Indore: अतिक्रमण पर चला बुलडोज़र, प्रशासन ने छुड़ाई एक एकड़ सरकारी जमीन

इंदौर नगर निगम की बड़ी कार्रवाई, 15 अवैध निर्माणों पर चला बुलडोज़र, सरकारी ग्रीन बेल्ट की जमीन पर बने थे गोदाम और दुकानें

Updated: Nov 21, 2020, 02:37 PM IST

Indore: अतिक्रमण पर चला बुलडोज़र, प्रशासन ने छुड़ाई एक एकड़ सरकारी जमीन
Photo Courtesy : Bhaskar

इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर में आज सुबह पुलिस प्रशासन और निगम ने हिस्ट्रीशीटर शेख मुख्तियार के अवैध निर्माण को गिरा दिया। इंदौर नगर निगम की टीम ने विजय नगर थाना क्षेत्र में मुख्तियार के 15 अवैध निर्माणों को हटाकर राधिका कुंज में करीब एक एकड़ ज़मीन मुक्त कराई। इस ज़मीन पर मुख्तियार ने एक मकान के अलावा दुकान और गोदाम भी बना रखे थे।

नगर निगम ने जेसीबी और पोकलेन मशीन की मदद से शेख मुख्तियार के सरकारी जमीन पर बने अवैध गोदामों और दुकानों को जमींदोज किया। शेख मुख्तियार के खिलाफ अलग-अलग थानों में करीब एक दर्जन मामले दर्रज़ हैं। आरोपी ने अपने रसूख के बल पर ग्रीन बेल्ट की जमीन पर 15 दुकानें और बड़े गोदाम का निर्माण किया था। नगर निगम ने पहले भी मुख्तियार के अवैध कब्जे गिराए थे, लेकिन उसने फिर से अवैध निर्माण कर लिया था।

गौरतलब है कि नगर निगम ने इंदौर शहर के पूर्वी और पश्चिमी इलाकों के सात ऐसे कुख्यात बदमाशों की पहचान की है, जिन पर कई गंभीर मामले दर्ज हैं। प्रशासन ने मुख्तार से पहले साजिद चंदनवाला, जीतेंद्र उर्फ नानू तायड़े, अरुण वर्मा, लकी वर्मा, प्यारे मियां और अश्विन सिरोलिया के अवैध निर्माण पर भी कार्रवाई की थी।

दरअसल इन दिनों नगर निगम, जिला प्रशासन और पुलिस इनदिनों एंटी माफिया अभियान चला रहा है। जिसके तहत शनिवार सुबह नगर निगम ने कार्रवाई की। इस दौरान नगर निगम के अपर आयुक्त देवेंद्र सिंह, उपायुक्त लता अग्रवाल निगम भी टीम के साथ मौजूद थे।

शुक्रवार को नगर निगम ने लालाराम नगर में प्यारे मियां के आलीशान बंगले पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की  थी। प्यारे मियां के तीन मंजिला मकान की छत पर पेंट हाउस था, वहीं उसने बार बना रखा था। जेल में बंद प्यारे मियां के भोपाल के ठिकानों पर भी कार्रवाई की गई है। अवैध निर्माण के खिलाफ ये मुहिम तो अच्छी बात है, लेकिन सवाल यह है कि इतने बड़े-बड़े अवैध निर्माण आखिर बन कैसे गए? क्या इतने सारे अवैध निर्माण पुलिस प्रशासन और राजनीतिक संरक्षण के बिना ही बन जाते हैं?  सवाल यह भी है कि ये अवैध निर्माण जिन सरकारी अधिकारियों, कर्मचारियों और दूसरे लोगों की शह पर बनाए जाते हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई कब होगी?