विधायक यशपाल सिसोदिया ने तो केंद्रीय वित्त मंत्री को चिट्ठी लिख दी है। सिसोदिया ने मांग की है कि इसकी सीबीआई जांच करायी जाए। अनेक स्थानीय जानकार इसे उनकी उपेक्षा का मामला भी बता रहे हैं।

मामला कुछ यूं है कि, आईआरएस शशांक यादव को राजस्थान एंटी करप्शन ब्यूरो ने 16 लाख रुपए की रिश्वत राशि के साथ तीन दिन पहले कोटा में पकड़ा था। मिठाई के डिब्बे में मिले सोलह लाख कैश का हिसाब न देने पर वो गिरफ्तार कर लिए गए। आरोप है कि ये रिश्वत अफीम की खेती करनेवाले किसानों से वसूली गयी थी। तय सरकारी नियम के मुताबिक अफीम की गुणवत्ता 5.9 किलोग्राम मार्फिन प्रति हेक्टेयर होनी चाहिए। तभी उन्हें खेती की इजाज़त है और तभी उन्हें अफीम बेचने के बेहतर पैसे मिलेंगे। कहा गया कि यह रिश्वत राशि इसी गुणवत्ता बढ़ाने के झूठे सर्टिफिकेट देने के नाम पर वसूली गयी थी। 

मंदसौर के एक किसान नेता ने हम समवेत से बातचीत में दावा किया कि, अब तक हजारों किसानों से अफीम में मार्फिन की ज्यादा मात्रा प्रमाणित करने के नाम पर 35 करोड़ से ज्यादा की उगाही की जा चुकी है। अभी यह उगाही 6 हज़ार किसानों से हुई है। लेकिन इलाके के कुल 40,000 हजार किसानों से उगाही में ये रकम साढ़े तीन अरब रूपये तक जाती। उनका कहना है कि अफीम की गुणवत्ता जांच में मार्फिन की मात्रा ज्यादा बताने और इसके आधार पर दस से बारह आरी का पट्टा दिलाने के नाम पर हर किसान से 60 से 80 हजार रुपए तक की राशि वसूली जाती है। 

किसान नेता का आरोप है कि गिरफ्तार अधिकारी शशांक यादव और उनके अधीनस्थ अधिकारी तो इस प्रकरण में शामिल हैं ही लेकिन यह जांच जरूर होनी चाहिए कि पूरा खेल किसकी शहर पर हो रहा है। उनका कहना है कि हर किसान जानता है कि रिश्वत की उगाही का बीस फीसदी हिस्सा कहां जाता है। किसान नेता ने यह भी दावा किया कि अगर इस पूरे मामले का भेद नहीं खुलता तो अब तक 40 हजार से ज्यादा किसानों से तीन अरब से ज्यादा की राशि वसूल कर ली गई होती। 

विधायक और सांसद की रंजिश 

मामला सामने आने के बाद स्थानीय बीजेपी विधायक की सक्रियता ने सबको चौंका दिया है। मंदसौर विधायक ने केंद्र को चिट्ठी लिखकर सीबीआई जांच की मांग की तो अफवाह उड़ चली कि कहीं यह स्थानीय सांसद जी से नाराजगी की वजह से तो नहीं लिखी गई। नाम न बताने की शर्त पर कुछ किसान नेताओं ने कहा कि रिश्वत का मामला स्थानीय सांसद सुधीर गुप्ता से जुड़ा है। विधायक जी उनसे खफा रहते हैं। 

अब जब आरोपी पुलिस की गिरफ्त में है तो मंदसौर के विधायक यशपाल ने सीबीआई जांच की मांग क्यों की? किसानों के बीच यह भी चर्चा का विषय है। यशपाल सिंह सिसोदिया द्वारा जांच की मांग के संबंध में मंदसौर के रहने वाले एक अन्य किसान नेता ने कहा कि यशपाल सिंह सिसोदिया ने भले ही सीबीआई जांच करने को लेकर पत्र लिखा है लेकिन इस मांग के पीछे उनका उद्देश्य बीजेपी सांसद सुधीर गुप्ता का पर्दाफाश करना है। किसान नेता के मुताबिक यशपाल सिंह सिसोदिया सुधीर गुप्ता के धुर विरोधियों में से एक हैं।

क्या है मामला

दरअसल शनिवार को राजस्थान के कोटा में एंटी करप्शन ब्यूरो ने गाजीपुर स्थित अफीम फैक्टरी में पदस्थ भारतीय राजस्व सेवा के अधिकारी शशांक यादव को वाहन में रखे हुए 16 लाख रुपए की नकदी के साथ पकड़ा था। 15 लाख रुपए मिठाई के डब्बे में रखे हुए थे। ये मिठाई के डब्बे मध्य प्रदेश के नीमच स्थित एक मिष्ठान भंडार के थे। इसके अलावा एक लाख से ज्यादा रुपए लैपटॉप के बैग और पर्स से मिले। नकदी के बारे में पूछताछ करने पर शशांक यादव संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए, जिसके बाद उन्हें हिरासत में ले लिया गया। शशांक यादव के पास नीमच की अफीम फैक्टरी का भी अतिरिक्त प्रभार था।