एक बार फिर विवादों में भोपाल का भारत भवन, लेखक पंकज सुबीर ने लगाए पक्षपात का आरोप

लेकर पंकज सुबीर ने कहा कि साल 2003 के बाद से भारत भवन, साहित्य अकादमी जैसी संस्थाएँ बस एक ख़ास विचारधारा के लिए सुरक्षित और संरक्षित हो गई हैं।

Updated: Dec 10, 2022, 06:00 PM IST

एक बार फिर विवादों में भोपाल का भारत भवन, लेखक पंकज सुबीर ने लगाए पक्षपात का आरोप

भोपाल। राजधानी भोपाल में स्थित विविध कला, सांस्कृतिक केंद्र एवं संग्रहालय "भारत भवन" एक बार फिर से विवादों में है। प्रदेश के जाने माने लेखक पंकज सुबीर ने भारत भवन संचालन समिति पर पक्षपात करने के आरोप लगाए हैं। साथ ही कहा कि कि ख़ास विचारधारा के लिए सुरक्षित और संरक्षित हो गई हैं।

लेखक पंकज सुबीर ने भोपाल के साहित्यकारों और साहित्यिक संस्थाओं को संबोधित एक पत्र में आरोप लगाते हुए कहा कि, 'साल 2003 के बाद से भारत भवन, साहित्य अकादमी जैसी संस्थाएँ बस एक ख़ास विचारधारा के लिए सुरक्षित और संरक्षित हो गई हैं। जिस विचारधारा से मेरी असहमति है और आगे भी रहेगी। मेरे जैसे बहुत से मध्यमार्गी हैं, जिनको एक विचारधारा बहुत असानी से दूसरी विचारधारा का और दूसरी विचारधारा वाले पहली विचारधारा का कह कर पल्ला झाड़ लेते हैं। लेकिन इससे हम अपनी भूमिका नहीं बदल सकते, न अपने तेवर।'

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पंकज सुबीर के मुताबिक भारत भवन के प्रबंधक निकाय ने कुछ वर्ष पूर्व यह फैसला लिया है कि बाहर की संस्थाओं को भारत भवन नहीं प्रदान किया जाएगा। यह फ़ैसला भी इसलिए लिया गया है कि भोपाल की अधिकांश संस्थाएँ उस विचारधारा की विरोधी हैं, जिस विचारधारा से मध्य प्रदेश में सरकारी संस्थाओं को चलाया जा रहा है। ऐसे में आयोजनों में विचारधारा का विरोध आ ही जाता है। तो "न रहेगा बाँस न बजेगी विरोध की बाँसुरी" की तर्ज पर बाहरी संस्थाओं पर ही प्रतिबंध लगा दिया गया। 

सुबीर ने आरोप लगाते हुए पूछा कि भारत भवन में 'भोपाल लिटरेचर एंड आर्ट फेस्टिवल' (बी.एल.एफ़.) करने की स्वीकृति एक निजी संस्था "सोसायटी फॉर कलचर एंड एन्वायरमेंट" को किस आधार पर दी गई है। उन्होंने भारत भवन संचालन समिति से इस संबंध में चार सवाल पूछे हैं। उन्होंने पूछा है कि क्या इस स्वीकृति का आधार यह है कि यह संस्था वर्तमान तथा पूर्व आई.ए.एस. अधिकारियों, अन्य अधिकारियों तथा उनके परिजनों के द्वारा चलाई जा रही है? यदि हाँ, तो क्या अन्य साहित्यिक संस्थाओं को भी भारत भवन में कार्यक्रम करने के लिए अपने पदाधिकारियों में पूर्व या वर्तमान आई.ए.एस. अधिकारी, अन्य अधिकारियों या उनके परिजनों को शामिल करना होगा?

पंकज सुबीर ने अपने दुसरे सवाल में पूछा कि क्या इस स्वीकृति का आधार यह है कि मध्य प्रदेश संस्कृति विभाग इस कार्यक्रम में सहयोगी रहता है? (जैसा कि मेरे पिछले बार के विरोध के बाद आयोजक संस्था ने तत्काल एक पत्रकार वार्ता कर के पत्रकारों को जानकारी प्रदान करते हुए बताया था।) यदि हाँ, तो मध्यप्रदेश संस्कृति विभाग तो भोपाल में अन्य साहित्यिक संस्थाओं के आयोजनों में सहभागी रहता है, जैसा उनके आयोजनों के बैनर, पोस्टर से पता चलता है, तो उनको भारत भवन के उपयोगी की अनुमति क्यों नहीं है। जबकि इन संस्थाओं के आयोजन पूर्व में भारत भवन में होते रहे हैं। एक ही नियम अलग-अलग संस्थाओं के लिए अलग-अलग तरीक़े से लागू होने का कारण क्या है?

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तीसरे सवाल में पंकज सुबीर पूछते हैं कि भारत भवन एक साहित्यिक, सांस्कृतिक परिसर है, जहाँ किसी भी प्रकार के भोजन कार्य, भोजन बनाना तथा खिलाना (कार्यक्रम से पूर्व या पश्चात् दिए जाने वाले चाय, कॉफ़ी, बिस्किट जैसे अल्पाहार जो परिसर में ही स्थित जलपान गृह से बना कर लाए जाएँगे तथा यहाँ केवल परसे जाएँगे, को छोड़कर) की अनुमति नहीं है, क्या यह बात सत्य है? यदि हाँ, तो "सोसायटी फॉर कलचर एंड एन्वायरमेंट" को भारत भवन परिसर में तीन दिनों तक परिसर में पांडाल लगा कर शादियों की तरह भोजन व्यवस्था की स्वीकृति किस आधार पर प्रदान की गई है? 

आखिरी सवाल में पंकज सुबीर ने पूछा कि इस संस्था द्वारा दिए गए कार्यक्रमों की सूची में लगभग सारे कार्यक्रम अंग्रेज़ी भाषा के ही हैं, तो क्या यह स्वीकृति इस आधार पर दी गई है कि अंग्रेज़ी में होने वाले कार्यक्रम प्रबंधक निकाय द्वारा लिए गए उस निर्णय से बाहर रहते हैं, केवल हिन्दी के आयोजन की प्रतिबंध के दायरे में आते हैं? यदि हाँ, तो क्या भोपाल की हिन्दी साहित्य संस्थाएँ भी अपने आयोजन अंग्रेज़ी में करना प्रारंभ कर दें, तो उनको भी भारत भवन के उपयोग की स्वीकृति प्रदान कर दी जाएगी?