कूनो में फिर गूंजी किलकारियां, मादा चीता गामिनी ने दिया 3 शावकों को जन्म, चीतों की संख्या 38 हुई
राष्ट्रीय उद्यान में मादा चीता गामिनी ने तीन शावकों को जन्म दिया है। यह भारत में चीतों का नौवां सफल प्रसव है। अब देश में चीतों की कुल संख्या 38 और भारत में जन्मे जीवित शावकों की संख्या 27 हो गई है।
श्योपुर। मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क से वन्यजीव संरक्षण की एक बड़ी सामने आई है। दक्षिण अफ्रीका से लाई गई मादा चीता गामिनी ने 18 फरवरी को तीन शावकों को जन्म दिया है। इसी के साथ भारत में चीतों की कुल संख्या बढ़कर 38 हो गई है। जबकि, देश में जन्मे जीवित शावकों की संख्या अब 27 पहुंच गई है। यह भारतीय धरती पर चीतों के नौवें सफल प्रसव के रूप में दर्ज हुआ है और प्रोजेक्ट चीता के लिए एक अहम उपलब्धि मानी जा रही है।
यह जन्म ऐसे समय हुआ है जब दक्षिण अफ्रीका से चीतों के भारत आगमन के तीन साल पूरे हो रहे हैं। ऐसे में इसे संरक्षण अभियान के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, लगातार हो रहे सफल प्रजनन से यह स्पष्ट हो रहा है कि चीते भारतीय पर्यावरण और जंगलों के अनुकूल होते जा रहे हैं।
विशेषज्ञों ने परियोजना की शुरुआत में अनुमान लगाया था कि यदि लाए गए चीतों में से एक तिहाई भी सुरक्षित रह पाते हैं तो इसे सफलता माना जाएगा। हालांकि, करीब साढ़े तीन सालों बाद सामने आए आंकड़े उम्मीद से बेहतर साबित हुए हैं। प्रोजेक्ट के दूसरे चरण में दक्षिण अफ्रीका से लाए गए 12 चीतों में से केवल चार की ही मृत्यु हुई है। पांच मादा चीतों में से सिर्फ एक की मौत हुई जबकि गामिनी, वीरा और निर्वा ने सफलतापूर्वक शावकों को जन्म देकर प्रजनन की स्थिरता साबित की है।
गामिनी इससे पहले 10 मार्च 2024 को छह शावकों को जन्म देकर रिकॉर्ड बना चुकी है। वह दक्षिण अफ्रीकी चीतों से भारत में हुआ सबसे बड़ा प्रजनन था। इसके बाद 22 नवंबर 2024 को मादा चीता निर्वा ने दो शावकों को जन्म दिया और 4 फरवरी 2025 को मादा वीरा ने भी दो शावकों को जन्म देकर परियोजना को आगे बढ़ाया। अब गामिनी के दूसरे प्रसव ने इस सिलसिले को और मजबूत कर दिया है।
वर्तमान में दक्षिण अफ्रीका से लाए गए नर चीतों में प्रभाष, पावक, वायु और अग्नि शामिल हैं। जबकि, मादा चीतों में गामिनी, निर्वा, वीरा और धीरा मौजूद हैं। उदय, तेजस, सूरज और दक्षा नामक चार चीतों की अब तक मृत्यु हो चुकी है। प्रभाष, पावक और मादा चीता धीरा को मंदसौर स्थित गांधीसागर अभयारण्य में बसाया गया है जहां से भी जल्द प्रजनन की उम्मीद जताई जा रही है।
प्रोजेक्ट चीता के डायरेक्टर उत्तम कुमार शर्मा ने बताया कि शुरुआती चुनौतियों से भारत ने महत्वपूर्ण सीख हासिल की है और अब प्रजनन के परिणाम यह संकेत दे रहे हैं कि चीते यहां के पारिस्थितिक तंत्र में खुद को ढाल रहे हैं। उन्होंने जानकारी दी कि परियोजना के तीसरे चरण के तहत 28 फरवरी को बोत्सवाना से आठ और चीते भारत लाए जाएंगे जिससे इस संरक्षण अभियान को नई मजबूती मिलेगी।
कूनो के डीएफओ आर. थिरूकुरल के अनुसार, अब चीते कूनो के जंगल का स्वाभाविक हिस्सा बनते जा रहे हैं। उनकी गतिविधियां अधिक प्राकृतिक हो रही हैं और प्रबंधन का ध्यान अब दीर्घकालिक स्थिरता, सुरक्षा व्यवस्था और मानव-वन्यजीव संतुलन बनाए रखने पर केंद्रित है।




