प्रज्ञा ठाकुर पीछे कुर्सी मिलने पर भड़कीं, मुख्यमंत्री के आने से पहले कार्यक्रम छोड़कर गईं

पुराने भोपाल में नए बने बीजेपी कार्यालय के उद्घाटन समारोह में नेताओं के लिए बना था मंच, पहली क़तार में जगह नहीं मिलने पर ख़फ़ा हुईं सांसद प्रज्ञा ठाकुर

Updated: Dec 26, 2020, 08:51 PM IST

प्रज्ञा ठाकुर पीछे कुर्सी मिलने पर भड़कीं, मुख्यमंत्री के आने से पहले कार्यक्रम छोड़कर गईं
Photo Courtesy : The Economic Times

भोपाल। भोपाल की बीजेपी सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर बीजेपी के एक कार्यक्रम में पहली कतार में कुर्सी नहीं मिलने पर आगबबूला हो गईं। उन्हें इतना गुस्सा आया कि पीछे बैठने से साफ इनकार करते हुए स्थानीय नेताओं पर चिल्लाने लगीं। इस दौरान उन्हें मनाने की काफी कोशिशें की गईं, लेकिन वह नहीं मानी। आखिरकार गुस्से में भरी प्रज्ञा ठाकुर मुख्यमंत्री शिवराज चौहान के आने से पहले ही वहां से वापस लौट गयीं।

दरअसल, शुक्रवार को पूर्व पीएम दिवंगत अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती के मौके पर पुराने भोपाल में बने नए बीजेपी कार्यालय का उद्घाटन समारोह रखा गया था। इस कार्यक्रम में करीब पांच हजार लोगों को बुलाया गया था वहीं नेताओं को बैठने के लिए एक विशाल मंच भी बनाया गया था। इस कार्यक्रम में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा, सीएम शिवराज सिंह चौहान, विधानसभा के प्रोटेम स्पीकर रामेश्वर शर्मा, कैबिनेट मंत्री विश्वास सारंग समेत बीजेपी के कई गणमान्य नेताओं को आमंत्रित किया गया था।

जानकारी के मुताबिक कार्यक्रम में तय समय पर सबसे पहले सांसद प्रज्ञा ठाकुर पहुंच गई। उनके बैठने के लिए मंच पर पिछली कतार में कुर्सी लगाई गई थी। ये पता चलते ही सांसद ने आपा खो दिया और आयोजकों और स्थानीय कार्यकर्ताओं को भला बुरा बोलने लगीं। इस दौरान बीजेपी के पदाधिकारियों ने उन्हें मनाने की काफी कोशिशें की लेकिन वह नहीं मानी। थोड़ी ही देर में उनका गुस्सा इतना बढ़ा कि उन्होंने आव देखा न ताव, सीएम शिवराज के आने से पहले ही कार्यक्रम को छोड़कर चली गईं।

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पार्टी का कार्यक्रम छोड़कर जाते वक्त प्रज्ञा ठाकुर ने वहां मौजूद मीडियाकर्मियों से तो कुछ नहीं कहा, लेकिन थोड़ी देर बाद एक अन्य कार्यक्रम में उन्होंने अपनी नाराजगी जाहिर कर दी। भोपाल के मानस भवन के प्रवचन कार्यक्रम में पहुंचीं प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने कहा कि 'अधूरी बात करना व्यक्तित्व का अधूरापन है। इससे ज्यादा मुझे कहने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि जो समझ गए वह ठीक और जो इसे ना समझे वो अनाड़ी हैं। कुर्सी की खींचतान में आज हम भी फंस गए, अभी तक नहीं फंसे थे।'

प्रज्ञा ठाकुर ने कहा, 'चुनाव लड़ लिया, लेकिन वह कुर्सी की खींचतान नहीं थी। वह तो युद्ध था, क्योंकि हम तो कहीं भी रह सकते हैं। जंगल में भी रह सकते हैं। लेकिन जिस बात की लड़ाई लड़कर प्रभु ने मुझे जिस स्थान पर भेजा, वहां उसकी मर्यादा नहीं रख पाए तो मुझे लगता है कि वह स्थान छोड़ देना चाहिए।'