मध्य प्रदेश में नई आबकारी नीति 1 अप्रैल से लागू नहीं होने के आसार, क्या उमा भारती के कारण बैकफुट पर है सरकार

ख़बर है कि निकाय चुनाव के बाद ही नई शराब दुकानें खोलने को लेकर होगा फैसला, पुराने ठेकेदारों को ही दुकानों के संचालन की जिम्मेदारी, 1 जुलाई से होंगे नए ठेके देने का प्रस्ताव

Updated: Feb 10, 2021, 09:13 AM IST

मध्य प्रदेश में नई आबकारी नीति 1 अप्रैल से लागू नहीं होने के आसार, क्या उमा भारती के कारण बैकफुट पर है सरकार
Photo Courtesy: DNA India

भोपाल। बीजेपी की वरिष्ठ नेता उमा भारती के शराबबंदी, नशामुक्ति अभियान छेड़ने के एलान से क्या मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार नई आबकारी नीति को लेकर बैकफुट पर आ गई है? यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि राज्य सरकार नई आबकारी नीति पर अमल 3 माह के लिए टालने पर विचार कर रही है। बताया जा रहा है कि प्रदेश में नई आबकारी नीति 1 अप्रैल की बजाय अब 1 जुलाई से लागू करने की तैयारी है। 

मध्यप्रदेश सरकार द्वारा आबकारी नीति को होल्ड करने के पीछे उमा भारती का अभियान और निकाय चुनाव को माना जा रहा है। जानकारों का मानना है कि नगरीय निकाय चुनाव से पहले उमा भारती के अभियान का असर बीजेपी को काफी नुकसान पहुंचा सकता है। ऐसे में सरकार को यदि दुकानों की संख्या बढ़ानी होगी तो निकाय चुनाव संपन्न होने के बाद ही इससे संबंधित आदेश दिए जाएंगे।

मध्य प्रदेश में हर साल 15 मार्च तक टेंडर की प्रक्रिया पूरी कर ली जाती है, ताकि आगामी वित्तीय वर्ष में शराब के ठेके 1 अप्रैल से शुरू हो सके। आबकारी विभाग ने नई आबकारी नीति का प्रस्ताव तैयार कर राज्य सरकार को पिछले सप्ताह भेज भी दिया था। लेकिन इससे पहले ही नई शराब दुकानों को लेकर हंगामा शुरू हो गया। शराबबंदी को लेकर पूर्व सीएम उमा भारती के तेवर ने शिवराज सरकार को उहापोह की स्थिति में ला दिया है।

दरअसल, कर्ज में डूबे मध्यप्रदेश सरकार के पास राजस्व पाने का सबसे बड़ा जरिया शराब है। शराबबंदी की मांग के बीच सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि यदि राज्य में शराब प्रतिबंधित कर दी गई तो उससे आने वाले राजस्व की भरपाई कैसे होगी। राजस्व के लिहाज से शराब की दुकानों का संचालन सरकार के लिए काफी मायने रखता है। गृहमंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा ने पिछले महीने कहा था कि अवैध शराब की रोकथाम के लिए प्रदेश में शराब दुकानों की संख्या और बढ़ाई जानी चाहिए। 

मिश्रा के इस बयान को लेकर विपक्ष ने सरकार पर तो निशाना साधा ही था, खुद बीजेपी की दिग्गज नेता उमा भारती भी बिफर पड़ी थीं। उन्होंने सीएम शिवराज को पत्र लिखकर पूरे राज्य में शराबबंदी की मांग की थी। इतना ही नहीं वे 8 मार्च से शराबबंदी को लेकर अभियान भी शुरू करने जा रही हैं। मिश्रा के बयान पर विवाद बढ़ता देख सीएम शिवराज ने कहा था कि नई शराब दुकानें खोलने का फिलहाल कोई विचार नहीं है। बावजूद इसके आबकारी विभाग ने नई दुकानें खोलने के प्रस्ताव कलेक्टरों से मांगने के लिए प्रत्र भेज दिया था। हालांकि, बाद में इसे भी वापस ले लिया गया था।