केंद्र के समान 28 फीसदी डीए बढ़ाने की मांग पर अड़े मप्र के कर्मचारी, मंगलवार को रोका काम

कर्मचारियों की मांग है कि उन्हें केंद्र के समान 28 प्रतिशत डीए मिले, साथ ही 1 जुलाई 2020 और 1 जुलाई 2021 से वेतन वृद्धि एरियर समेत दी जाए, वित्त विभाग ने कहा मांग पूरी करने में साल भर में 8640 करोड़ का अतिरिक्त खर्चा आएगा

Updated: Jul 20, 2021, 08:09 PM IST

केंद्र के समान 28 फीसदी डीए बढ़ाने की मांग पर अड़े मप्र के कर्मचारी, मंगलवार को रोका काम
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भोपाल। मंगलवार को मध्यप्रदेश मंत्रालय के कर्मचारियों ने काम बंद रखा। प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी की औऱ अपनी मांगों के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह को ज्ञापन सौंपा। कर्मचारियों की मांग है कि उन्हें भी केंद्र की तर्ज पर 28 प्रतिशत डीए दिया जाए। कर्मचारियों ने पहले ही सरकार को चेतावनी दी थी कि अगर उन्हें केंद्र के समान महंगाई भत्ता नहीं दिया गया तो वे काम बंद कर देंगे। कर्मचारियों ने प्रदेश सरकार पर दबाव बनाने के लिए मंगलवार को काम-काज ठप रखा। इस हड़ताल की अगुवाई मंत्रालय कर्मचारी संघ ने की थी, वहीं अन्य जिलों में भी कर्मचारी संगठनों ने मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा।  

कर्मचारियों का आरोप है कि प्रदेश सरकार अन्य सभी खर्चे कर रही है, मंत्रालय होते हुए रिसॉर्ट्स में करोड़ों की लागत से बैठकें की जाती हैं। जब बात कर्मचारियों के डीए की आती है तो केवल आश्वासन दिया जाता है। कर्मचारियों का आरोप है कि सरकार ने उन्हें प्रोत्साहित करने की सभी स्कीम बंद कर दी हैं। कर्मचारियों ने कहा कि सरकार की एक आवाज पर महामारी के कठिन समय में प्रदेश सरकार के साथ कंधे से कंधे मिलाकर कर्मचारियों ने दिनरात काम किया है। सरकार की तरफ से इनाम तो दूर डीए और इंक्रीमेंट भी बंद कर दिए गए हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि प्रदेश में पिछले पांच साल से प्रमोशन नही किए जा रहे हैं, जिससे प्रदेश के लाखों कर्मचारियों में हताशा है। मंत्रालय कर्मचारी संघ की मांग है कि बढ़ती महंगाई की वजह से घर चलाना मुश्किल हो रहा है। वेतन वृद्धि, प्रमोशन और इंक्रीमेंट की मांगों पर सरकार विचार करे।

केंद्र से 16 % कम है मप्र के कर्मचारियों का डीए

मध्यप्रदेश में वर्तमान में कर्मचारियों को 12 फीसदी डीए मिलता है, जोकी केंद्र के कर्मचारियों से पहले ही 5 फीसदी कम था। अब केंद्र सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों का डीए 17 प्रतिशत से बढ़ाकर 28 प्रतिशत कर दिया है। जिससे मध्यप्रदेश और केंद्र के कर्मचारियों के डीए का अंतर बढ़कर 16 हो गया है। अब कर्मचारियों की मांग है कि उन्हें भी केंद्र से समान डीए दिया जाए, जल्द से जल्द इस अंतर को खत्म किया जाए।

कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि अगर विधानसभा सत्र से पहले उनकी मांगें नहीं पूरी होती है तो विधानसभा सत्र के दौरान कार्यप्रभावित हो सकता है। मध्य प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र 9 से 12 अगस्त तक होना है।

कर्मचारियों को दो साल से नहीं मिली है वेतन वृद्धि

वर्तमान में प्रदेश के प्रदेश के कर्मचारियों को 1 जनवरी 2019 की स्थिति में 12 प्रतिशत डीए दिया जा रहा है। डीए नहीं बढ़ने से उनकी वेतन वृद्धि नहीं हुई है। कर्मचारियों की मांग है कि उन्हें जुलाई 2020 और जुलाई 2021 की वेतन वृद्धि एरियर के साथ दी जाए।

सरकारी खजाने पर सालाना बढ़ेगा 8640 करोड़ रु का बोझ

डीए बढ़ाने पर आने वाले खर्चे के बारे में प्रदेश के वित्त विभाग का कहना है कि केंद्र के समान महंगाई भत्ता देने के लिए हर महीने 720 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्चा करना होगा। जो की सालाना करीब 8640 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा। प्रदेश की माली हालत वैसे ही खराब है, कोरोना की वजह से प्रदेश में आर्थिक संकट है, नए खर्चा उठाने के लिए प्रदेश को और कर्जा लेना पड़ सकता है।

52 लाख केंद्रीय कर्मचारियों, 60 लाख पेंशनर्स को मिली है सौगात

हाल ही में केंद्र सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों का महंगाई भत्ता 17 से बढ़ाकर 28 प्रतिशत कर दिया है। एक जुलाई 2021 से इसका लाभ देशभर के 52 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और 60 लाख पेंशनर्स को मिलेगा। वहीं मध्य प्रदेश में दो साल से 14 लाख से ज्यादा कर्मचारियों को वेतन वृद्धि और डीए नहीं मिला है। मंगलवार को कर्मचारियों ने डीए समेत अपनी 5 मांगों को लेकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह को ज्ञापन सौंपा। साथ ही चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगें नहीं पूरी की गई तो भविष्य में प्रदेशव्यापी आंदोलन किया जाएगा।