कांग्रेस का शिवराज के अफसर पर पलटवार कहा, शिवराज के ओएसडी नीरज वशिष्ठ पर भी दर्ज हो मामला

पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कहा, अगर कमलनाथ के अधिकारी दोषी हैं, तो शिवराज के ओएसडी के नाम भी दर्ज हो मामला, 2013 के आयकर छापों में नीरज वशिष्ठ पर शिवराज के लिए पैसे लेने का आरोप

Updated: Dec 20, 2020, 04:09 AM IST

कांग्रेस का शिवराज के अफसर पर पलटवार कहा, शिवराज के ओएसडी नीरज वशिष्ठ पर भी दर्ज हो मामला
Photo: Humsamvet

भोपाल। मध्य प्रदेश की राजनीति में तब के अफसर बनाम अब के अफसर पर दोष मढ़ने और केस लगाने का शोर है। बीते कुछ दिनों से शिवराज सरकार की तरफ से दिए जा रहे संकेत और चुनाव आयोग के कमलनाथ के करीबी अधिकारियों के खिलाफ शिकायत दर्ज करने की पहल ने सियासी हलकों में तूफान खड़ा कर दिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने भोपाल में प्रेस को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के ओएसडी नीरज वशिष्ठ पर भी आफआईआर दर्ज करने की मांग की है। दिग्विजय सिंह का आरोप है कि नीरज वशिष्ठ वही शख्स हैं, जिनका नाम साल 2013 के आयकर छापों में डायरी और कंप्यूटर में लिखा पाया गया था।

दिग्विजय सिंह ने शनिवार को भोपाल स्थित कांग्रेस मुख्यालय में मीडिया को संबोधित करते हुए कहा, 'वर्ष 2013 में पड़े आयकर छापों में कुछ लोगों से जो दस्तावेज जब्त किये गये थे, उनमें नरेन्द्र मोदी और शिवराज सिंह चौहान को करोड़ों रुपये दिए जाने का साफ-साफ उल्लेख है। उस वक़्त यह पैसे गुजरात ट्रांसफर किए गए थे। उसमें सीएम शिवराज के वर्तमान ओएसडी नीरज वशिष्ठ के नाम का भी उल्लेख है। ऐसे में यदि किसी व्यक्ति पर केवल इसलिए एफआईआर दर्ज की जा रही है कि किसी अन्य के यहां मिले दस्तावेज में उसके नाम से पैसे दिये जाने का उल्लेख है, तो नरेन्द्र मोदी और शिवराज सिंह तथा उनके ओएसडी नीरज वशिष्ठ पर भी मामला दर्ज किया जाना चाहिए।'

दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया है कि 1अक्तूबर 2013 को 5 करोड़ रूपये तत्कालीन गुजरात के मुख्यमंत्री को दिए गए। 12 नवंबर 2013 को 50 करोड़ रूपये गुजरात के सीएम को दिए गए। 29/11 2013 को भी गुजरात के सीएम को पैसे भेजे गए और ये सारा लेनदेन नीरज वशिष्ठ की निगरानी में हुआ। ये आयकर विभाग के छापों में मिले दस्तावेज़ों में सामने आया।  दिग्विजय सिंह का कहना है कि जो कार्रवाई तीन अफसरों पर इसी तरह के मामले में हो रही है, वही कार्रवाई नीरज वषिष्ठ पर भी क्यों नहीं होनी चाहिए।

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दरअसल, मामला ये है कि साल 2019 के आम चुनाव के दौरान पैसों के लेनदेन की रिपोर्ट आने के बाद से ही कांग्रेस के कई नेताओं और राज्य के अधिकारियों के नाम सामने आने की बातें कही जा रही हैं। इसमें कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए नेताओं के नाम भी रिपोर्ट में सामने आए हैं।

दिग्विजय सिंह ने कहा है कि लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस नेताओं पर आयकर के छापे इसलिए डाले गए, क्योंकि कमलनाथ सरकार के 15 महीने के कार्यकाल में सिंहस्थ, ई-टेंडरिंग से लेकर कई घोटालों पर सख्ती दिखाई गई थी।

दिग्विजय सिंह ने कहा, 'सीएम शिवराज सिंह स्वयं ही सांवेर की सभा में इस बात को स्वीकार कर चुके हैं कि यदि सरकार नहीं गिराते तो बर्बाद हो जाते। इसी तरह कैलाश विजयवर्गीय भी खुलेआम यह स्वीकार कर चुके हैं कि नरेन्द्र मोदी ने सरकार गिराई। इन लोगों ने सरकार केवल इसलिए गिराई क्योंकि ई टेंडरिंग सहित कई घोटाले सामने आने वाले थे। अब बदला लेने के लिए उन अधिकारियों पर एफआईआर करने की तैयारी है जो इन सब मामलों की जांच कर रहे थे।' 

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उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार से जुड़े मामले में आदेश देने का अधिकार चुनाव आयोग को नहीं है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि सीएम और पीएम के खिलाफ भी एफआईआर नहीं होती है तो हम सड़क से लेकर कोर्ट तक लड़ाई लड़ेंगे।'

दिग्विजय सिंह के इन आरोपों पर बीजेपी ने भी पलटवार किया है। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने कहा, 'दिग्विजय सिंह खुद कहते हैं कि चुनाव मैनेजमेंट से जीता जाता है। कांग्रेस ने चुनाव में जमकर बाहुबल और धन बल का उपयोग किया। इनके खिलाफ एफआईआर होनी चाहिए।' हालांकि दिग्विजय सिंह ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में पीएम मोदी और मुख्यमंत्री शिवराज के खिलाफ जो तथ्य पेश किए, उनका कोई जवाब वीडी शर्मा ने नहीं दिया।

2019 के लोक सभा चुनाव से पहले मध्य प्रदेश में तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ के कई करीबियों पर आयकर छापे डाले गये थे। इन्हीं छापों में मिले दस्तावेजों को आधार बनाकर चुनाव आयोग ने मध्य प्रदेश सरकार से कहा है कि लोक सभा चुनाव से पहले किसी अवैध लेन-देन में जिन लोगों के नाम सामने आए हैं, उन पर कार्रवाई की जाए। उसी के आधार पर राज्य सरकार कुछ अधिकारियों और कांग्रेस नेताओं के खिलाफ एफआईआर करने की तैयारी में है।