भोपाल: 20 फीट गहरे सीवेज टैंक में उतरे थे दो कर्मचारी, दम घुटने से हुई दोनों की मौत

भोपाल में बीच सड़क पर 20 फीट गहरे सीवर में उतरे थे एक इंजीनियर और एक सफाईकर्मी, दम घुटने से हुई दर्दनाक मौत, बिना सुरक्षा उपकरण के सीवर लाइन में उतरने का मामला

Updated: Dec 30, 2021, 07:24 AM IST

भोपाल: 20 फीट गहरे सीवेज टैंक में उतरे थे दो कर्मचारी, दम घुटने से हुई दोनों की मौत

भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में सिस्टम को शर्मसार करने वाला हादसा हुआ है। यहां सीवर की सफाई करने के लिए टैंक में उतरे एक मजदूर और जांच के लिए साथ में उतरे एक इंजीनियर की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि सुरक्षा उपकरण दिए बगैर इन्हें 20 फीट गहरे सीवर में उतारा गया था।

जानकारी के मुताबिक यह हादसा सोमवार दोपहर साढ़े तीन बजे के करीब हुआ। नगर निगम के जोन नंबर-1 के लाऊखेड़ी क्षेत्र में अंकिता कंस्ट्रशन कंपनी सीवेज का काम कर रही है। सीवेज लाइन में घरों से निकलने वाला गंदा पानी भर गया है। अंकिता कंस्ट्रक्शन के इंजीनियर दीपक सिंह अपने साथ एक मजदूर को लेकर जांच और सफाई करने के लिए नीचे उतरे थे। उनके जूते बाहर रखे थे। 

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सीवेज के बहत जूते देख अनहोनी का आशंका जताते हुए गांधीनगर पुलिस को इस बात की सूचना दी। इसके बाद पुलिस और नगर निगम की टीम ने दोनों लोगों को बाहर निकाला लेकिन तबतक उनकी मौत हो चुकी थी। आशंका है कि जहरीली गैस से दम घुटने के कारण उनकी मौत हो गई। दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए हमीदिया अस्पताल भेज दिया गया है।

मामले पर अंकिता कंस्ट्रक्शन कंपनी का कहना है कि रूटीन काम में लोग नीचे उतरते ही नहीं है। कंपनी इस मामले को सीवेज में गिरकर मौत होने का एंगल दे रही है। कंपनी के सीनियर इंजीनियर अकाश पटेल का कहना है कि कंपनी सीवेज लाइन का रुटीन मेजरमेंट करती है। हर दिन इंजीनियर और मजदूर जांच के लिए जाते हैं, लेकिन ये ग्राउंड के ऊपर से ही होता है। ये दोनों इंजीनियर दीपक सिंह और मजदूर अंदर क्यों उतरे, कुछ समझ में नहीं आ रहा है।

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क्यों होती है सीवर में मौत

दरअसल, टॉयलेट से निकलने वाला मैला और अन्य जगहों का गंदा मिश्रण जब सीवर में फंस जाता है तो उसके भीतर खतरनाक गैस बन जाती है। बावजूद उसे साफ करने के लिए मजदूरों को ही अंदर भेजा जाता है। बिना उपयुक्त सुरक्षा के सीवर में जाना जानलेवा साबित होता है। सीवर की सफाई ऐसा काम है जिसे करने के लिए मशीनों की मदद ली जा सकती है। लेकिन 21वीं सदी के भारत में आज भी सीवर को साफ करने के लिए इंसान उतर रहे हैं जिससे उनकी असमय मृत्यु हो जाती है।