जंगल में रहने को मजबूर हैं बाढ़ पीड़ित, हाल जानने पहुंचे दिग्विजय सिंह ने उठाया सरकारी अनदेखी पर सवाल

बाढ़ग्रस्त इलाकों में दिग्विजय सिंह के दौरे का आज आखिरी दिन, गांवों-जंगलों में जाकर लोगों से मिले पूर्व सीएम, पूरी तरह बर्बाद हो गए हैं लोगों के घर, सिंह ने दिया हर संभव मदद का भरोसा

Updated: Aug 15, 2021, 06:30 PM IST

जंगल में रहने को मजबूर हैं बाढ़ पीड़ित, हाल जानने पहुंचे दिग्विजय सिंह ने उठाया सरकारी अनदेखी पर सवाल

ग्वालियर/दतिया। मध्य प्रदेश में बाढ़ का पानी तो उतर गया लेकिन अपने साथ लाखों लोगों की किस्मत को भी कंगाल कर गया। चौतरफा बाढ़ का शोर हुआ, खूब दौरे हुए, राहत की नावें चलीं, हेलिकॉप्टर उड़े लेकिन अब यहां विपदा पसरी है और पूछने वाला कोई नहीं है। सरकार सर्वे का हवाला दे रही है लेकिन इलाके के दौरे पर निकले पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को लोग बता रहे हैं कि दस दिन होने को आए अब तक सुध लेने कोई नहीं पहुंचा।  

बाढ़ पीड़ितों से मिलने पहुंचे दिग्विजय सिंह जब भिंड में लहार ब्लॉक के पर्रायच गांव पहुंचे तो दृश्य हैरान करनेवाले थे। यहां घरों की दीवार छूते ही ढहने लगती है और स्थानीय लोग इस कदर डर गए हैं कि अपने घर तक जाने को तैयार नहीं हैं। सो गांव के लोगों ने जंगल में प्लास्टिक के तंबू गाड़ लिए हैं। मुश्किलों में जी रहे लोग बताते हैं कि राशन-पानी बह गया और घरों की दीवारें भी नहीं बचीं जो सुरक्षा का आसरा दे सकें, सो जंगल में पड़े हैं।

शनिवार को ग्वालियर ग्रामीण इलाके का दौरा कर दिग्विजय सिंह भितरवार व डबरा विधानसभा क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित इलाकों का हाल जानने पहुंचे थे। यहां उन्होंने ग्रामीणों से मुलाकात कर उनका दुख दर्द सुना। इलाके के लोग बताते रहे कि अब तो गांव में लौटने से डर लग रहा है। छोटे-छोटे बच्चों के साथ अब भूख भी एक चुनौती बन गयी है।  

ये हाल केवल एक जिले या गांव का नहीं है, बाढ़ जहां जहां आयी है, लोग ऐसी ही बेहाली में जी रहे हैं। सबसे ज्यादा परेशानी श्योपुर जिले के गांवों में है। जहां गरीबी भी है और बेबसी भी चरम पर है। यहां मंडावा गांव के एक निवासी, खेतान पटेल की दर्द भरी कहानी ने सभी को संवेदनाओं से भर दिया। चार दिन की बाढ़ में चार हज़ार क्विंटल अनाज की बार्बादी हो गई और इसके साथ ही उनके सपने भी स्वाहा हो गए। खेतान बताते हैं कि ये अनाज उन्होंने घर की बेटियों की शादी के लिए जुगाड़कर रखे थे। उम्मीद थी कि इससे उन्हें पढ़ा-लिखा दूल्हा ढ़ूंढ़ने में मदद मिलेगी लेकिन अब वह उम्मीद धूमिल रह गई। अब वे पढ़ा लिखा दूल्हे की बजाय किसी से भी अपनी बेटियों की शादी कर देंगे।

दिग्विजय सिंह ने तीन दिन में ऐसे सैकड़ों गांवों का दौरा कर ग्वालियर में प्रेस वार्ता की। इस बातचीत में उन्होंने बताया कि ये बदहाली ईश्वरीय कम और इंसानी ज्यादा है। दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया कि इन इलाकों में आयी बाढ़ दरअसल लापरवाही की बाढ़ है। अधिकारियों ने समय रहते बांध की निगरानी नहीं की, नदियों से पानी अचानक छोड़ दिया गया, और इसी पानी से अनेक गांव तबाह हो गए। तबाही इस कदर आयी कि गांव में आज भी लोग खाने और स्वच्छ पानी तक के लिए तरस रहे हैं। लेकिन सरकारी इंतजाम नहीं के बराबर है। दिग्विजय सिंह ने कहा कि यह बाढ़ सरकारी मिसमैनेजमेंट का नतीजा रहा और अब भी पीड़ित लोग सरकारी उपेक्षा के शिकार हैं।   

यह भी पढ़ें: सिंधिया को हराने वाले केपी यादव को बीजेपी ने बनाया अपना प्रवक्ता, पार्टी ने जारी की 15 प्रवक्ताओं की सूची

हालांकि स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर वीडियो मीटिंग में मुख्यमंत्री शिवराज चौहान ने इस तबाही से बचाव का एक नायाब तरीका निकाला है। अब बाढ़ के रास्ते में आनेवाले गांवों को ही रास्ते से हटाने का विकल्प तलाशा गया है। मीडिया में आयी खबरों के मुताबिक जो गांव लो लेवल पर हैं और जहां पानी आसानी से भर जाता है, उन गांव के लोगों को वहां से हटाया जाएगा, लेकिन उनके पुनर्वास का क्या प्लान हैं, यह अभी तक सामने नहीं आया है। 

बहरहाल, कांग्रेस नेता ने अपने दौरे के चौथे दिन आज सुबह ग्वालियर स्थित माधव राव सिंधिया कांग्रेस कार्यालय में झंडा वंदन किया। इसके बाद उन्होंने भिंड जिले के लहार विधानसभा क्षेत्र में प्रभावित इलाकों में जाकर लोगों से मुलाकात की। उन्हें हरसंभव मदद का भरोसा दिया। दौरे के आखिरी दिन दिग्विजय सिंह बाढ़ प्रभावित दतिया में लोगों से मिल रहे हैं।