उच्च शिक्षित चपरासियों को मिला उज्जैन विश्वविद्यालय की बेवसाइट सम्हालने की जिम्मा

उज्जैन के विक्रम विश्वविद्यालय के कुलपति का अनोखा प्रयोग, चतुर्थ श्रेणी के 15 प्यून्स को विवि की वेबसाइट मेंटेनेंस समेत कई टैक्निकल कार्यों का दिया जिम्मा, एक महीने की ट्रेनिंग का दे रहे मौका, अक्सर क्रेश होती है विवि वेबसाइट

Publish: Jul 08, 2021, 01:01 PM IST

उच्च शिक्षित चपरासियों को मिला उज्जैन विश्वविद्यालय की बेवसाइट सम्हालने की जिम्मा
Photo Courtesy: Amar ujala

उज्जैन। विक्रम विश्वविद्यालय की बेवसाइट में आई गड़बडियां अक्सर चर्चा में रहती हैं, लेकिन अब इससे निपटने का आसान रास्ता विश्व विद्यालय के कुलपति ने अखिलेश कुमार पांडेय ने निकाल लिया है। उन्होंने बेवसाइट के मेंटेनेंस के लिए 15 लोगों की टीम बनाई है। इस टीम के सदस्यों की चर्चा चारों ओर हो रही है। इस खास टीम में विक्रम यूनिवर्सिटी के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को चुना गया है।

इसमें ऐसे 15 लोगों को सलेक्ट किया गया है उच्च शिक्षित हैं, लेकिन अनुकंपा नियुक्ति और किसी अन्य वजहों से चपरासी का काम करने को मजबूर हैं। ऐसे 15 लोगों की टीम बनाई गई है, जो काफी पढ़े लिखे हैं। लेकिन अनुकंपा नियुक्ति के सरकारी नियमों की वजह से उन्हें क्लास फोर्थ में भर्ती हुए हैं। इनमें से कई इंजीनियर्स भी हैं। यही वजह है कि उन्हें विश्वविद्यालय की ऑफीशियल वेबसाइट की जिम्मेदारी सौंपी जा रही है। यह विश्वविद्यालय और उन कर्मचारियों दोनों के लिए अच्छा होगा। कर्मचारियों की योग्यता और काम करने की क्षमता को देखते हुए स्पेशल 15 की टीम तैयार की गई है।

अब यह टीम 15 लखनऊ जाकर एक क्रैश कोर्स में वेबसाइट मेंटेनेंस की ट्रेनिंग लेगी और फिर विश्वविद्यालय की वेबसाइट से जुड़े कार्य सम्हालेगी। जिससे विश्वविद्यालय में एडमीशन, टाइम टेबल, रिजल्ट जैसे कई महत्वपूर्ण कार्यों के दौरान वेबसाइट क्रेश ना हो, और छात्रों को आसानी से उसका एक्सेस मिले, जानकारियां समय-समय पर अपडेट होती रहें।

उज्जैन विश्वविद्यालय के कुलपति की मानें तो विक्रम विश्वविद्यालय में प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों में से करीब 50 फीसदी से ज्यादा अनुकंपा नियुक्ति दी गई हैं। जिनमें बहुत से उच्च शिक्षत औऱ होनहार युवा प्यून का काम कर रहे हैं। अब उन्हें करियर में आगे बढ़ने का मौका दिया जा रहा है। ताकि वे अपनी काबिलियत सिद्ध कर सकें और विश्वविद्यालय को भी उनकी क्षमताओं का लाभ मिल सके। अब देखना होगा कि यह प्रयास कितना कारगर सिद्ध होता है। इसे लेकर विश्वविद्याल के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों में उत्साह नजर आ रहा है।

कुलपति द्वारा आदेश जारी कर उन लोगों से नाम मांगे गए हैं, जो उच्च शिक्षित हैं  और लखनऊ जाकर साफ्टवेयर और बेवसाइट मेंटेनेंस समेत टेक्निकल ट्रेनिंग करने की इच्छा रखते हैं। अपनी तरक्की और उज्जैन विश्वविद्यालय के लिए कुछ हटकर करना चाहते हैं। इस 15 सदस्यीय टीम को एक महीने की ट्रेनिंग दी जाएगी इसके बाद उज्जैन की विक्रम विश्वविद्यालय की वेबसाइट, रिजल्ट समेत महत्वपूर्ण कार्य सौंपे जाएंगे।