जॉर्ज फ्लॉयड हत्या मामले में आरोपी पुलिस अधिकारी डेरेक चौविन को साढ़े 22 साल की सजा

रंगभेद के खिलाफ अमेरिकी कोर्ट का बड़ा फैसला, अश्वेत व्यक्ति जॉर्ज फ्लॉयड के हत्यारे पूर्व पुलिस अधिकारी डेरेक चौविन को 22 साल 6 महीने की जेल की सजा

Updated: Jun 26, 2021, 01:07 PM IST

जॉर्ज फ्लॉयड हत्या मामले में आरोपी पुलिस अधिकारी डेरेक चौविन को साढ़े 22 साल की सजा
Photo Courtesy: Reuters

वॉशिंगटन। रंगभेद के खिलाफ अमेरिकी कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अश्वेत व्यक्ति जॉर्ज फ्लॉयड की हत्या करने वाले मिनियापोलिस के पूर्व पुलिस अधिकारी डेरेक चौविन को 22 साल 6 महीने की जेल की सजा सुनाई गई है। अश्वेत व्यक्ति की हत्या मामले में किसी पुलिस अधिकारी को अमेरिका में दी गई यह अबतक की सबसे बड़ी सजा है। चौविन ने बीते साल 25 मई को जॉर्ज की गर्दन को अपने घुटने से दबा दिया था, जिसके कारण दम घुटकर उसकी मौत हो गई थी। 

इस मामले में फैसला सुनाते वक़्त जस्टिस पीटर काहिल ने राज्य के गाइडलाइंस से ऊपर उठकर ऐसे मामलों के लिए तय 12 साल 6 महीने की सजा से 10 साल ज्‍यादा की सजा सुनाई है। कोर्ट ने चौविन को अपने अधिकार और पद के दुरुपयोग तथा फ्लॉयड के प्रति क्रूरता दिखाने का दोषी पाया। कोर्ट के इस फैसले के बाद जॉर्ज के परिवार के वकील बेन क्रम्प ने कहा है कि उन्हें वास्तविक न्याय तभी मिलेगा जब अमेरिका में अश्वेत लोगों के मन से रंग के आधार पर पुलिस के हाथों मारे जाने का डर खत्म हो जाएगा।

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दरअसल, पिछले साल अमेरिका में एक अश्वेत व्यक्ति के साथ पुलिस द्वारा बर्बरता की एक रूह कांपने वाली तस्वीर सामने आई थी। इस कार्रवाई में जॉर्ज फ्लॉयड की मौत के बाद अमेरिकी समाज में व्याप्त नस्लीय भेदभाव को उजागर किया था। इसमें मिनियापोलिस पुलिस के एक श्‍वेत अधिकारी को अश्वेत जॉर्ज फ्लॉयड को गिरफ्तार कर जमीन पर गिराते और फिर उसकी गर्दन को घुटने से कुछ सेकेंड तक दबाते देखा गया था।  

इस दौरान फ्लॉयड को बार-बार यह कहते सुना गया की वे सांस नहीं ले पा रहे हैं, लेकिन अधिकारी ने इसके बावजूद अपना घुटना फ्लॉयड की गर्दन से नहीं हटाया और फ्लॉयड की मौत हो गई। इस घटना का वीडियो एक 18 वर्षीय छात्र डारनेला फ्रेजियर ने बना लिया था। वीडियो वायरल होने के बाद नस्लीय भेदभाव के खिलाफ अमेरिका ही नहीं, दुनिया के तमाम देशों के लोगों को गुस्से से भर दिया था और लाखों लोग इसके विरोध में सड़कों पर उतर आए थे। यह वीडियो जॉर्ज फ्लॉयड के केस में अहम सबूत भी था। 

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इस वीडियो ने न सिर्फ फ्लॉयड को न्याय दिलवाया, बल्कि पूरे अमेरिका में नस्ली भेदभाव के खिलाफ एक बड़े आंदोलन को जन्म दिया। इतना ही नहीं इस घटना का असर सत्ता परिवर्तन के रूप में अमेरिकी चुनाव पर भी देखने को मिला। वीडियो बनाने वाली किशोरी को इसी महीने पत्रकारिता के क्षेत्र दिए जाने वाले दुनिया के सबसे विशिष्ट अवार्ड पुलित्जर देने का ऐलान किया गया है। पुलित्जर प्राइज बोर्ड ने डारनेला के साहस की तारीफ करते हुए कहा कि उनके द्वारा बनाए गए वीडियो ने सच्चाई एवं न्याय की तलाश में नागरिकों की अहम भूमिका को रेखांकित किया है, जिसकी तलाश पत्रकारों को होती है। इस एक वीडियो ने दुनिया भर में पुलिस वीभत्सता के खिलाफ प्रदर्शनों को बल दिया।