85 लाख रुपए गबन मामले में खुली भोपाल महापौर की फाइल, कांग्रेस बोली- भ्रष्टाचार का ओलंपिक चल रहा है

15 साल पहले एमपी नगर में सीमेंट-कंक्रीट सड़कों के निर्माण में भाजपा के 39 तत्कालीन पार्षदों को कॉन्ट्रैक्टर को 85 लाख रुपए का अधिक भुगतान करने के मामले में दोषी पाया गया था

Updated: Aug 10, 2022, 12:10 PM IST

85 लाख रुपए गबन मामले में खुली भोपाल महापौर की फाइल, कांग्रेस बोली- भ्रष्टाचार का ओलंपिक चल रहा है

भोपाल। राजधानी भोपाल नगर निगम की नवनिर्वाचित महापौर मालती राय के खिलाफ भ्रष्टाचार की फाइल खुल गई है। लोकायुक्त ने 85 लाख के गबन मामले में जांच शुरू कर दी है। बीजेपी के 39 तत्कालीन पार्षदों को भी भ्रष्टाचार के इस केस में दोषी बनाया गया है। विपक्षी दल कांग्रेस ने इस मुद्दे पर तंज कसते हुए कहा कि भाजपा में भ्रष्टाचार का ओलंपिक चल रहा है।

मध्य प्रदेश कांग्रेस ने ट्वीट किया, 'भोपाल महापौर के घोटालों का खेल। भोपाल की नई महापौर मालती राय एवं अन्य 39 बीजेपी पार्षदों के 85 लाख के भ्रष्टाचार की जाँच लोकायुक्त संगठन करेगा। शिवराज जी,
बीजेपी में भ्रष्टाचार का ओलंपिक चल रहा है ?
B - भ्रष्टाचार की, J - जन्मदाता P - पार्टी  

महापौर मालती समवेत अन्य लोगों के लोकायुक्त का नोटिस आया है और उनसे जवाब तलब किया गया है। बताया जा रहा है कि यह नोटिस उन्हें 7 अगस्त यानी शपथग्रहण के अगले ही दिन मिली। यानी नगर निगम से भ्रष्टाचार समाप्त करने के वादे के साथ महापौर बनीं मालती राय के शपथ लेते ही उनके खिलाफ लोकायुक्त जांच की फाइल खुल गई। नर्मदापुरम संभागायुक्त माल सिंह ने इस मामले में सुनवाई के नोटिस जारी की है।

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बता दें कि तत्कालीन लोकायुक्त रिपुसूदन दयाल ने इन पार्षदों को अयोग्य घोषित करने और 85 लाख रुपए की वसूली करने की सिफारिश के साथ यह केस संभागायुक्त को भेजा था। दरअसल, 2005 में एमपी नगर जोन-2 में 5 करोड़ 45 लाख 70 हजार रुपए की लागत से सीसी रोड का निर्माण होना था। एक कम्पनी ने एसओआर से 7.2 फीसदी कम रेट पर ऑफर दिया। तब टेंडर रद्द कर दिया गया।

बाद में उसी कंपनी ने एसओआर से 8.38 प्रतिशत अधिक का ऑफर दिया। उसे परिषद की 10 मई 2005 की बैठक में मंजूरी दे दी गई। इस वजह से नगर निगम को 85 लाख रुपए अधिक भुगतान करना पड़ा। कांग्रेस विधायक आरिफ अकील की शिकायत पर लोकायुक्त ने जांच की, पार्षदों का पक्ष भी सुना गया। मार्च 2007 में उन्होंने अपनी रिपोर्ट संभागायुक्त को भेज दी थी।