85 लाख लोगों को नहीं लगी है वैक्सीन की पहली डोज, ढूंढ ढूंढकर लगवाना होगा टीका: CM

सीएम ने ग्राम, जिला और विकासखंड स्तर के क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप्स को किया संबोधित, 27 सितंबर तक प्रदेश के हर व्यक्ति का टीकाकरण सुनिश्चित करने का दिया लक्ष्य

Publish: Sep 24, 2021, 12:01 PM IST

85 लाख लोगों को नहीं लगी है वैक्सीन की पहली डोज, ढूंढ ढूंढकर लगवाना होगा टीका: CM

भोपाल। शिवराज सरकार के एक के बाद एक वैक्सीनेशन ड्राइव के दावों के बावजूद प्रदेश में अब तक 85 लाख से ज्यादा ऐसे लोग बचे हुए हैं, जिन्हें वैकसीन की पहली डोज नहीं लग पाई है। इस स्थिति से अवगत खुद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि 27 सितंबर तक टीका के लिए एलिजिबल प्रदेश के हर व्यक्ति को वैक्सीन की पहली डोज लग जानी चाहिए। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सीएम ने शुक्रवार को ग्राम, विकासखंड और जिला स्तरीय क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप की बैठक ली। 

सीएम शिवराज ने क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप्स को संबोधित करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश में 85 लाख लोग वैक्सीन की प्रथम डोज नहीं लगवा सके हैं। 27 सितंबर तक हमें इन सभी लोगों को ढूंढ-ढूंढकर टीका लगवाना है।सोशल मीडिया के माध्यम से आप सभी वैक्सीनेशन के लिए अपील करें। 

हालांकि सीएम ने यह भी कहा कि प्रदेश में हम 83 प्रतिशत लोगों का टीकाकरण करवाकर कोरोना की रोकथाम में तेजी से आगे बढ़े हैं। यह आप सबकी सहभागिता और प्रयासों के कारण ही संभव हुआ है। 27 सितंबर तक प्रथम डोज़ सबको लग जाना चाहिये।

सीएम ने इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए समाज के सभी वर्गों से टीका लगवाने के लिए लोगों को प्रेरित करने का आग्रह किया। सीएम ने कहा कि 27 सितंबर तक सभी लोगों को वैक्सीन का प्रथम डोज़ लगवाना है। हमारे स्वास्थ्य स्वयंसेवक, दीनदयाल समिति के सदस्य, धर्मगुरु और अन्य प्रमुख नागरिकों से अपील करता हूँ कि लोगों को प्रेरित करें।

मुख्यमंत्री ने क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप्स को सुझाव देते हुए कहा कि ग्रामों और वार्डों में जो लोग बचे हुए, उनकी सूची बनाइये। घर-घर-संपर्क करके उन्हें वैक्सीन लगवाने के लिए प्रेरित कीजिये। मुख्यमंत्री ने कहा कि 27 सितंबर को होने वाले वैक्सीनेशन के इस चौथे महाभियान को हम सभी को मिलकर अब तक का सबसे बड़ा अभियान बनाना है। सीएम ने कहा कि हमें ऐसा माहौल बनाना है कि जो व्यक्ति वैक्सीन न लगवाए वह अपराधबोध से ग्रसित हो जाए और उसे टीका लगवाने पर मजबूर होना पड़े।