MP सरकार को शराब ठेकेदारों की चेतावनी, नई नीति में बदलाव करें वरना नहीं खुलेंगी दुकानें

नई आबकारी नीति को लेकर शराब ठेकेदारों और सरकार के बीच छिड़ी रार, ठेकेदार 17 जिलों की 65 फीसदी दुकानें बंद करने की दे रहे हैं चेतावनी, राज्य सरकार को होगा करोडों का नुकसान

Updated: Mar 24, 2022, 02:49 PM IST

MP सरकार को शराब ठेकेदारों की चेतावनी, नई नीति में बदलाव करें वरना नहीं खुलेंगी दुकानें

भोपाल। मध्य प्रदेश की नई आबकारी नीति को लेकर शराब ठेकेदार और शिवराज सरकार के बीच तकरार जारी है। इसी बीच शराब ठेकेदारों ने राज्य सरकार को दुकानें बंद करने की चेतावनी दे डाली है। शराब ठेकेदारों ने चेतावनी दी है कि यदि नीति में बदलाव नहीं हुआ तो 17 जिलों के 65 फीसदी दुकानों पर तालाबंदी हो जाएगी जिससे राज्य सरकार को करोड़ों रुपए का नुकसान उठाना पड़ सकता है।

दरअसल, नई आबकारी नीति के तहत प्रदेश के 17 जिलों में सिंगल की जगह ग्रुप में शराब दुकानों के टेंडर दिए जा रहे हैं। इनमें भोपाल, राजगढ़, इंदौर, खंडवा, जबलपुर, छिंदवाड़ा, बालाघाट, कटनी, रीवा, सतना, उज्जैन, नीमच, सागर, ग्वालियर, शिवपुरी, भिंड और मुरैना जिले शामिल हैं। जबकि पहले सिंगल ठेके की व्यवस्था थी। यानी एक ही ठेकेदार जिले की दुकानों का संचालन करते थे। वित्त वर्ष 2022-23 के लिए आबकारी नीति के अनुसार 3-3 दुकानों के ग्रुप बना दिए गए हैं। यानी, ठेकेदार ग्रुप में दुकान चलाएंगे। इसी नीति का शराब ठेकेदार विरोध कर रहे हैं। 

यह भी पढ़ें: इंदौर: रात में BJP नेता के बेटे की हत्या, सुबह-सुबह सात आरोपियों के घर पर चला बुलडोजर

शराब ठेकेदारों ने नई नीति के तहत मिल रहे ठेके लेने से मना कर दिया है। नतीजतन इन 17 जिलों में औसतन 35 फीसदी ठेके ही नीलाम हो पाए हैं। बाकी बचे 65 फीसदी ठेके लेने वाला कोई नहीं मिल रहा है। राजधानी भोपाल में शराब की 90 दुकानें हैं। इन दुकानों के ई-टेंडर की प्रक्रिया 11 फरवरी से शुरू हुई थी। 23 मार्च तक छह दौर की नीलामी होने के बावजूद 32 दुकानों के ही ठेके हुए थे। यानी 65 फीसदी ठेके नीलाम नहीं हो सके हैं।

पुराने ठेके के अनुसार ठेकेदार 31 मार्च तक ही ठेके चला सकेंगे। 1 अप्रैल से ठेके नए सिरे से चलेंगे। चूंकि, आधे से ज्यादा ठेके नीलाम नहीं हुए हैं ऐसे में सरकार के सामने बड़ी मुसीबत खड़ी हो गई है। सरकार के पास अब दो ही विकल्प हैं, रेवेन्यू के नुकसान से बचने के लिए सरकार या तो खुद ठेके चलवाए अथवा नई आबकारी नीति में ठेकेदारों की मांग के अनुसार बदलाव करे। आबकारी संघ के अध्यक्ष ऋषिकांत शर्मा ने स्पष्ट कर दिया है कि आबकारी नीति में बदलाव किए बगैर वे ठेके नहीं ले पाएंगे।