MP: पट्टे में मिली आदिवासियों की 54 एकड़ जमीन कंपनी को बेची, तीन तहसीलदार समेत 8 के खिलाफ FIR

मध्य प्रदेश में आदिवासियों को दी गई शासकीय जमीन के दस्तावेजों में हेर-फेर कर खरीद बिक्री का खेल जारी, सतना में 54 एकड़ जमीन कंपनी को बेचा, दिग्विजय सिंह कि सरकार ने दी थी आदिवासियों को जमीन

Updated: Jul 27, 2022, 01:59 PM IST

MP: पट्टे में मिली आदिवासियों की 54 एकड़ जमीन कंपनी को बेची, तीन तहसीलदार समेत 8 के खिलाफ FIR

जबलपुर। मध्य प्रदेश में आदिवासियों को दी गई शासकीय जमीन के दस्तावेजों में हेर-फेर कर खरीद बिक्री का खेल जारी है। ऐसा ही एक मामला सतना जिले से सामने आया है जहां आदिवासियों को मिली 54 एकड़ जमीन फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से निजी कंपनी को दे दी गई। मामला सामने आने के बाद आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने तीन तहसीलदार समेत 8 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।

दरअसल, पूर्ववर्ती दिग्विजय सिंह कि सरकार ने आदिवासियों को जीवन यापन के लिए शासकीय भूमि पट्टे के रूप में दिए थे। अब प्रदेशभर में ऐसी जमीनों को अधिकारियों से साथ गांठ कर दबंगों द्वारा कब्जाने का खेल शुरू हो गया है। गुना कांड के बाद अब सतना से ऐसा ही मामला सामने आया जहां आदिवासियों की जमीन फर्जी दस्तावेज बनाकर एक निजी कंपनी को दे दी गई।

EOW एसपी देवेंद्र प्रताप सिंह राजपूत ने बताया कि आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ को भ्रष्टाचार के मामले में एक शिकायत प्राप्त हुई थी। जिसमें आरोप लगाया गया था कि तहसीलदार और पटवारी ने आपस मे मिलकर आदिवासियों को शासन से प्राप्त 54 एकड़ शासकीय जमीन के फर्जी दस्तावेज तैयार कर उसे कौड़ियों के भाव बेच दिया गया। 

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मामले की जांच सब इंस्पेक्टर फरजाना परवीन से कराई गई थी। जांच के दौरान उन्होंने पाया कि आरोपी रमेश सिंह ने तहसील बरही में पदस्थ तत्कालीन तहसीलदारों एवं पटवारियों की मिलीभगत से ग्राम करौंदी कुठीया महगवां एवं गढ़ौहा की लगभग 54 एकड़ भूमि जो कि शासकीय पट्टेदार भूदान धारक तथा अहस्तांतरणीय भूमि थी। उसे मामूली रकम देकर वर्ष 2008 में खरीदा गया। इसमें तहसीलदार एस के गर्ग एवं आरपी अग्रवाल तथा आरबी द्विवेदी द्वारा अभिलेखों की जांच किए बगैर शासकीय पट्टे की भूमि में बगैर कलेक्टर की सक्षम अनुमति लिये नामांतरण पारित किया गया है।

जांच में पाया गया कि तहसीलदार एवं पटवारी के द्वारा षड्यंत्र पूर्वक एवं छलपूर्वक कूटरचित दस्तावेज तैयार कर शासकीय भूमि का क्रय विक्रय किया गया। शासकीय अधिकारियों ने स्वयं लाभान्वित होने की नियत से अपने पद का दुरूपयोग कर कम दामों पर विधि विरूद्ध तरीके से विक्रय किया। 

मामले में रमेश सिंह, प्रतिनिधि टॉप ग्रेन मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड, एस के गर्ग तहसीलदार, आर.पी. अग्रवाल तहसीलदार, आर बी द्विवेदी तहसीलदार, नत्थूलाल रावत पटवारी, संतोष दुबे जूनियर पटवारी, संतोष दुबे सीनियर पटवारी एवं सुखदेव सिंह भवेदी पटवारी दोषी मानते हुए सभी के खिलाफ के धारा 420, 467, 468, 471, 120 बी भारतीय दंड विधान एवं 7 सी भ्रष्टाचार निवारण संशोधन अधिनियम , 2018 के अंतर्गत् मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी गई है।