बच्चों का आहार खा गई सरकार, चारा घोटाले की तर्ज पर MP में आहार घोटाला, CM चौहान के पास है मंत्रालय

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के महिला एवं बाल विकास विभाग में बच्चों की पूरक पोषण आहार योजना में बड़ी अनियमितता और धोखाधड़ी सामने आई है। इसका खुलासा मध्य प्रदेश ऑडिटर जनरल (MPAG) की रिपोर्ट में हुआ है।

Updated: Sep 05, 2022, 02:21 PM IST

बच्चों का आहार खा गई सरकार, चारा घोटाले की तर्ज पर MP में आहार घोटाला, CM चौहान के पास है मंत्रालय

भोपाल। चारा घोटाले की तर्ज पर मध्य प्रदेश में पोषण आहार योजना घोटाला सामने आया है। प्रदेश में गरीब बच्चों और गर्भवती महिलाओं को मिलने वाले पोषण आहार के टेक होम राशन में बड़े स्तर पर धोखाधड़ी मिली है। मध्य प्रदेश ऑडिटर जनरल (MPAG) की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि जिन ट्रकों से 1100 टन के पोषण आहार का परिवहन बताया गया वो ट्रक नहीं मोटर साइकल और स्कूटर निकली।

ऑडिटर जनरल की ऑडिट रिपोर्ट में बताया गया है कि 110.83 करोड़ रुपए का पोषण आहार तो सिर्फ कागजों में ही बंट गया। जिन कंपनियों को राशन के परिवहन की जिम्मेदारी दी गई थी उन्होंने हैरतअंगेज तरीके से उतना माल जिसे बड़े ट्रकों से भेजा जाना था उसे मोटरसाइकल से ही भेज दिया। यही नहीं इस हैरत अंगेज परिवहन के लिए कंपनियों को 7 करोड़ रुपए भी दिए गए। ऑडिटर जनरल ने जब इसकी जांच की तो हड़कंप मच गया।

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दरअसल, प्रदेश में महिला एवं बाल विकास विभाग के तहत काम करने वाली आंगनबाड़ियों में कुपोषित बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए पोषण आहार भेजा जाता है। रिपोर्ट के मुताबिक- इस योजना के तहत करीब साढ़े 49 लाख रजिस्टर्ड बच्चों और महिलाओं को पोषण आहार दिया जाना था। करोड़ों का हज़ारों किलो वजनी पोषण आहार कागजों में ट्रक से आया लेकिन जांच में पाया गया कि जिन ट्रकों के नंबर बताए गए थे वो दरअसल मोटरसाइकिल, ऑटो, कार, टैंकर के थे। यहीं नहीं लाखों ऐसे बच्चे जो स्कूल नहीं जाते उनके नाम पर भी करोड़ों का राशन बांट दिया गया।

हैरानी की बात ये है कि भ्रष्टाचार का ये खेल उस मंत्रालय में चल रहा था जो खुद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के पास है। यानी सीएम शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व वाले विभाग ने कुपोषित बच्चों और महिलाओं के आहार खा गए। हम समवेत के पास सीएजी की 36 पेज की पूरी रिपोर्ट मौजूद है। 

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रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि कागजों में करीब 97 हजार मीट्रिक टन पोषण आहार स्टाक में बताया गया जबकि 87 हजार  मीट्रिक टन पोषण आहार ही बांटा गया। जांच में 10 हजार मीट्रिक टन पोषण आहार गायब मिला। साथ ही प्रदेश सरकार ने पोषण आहार की गुणवत्ता की जांच एक स्वतंत्र लैब से भी कराई। इसमें पाया गया कि प्रदेश की विभिन्न फर्मों ने करीब 40 हजार मैट्रिक टन पोषण आहार घटिया क्वालिटी का है। बावजूद सरकार ने 238 करोड़ रुपए का भुगतान भी कर दिया।

बता दें कि बिहार में चारा घोटाला भी इसी तर्ज पर किया गया था। जांच में सामने आया था कि चारे की ढुलाई जिन ट्रकों से किया गया वे असलियत में ट्रक के नंबर न होकर बाइक के नंबर थे। इस मामले में बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को न सिर्फ इस्तीफा देना पड़ा बल्कि वे कई साल तक सलाखों के पीछे रहे। अब देखना ये होगा कि इस मामले में क्या कुछ कार्रवाई की जाती है, चूंकि यह घोटाला भी सीधे तौर पर मुख्यमंत्री से जुड़ा हुआ है।