मिशन 2023 के लिए जुटी कांग्रेस, MP NSUI को जल्द मिलेगा नया नेतृत्व, अध्यक्ष पद के लिए ये हैं मुख्य दावेदार

यूथ कांग्रेस और महिला कांग्रेस के बाद अब कांग्रेस की छात्र इकाई में होगा बड़ा बदलाव, अगले हफ्ते नए अध्यक्ष मिलने की संभावना, सचिन द्विवेदी और दिव्यांशु मिश्रा के नाम पर मंथन

Updated: Aug 31, 2021, 08:31 PM IST

मिशन 2023 के लिए जुटी कांग्रेस, MP NSUI को जल्द मिलेगा नया नेतृत्व, अध्यक्ष पद के लिए ये हैं मुख्य दावेदार

भोपाल। मध्य प्रदेश में होने वाले विधानसभा और लोकसभा उपचुनावों से पहले कांग्रेस की छात्र इकाई में बड़ा बदलाव होने वाला है। मिशन 2023 के लिए जुटी कांग्रेस ने एनएसयूआई को नया नेतृत्व देने का फैसला लिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अगले हफ्ते तक भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन की मध्य प्रदेश इकाई के नए अध्यक्ष की नियुक्ति की जाएगी। दरअसल, वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष विपिन वानखेड़े को यूथ कांग्रेस में उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी मिलने के बाद लंबे समय से नए अध्यक्ष के नियुक्ति की मांग हो रही है।

मध्य प्रदेश एनएसयूआई के प्रभारी नीतीश गौर ने इस संबंध में बताया कि नए अध्यक्ष की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। गौर के मुताबिक अध्यक्ष पद के लिए कुल 12 कार्यकर्ताओं को उनकी नेतृत्व क्षमता के आधार पर चयन किया गया था। इसके बाद सभी का इंटरव्यू भी लिया गया है। इंटरव्यू के आधार पर इनमें से किसी एक को अध्यक्ष बनाया जाएगा। हालांकि, पार्टी सूत्रों की मानें तो अध्यक्ष पद की रेस में अब 2 नाम ही बचे हैं। जल्द ही इनमे से किसी एक के नाम पर सहमति बन जाएगी। जिसके बाद कागजी प्रक्रिया पूरा कर उसे एनएसयूआई का कमान सौंपा जाएगा। इनमें ग्वालियर के सचिन द्विवेदी और कटनी के दिव्यांशु मिश्रा शामिल हैं। 

सिंधिया का विरोध कर सुर्खियों में आए सचिन द्विवेदी

सचिन द्विवेदी बीते दिनों तब सुर्खियों में आए थे जब उन्होंने सिंधिया को बेशर्म का फूल भेंट किया था। यह पहला मौका था जब सिंधिया के गढ़ माने जाने वाले ग्वालियर में उनका रास्ता रोक उनका विरोध किया गया था। इस मामले में सचिन को पुलिस ने जिला बदर कर दिया था। सचिन द्विवेदी की दावेदारी इसलिए मजबूत मानी जा रही है क्योंकि कांग्रेस से बगावत करने वाले सिंधिया के खिलाफ वे युवाओं की सबसे मुखर आवाज हैं। 

हालांकि, सिंधिया फैक्टर के इतर भी सचिन के पास वर्षों का संगठनात्मक अनुभव है। साल 2018 में उन्होंने छात्रों की समस्याओं को लेकर ग्वालियर से भोपाल तक 450 किलोमीटर पैदल मार्च किया था। छात्रों का नेतृत्व करते हुए वे दो बार क्रमशः 7 और 9 दिनों के लिए भूख हड़ताल भी कर चुके हैं। साथ ही आशाएं फाउंडेशन एनजीओ के माध्यम से वंचितों की मदद कार्य में भी आगे रहते हैं। खास बात यह है कि बेहद सामान्य परिवार में जन्मे सचिन का कोई राजनीतिक बैकग्राउंड नहीं है।

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NSUI के बेस्ट परफ़ॉर्मर रहे हैं दिव्यांशु मिश्रा अंशु

वर्तमान में कटनी के निर्वाचित जिलाध्यक्ष दिव्यांशु मिश्रा अंशु का पलड़ा भी बराबर है। माना जा रहा है कि उन्हें महाकौशल क्षेत्र से आने का फायदा मिल सकता है। संगठनात्मक अनुभवों की बात करें तो वे एनएसयूआई के बेस्ट परफॉर्मर लिस्ट में शामिल हैं। टिकरी बॉर्डर पर किसानों के लिए लंगर सेवा से लेकर कोरोना संकट काल में जरूरतमंदों का सहारा बनकर उन्होंने शीर्ष नेतृत्व को अपने नेतृत्व क्षमता का परिचय दिया है। व्यापम घोटाले को लेकर दर्जनों आंदोलनों का सफल नेतृत्व किया। छात्रों की मांगों को लेकर वे लाठियां खा चुके हैं और उन्होंने कई मुकदमे भी झेले। चर्चाएं हैं कि पीसीसी चीफ कमलनाथ खुद भी महाकौशल क्षेत्र को नेतृत्व देने के पक्ष में हैं। 

मुझे कोई शिकायत नहीं- विपिन वानखेड़े

एनएसयूआई के मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष विपिन वानखेड़े ने नेतृत्व परिवर्तन के फैसले का पूर्ण समर्थन किया है। उन्होंने वीडियो जारी कर कहा है कि मुझे कोई नाराजगी या शिकवा शिकायत नहीं है। उन्होंने कहा, 'मुझे अध्यक्ष पद पर रहते काफी समय हो चुका है। मैं भी यही चाहता हूं कि अब नए साथियों को मौका मिलना चाहिए। हम सब एक ही परिवार के सदस्य हैं। मैं पार्टी के फैसले का पूर्ण समर्थन करता हूं।'